Aug 13, 2019

जिंदगी - एक बेहतरीन मल्टी-कलर गुब्बारा.





किसी का भी लाइफ़ गोल क्या है?
यानि लक्ष्य.

शायद कुछ ऐसा बनना जिससे आप 
हमेशा इम्प्रेस रहे हैं,
या के कुछ ऐसा करना जो आपने अभी 
तक नहीं किया,
या के कुछ ऐसा पाना जो अभी तक 
आपके जीवन में नहीं है.

अब मज़ेदार ये है कि
आप जिन लक्ष्यों को अचीव करते हैं,
वे सभी किसी न किसी रूप में आपकी 
नॉलेज की बाउंड्री के अंदर का ही प्रोडक्ट मात्र है
या के
उनका कुछ बढ़ा-चढ़ाकर समझा गया एडिशन.

क्या आपको कभी नहीं लगता कि
आप कभी 1 साल का या 5 साल का या
कभी थोड़ा और लंबा लगभग 10 साल का लक्ष्य बना डालते हैं
और इनके बारे में तो आपको डे वन से पता होता है.

सिर्फ ऐसी चीजें करने का क्या फायदा,
जो आप पहले से जानते हैं?
वो तो कितने ही लोग पहले कर चुके हैं.

वो अब कुछ नया तलाश कर रहे हैं,
कुछ ऐसा जो उनकी कल्पनाओं से परे हो,
जो उन्हें अंदर से मिठास में बदल दे.
लक्ष्य तो आपको कड़वाहट की सीमाओं में बांध रहे हैं.

आप चारों तरफ़ नज़र घुमाइए.
सब अपने लक्ष्यों को पाने के लिए दौड़ रहे हैं,
आपसे किसे मतलब रह गया है?
आपको किस से मतलब रह गया है?
जिंदगी से किसे मतलब रह गया है?

चीज़ें हासिल करने का गोल बना लेने और
उसे पा लेने आपके भीतरी जीवन पर
कभी फर्क नहीं पड़ेगा.

चीज़ों की ख़ुशी कुछ देर टिकती है और फ़िर गायब.
तो, टाइमबाउंड लक्ष्य बना डालने से चीजें हासिल
तो हो सकती हैं,
लेकिन ये आपको ख़ुशी या आनंद से भर दे,
इसकी जीरो % गारंटी है.

लंबे-चौड़े लक्ष्यों की बजाय
अगर कभी आप कोई सरल लाइफ़ गोल रख सकें
जैसे कि
क्या बीते कल की अपेक्षा मैं आज के दिन
ज्यादा अच्छे तरीके से जी सकता हूँ?
तो इसमें आप अपने आप को जस्टिफाई करते हुए
कम पकाऊ और बोरिंग महसूस कर सकते हैं.

ये ख़ुद को अवेयर रखने, जागरूक रह सकने,
एक मददगार लक्ष्य है.

मगर इन दिनों आपको लगता है कि
जब तक आप तनाव नहीं लाएंगे,
आप कुछ हासिल नहीं कर सकते.

तो आप अपने गोल तक जाने के लिए
किसी रबर बैंड की तरह आप एक तनाव या
खिंचाव पैदा करते हैं.

एक जगह से दूसरी जगह का तनाव,
एक सोशल स्टेटस से दूसरे स्टेटस को पाने का तनाव,
एक फाइनेंसियल पोजीशन से दूसरी पोजीशन
तक पहुँच जाने का तनाव,
एक एजुकेशन लेवल से दूसरे में जाने का तनाव
एंड सो ओन.....

कुल मिलाकर आप अपनी वर्तमान पोजीशन से
कितने नाख़ुश हैं? हैं ना?
और चीज़ों को कलेक्ट करते करते एक दिन जिंदगी चुपचाप आपको ही कलेक्ट कर लेगी.

इस धरती पर अपनी एंट्री लेने के बाद
पुराने समय में लोग पक्षियों के पंख, पशुओं की खाल, हड्डियां आदि कलेक्ट करते थे. फ़िर वो चले गए.

उसके बाद के नए लोग गेहूं, चावल, अनाज, अशर्फियाँ आदि का स्टॉक कलेक्ट करने लगे. वो भी बीत गए.

फ़िर आए लोग प्रॉपर्टी, शेयर, स्टॉक मार्केट, म्यूच्यूअल फंड्स, टेक्नोलॉजी आदि कलेक्ट और अपग्रेड करने पर ज़ोर आजमाइश कर रहे हैं. एक दिन वो भी बीत जायेंगे.

कुछ लोग दूसरे राज्यों को जीत लेना चाहते हैं.
कुछ दूसरे अन्य देशों को जीत लेना चाहते हैं.

सब अपनी चाहतों को लक्ष्य का नाम देकर 
पुकार रहे हैं.
लेकिन मूलभूत बात को पकड़ने से सभी को 
डर लगता है.
जबकि ये बात लाइफ़ को संभावनाओं से भर सकती है.


अपने टाइम के हिसाब से क्या आप बेहतरीन कर 
पा रहे हैं? बस असली सवाल ये ही है.

कोई भी अपना लाइफ़ गोल तब तक नहीं बनाएगा,
जब तक कि उसके बेहतरीन एफर्टस में कोई कमी ना रह जाए.

किसी को प्रेरणा देने के लिए लक्ष्यों को
तलाशा जा सकता है
लेकिन
किसी भी जिंदगी को किसी भी मकसद की ज़रूरत नहीं है.

ये अपने आपमें ही एक बेहतरीन मकसद है.

और ये एक दिन अपने-आप ही ख़ुद को पूरा कर लेगी,

बस भागीदारी के % का खेल है.

और क्या है आख़िरकार जिंदगी? 
मल्टी-कलर गुब्बारा और क्या.

इमेज सोर्स: गूगल



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