Aug 15, 2019

किसी भी जीवन का फाइनल लक्ष्य आज़ादी ही है.






72 साल से ऊपर का हर भारतीय आज़ाद ही पैदा हुआ.
उससे बड़े बुजुर्गों को ही असली कहानी का पता होगा
कि गुलामी के असली दिन कैसे रहे होंगे?

ग्लोबल लेवल पर गुलामी 4 तरह की होती है.
मन की गुलामी
तन की गुलामी
धन की गुलामी
और जीवन की गुलामी


उसी तरह आज़ादी भी 4 तरह की पायी जाती है.
मन की आजादी
तन की आज़ादी
धन की आजादी
और जीवन की आज़ादी.


आदमी पहले गुलाम होता है और फ़िर देश
लेकिन
देश पहले आज़ाद होता है और फ़िर आदमी.


किसी भी जीवन का फाइनल लक्ष्य आज़ादी ही है.
किसी भी तरह की गुलामी से आज़ादी.

मन की प्रसन्नता मन की आज़ादी है
और मन की उदासी मन की गुलामी.

तन का स्वस्थ होना तन की आज़ादी है
और तन का अस्वस्थ होना तन की गुलामी.

धन को ही सबकुछ मान लेना धन की गुलामी है
और धन का सही इस्तेमाल धन की आज़ादी.


सिर्फ़ अपने नज़रिये को सही मान लेना, 
जीवन की गुलामी है
और सबको सही नज़रिये से देख पाना 
जीवन की आज़ादी.


जन्म के समय
हर किसी जीव को
दिमाग और दिल इसीलिए दिए जाते हैं
ताकि वो किसी एक ही चीज़ को सबकुछ मानकर चलने की गलती से बचे.


आज हर भारतीय आज़ाद है
क्योंकि इसके लिए सालों पहले कितनों ने ही कड़ी कुर्बानी दी.
अपना सबकुछ भूलकर वो देश के लिए शहीद हुए.
आज भी हमारे हीरो देश की सीमा पर लगातार डटे हुए है.
उनके ज़ज्बे, हिम्मत और सैक्रिफाइस को सलाम है.

उनकी आज़ादी की कामना
हमारी आज़ादी की कामना से बहुत विशाल है.


वो देश के लिए हैं.
हम सिर्फ़ अपने और अपनों से बाहर 
निकल कर देख ही नहीं पाते.
वो सबको देख रहे हैं,
सबके लिए देख रहे हैं.

और ये ही कारण है
कि उनके लिए अपार श्रद्धा का भाव हमेशा रहता है.

आज राखी भी है.
सभी के लिए
एक तरह से आज़ाद हवा में रहने का दिन.

और सही मायनों में तो
जिस दिन हमें अपने गुलाम विचारों से 
मुक्ति मिल जाएगी,
वो दिन असली आज़ादी का खुबसूरत पल होगा
जिसमें सभी की भलाई की ख़ुशबू बसी होगी.

कोशिश करते रहिए.
कोशिशें ही कामयाब होती हैं.


इमेज सोर्स: गूगल






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