Aug 27, 2019

तेरे जितनी समझदार पत्नी तुझे मिलेगी भी या नहीं?





बड़ी बातें और बड़े रहस्य जानने - समझने ले लिए
ये ज़रूरी नहीं कि आपको किसी 
बड़े शहर में शिफ्ट होना होगा.
ये सब एक छोटे शहर में जान लेना ज्यादा आसान, रोचक और सस्ता हो सकता है?
कैसे?
आम जिंदगी की एक प्रैक्टिकल कहानी से इस मैनेजमेंट फंडे को जानने की कोशिश करते हैं.

एक छोटा शहर हिम्मतपुर.
उसमें एक कॉलोनी. नाम – एकता कॉलोनी.
वहां एक फेमस समोसे की छोटी सी दुकान. 
नाम – स्वाद स्वीट हाउस.
दुकान के मालिक आत्माराम.
समोसे का स्वाद बेमिसाल और फ्रेश.
क्योंकि हर बार नए तेल का इस्तेमाल.
साथ में खट्टी-मीठी चटनी.
हर कस्टमर के मुहं से बस वाह-वाह.
दुकान पर खाने और पैकिंग सुविधा से रोज लगभग 600 समोसों की सेल.
बासी बचे समोसों की कोई रीसाइक्लिंग नहीं.
कस्टमर्स को केवल और केवल फ्रेश तेल से बने एकदम ताज़ा समोसे.
क्वालिटी और सर्विस – दोनों ही जानदार.

अब आत्माराम जी ठहरे छोटे से बिजनेसमैन.
और उनके लड़के ने कर ली एक बड़ी यूनिवर्सिटी से MBA.

लड़का अपडेट से भरा हुआ.
पिता से कहा- डैडी, न्यूज़ है कि मंदी आने वाली है,
हमें Cost Cutting करके पैसे बचाने चाहियें.
ये इमरजेंसी में काम आयेंगे.

लड़का तो लड़का है.
पिता पुराने ज़माने के और कम पढ़े-लिखे भी.
बोले – अब मैं थक लिया हूँ, तू ही संभाल बेटा ये दुकान.
सब तेरा ही तो है.

बेटा ख़ुश. थ्योरी से प्रैक्टिकल सक्सेस के लिए 
इससे बड़ा मौका और कहाँ?
बोला- डैडी, कल से हम 70% फ्रेश और 
30% पिछले दिन वाला तेल इस्तेमाल करेंगे.
आत्माराम ने कहा – ओके.
अगले दिन ऐसा करने पर समोसों का स्वाद थोड़ा फीका. फ़िर भी सेल पूरी.
लड़का ख़ुश- डैडी, 30% तेल के पैसे बच गए.
पिता बोले – ये तो तेरे पढ़ने-लिखने का जादू है.


अगले दिन बेटे ने खट्टी चटनी की सर्विस भी 
बंद कर दी
और पुराने तेल की क्वांटिटी 40%.
समोसे बिके 400.
लड़का बोला – देखा डैडी, मैजिक ऑफ़ Cost Cutting.

उससे अगले दिन मीठी चटनी और पतली 
+ पुराने तेल की क्वांटिटी 60%.
टिश्यू पेपर देना भी बंद.
लड़के ने बनवाए सिर्फ़ 300 समोसे और बिके 200.
स्वाद किरकिरा सा लेकिन
आत्माराम को देख पुराने कस्टमर्स
अभी भी उम्मीदों से भरे.

मैनेजमेंट की इस अनोखी ब्रांडिंग से
सप्ताह के आखिरी दिन,
लड़का पूरे फ्लो में.
पुराने तेल का इस्तेमाल 80% 
+ चटनी भी पानी जैसी
और समोसे बनाए केवल 100.
एक भी समोसा नहीं बिका.
Cost Cutting का उसका फ़ॉर्मूला 
उसकी नज़र में सुपरहिट
लेकिन दुकान पर सन्नाटा.
लड़का ख़ुश.
पिता हैरान.

लड़के ने ख़ुशी भरी आँखों से पिता से कहा –
देखा डैडी, मैंने कहा था ना, कि मंदी आने वाली है.
आज तो हमनें पूरे पैसे ही बचा लिए.

आत्माराम ने बड़े प्यार से अपने लड़के का हाथ 
पकड़ा और उसे घर भेजते हुए कहा –
बेटे, भगवान् का लाख-लाख शुक्र है कि 
तू पढ़ - लिख लिया
और मुझ जैसे अनपढ़ को समझा सका कि 
Cost Cutting क्या होती है.

कल से चुपचाप समोसों की प्लेटें धोने बैठ जाना.
मंदी से मैं अपने आप निपट लूँगा.

या फ़िर अपनी पढ़ाई को आगे लेकर जाना
और किसी बड़े शहर में बड़ी कंपनी में
इस Cost Cutting के फंडे का प्रैक्टिकल करना.
तेरी शादी अभी पेंडिंग है
और मुझे डर है कि तेरे जितनी समझदार पत्नी 
तुझे मिलेगी भी या नहीं?




इमेज एंड आईडिया सोर्स: इंटरनेट

( सभी पात्र काल्पनिक. हास्य से मंदी के प्रोसेस को जानने का एक छोटा सा प्रयास)


No comments: