Aug 7, 2019

करियर से भी ज्यादा इम्पोर्टेन्ट है कॉमन सेंस.





वैसे तो पब्लिक सब जानती है
लेकिन
अगर आप पब्लिक से सीधे संवाद करने की 
कला जानते हैं,
तो आपके लिए पॉलिटिक्स एक अच्छा करियर 
आप्शन है.
इसमें भी सीखने के लिए काफ़ी कुछ 
नया हो सकता है और हास्य पैदा होता है.

कैसे?
आइए, देखते हैं.


दूरदराज के एक गाँव में एक नेता जी का भाषण था.


करीब 50 किलोमीटर की सड़क यात्रा के बाद 
जब नेता जी
सभा स्थल पर पहुँचे तो उन्होंने देखा कि
वहाँ सिर्फ 1 किसान ही उन्हें सुनने के 
लिए बैठा हुआ है.

नेता जी उदास, हैरान और परेशान.
निराश भाव से किसान से बोले - भाई
तुम तो 1 ही हो.
समझ नहीं आता, अब मैं भाषण दूँ या नहीं?


किसान बोला - साहब, एक बात बताओ?
मेरे घर पर 10 बैल हैं.
अगर मैं उन्हें चारा डालने जाऊँ और 
वहां एक ही बैल हो
तो बाकी 9 बैल नहीं होने के कारण क्या
उस 1 बैल को उपवास करा दिया जाना उचित है?


किसान का इतना शानदार और बढ़िया जवाब 
सुनकर नेताजी खुश हो गए.
मूड स्विच-ऑन हो उठा.

मंच पर पहुंचे और
उस 1 किसान को 2 घंटे तक भाषण दिया.


भाषण ख़त्म होने पर नेताजी बोले - भाई,
तुम्हारे बैलों का उदाहरण मुझे बहुत पसंद आया.

ये बताओ कि तुम्हें मेरा भाषण कैसा लगा?


किसान ने कहा – सच बताऊँ साहब?
नेता जी बोले – बिलकुल 100% सच बोलो.
कोई टेंशन नहीं.


किसान ने जवाब दिया - साहब,
9 बैलों की गैर-हाजिरी में 10 बैलों का चारा,
1 ही बैल को नहीं डालना चाहिए.
इतनी अक्ल मुझ में है.
लेकिन आप में नहीं है.


नेता जी बेहोश हो गए और
वहीँ मंच पर धड़ाम.


सच है कि करियर से भी ज्यादा इम्पोर्टेन्ट है 
कॉमन सेंस.
अब लोग इस चीज़ को पहचानने लगे हैं.

सचमुच कितनी अच्छी बात है.
कोई 1 भी आपको सच्चाई दिखा सकता है.
कभी भी, कहीं भी.
हमें ऐसे ही किसानों की जरुरत है.


इमेज सोर्स: गूगल


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