Sep 28, 2019

तो वर्ल्ड चैंपियन भी आपके आगे पानी भरेगा.






हर दिन की अपनी एनर्जी है.
कोई भी, अपनी फ्रीक्वेंसी चेंज करके,
एनर्जी के अलग-अलग आयामों से
मिलता है.

कोई ना उसे बना सकता है और
ना ही ख़त्म कर सकता है.

आप सिर्फ़ उसके डायमेंशन पर,
उसके ट्रांसफॉर्मेशन पर
बात कर सकेंगे.
उसे इसी तरीके से महसूस किया जा सकता है.
कोई दूसरा रास्ता नहीं है.

अगर साइंटिफिक शब्दों में कहें तो –
सबकुछ ही एनर्जी है.
बस उसके रूप-रंग अलग से हैं.

ऐसी ही दो एनर्जी,
जो हम ज़रूरत से ज्यादा क्रिएट करते रहे हैं,
वो है गुस्सा और दूसरा फियर यानि डर.

आज चारों तरफ़ इन दोनों का ही बोलबाला है,
डंका बज रहा है.
दोनों एनर्जी अपने सर्वोतम दौर में हैं.

गुस्सा और डर, ये दोनों चचेरे भाई हैं.
अपोजिट स्वभाव वाले.
गुस्सा आपका मुहं खोलता है
और डर मुहं बंद रखता है.
हैं दोनों ही खूबसूरत एनर्जी.

गुस्से में आप लाल-पीले हो जाते हैं.
ताक़त बढ़ती मालूम पड़ती है.
कई गुना पावरफुल हो जाते हैं.
शायद पहाड़ भी हिला दें.
उस समय आप ऐसी चीज़ें आराम से कर सकते हैं,
जो नार्मल रूटीन में इम्पॉसिबल लगती हैं.


उधर,
डर भी कमाल की एनर्जी है.
आपको डर लगा, कंपन पैदा हुआ.
रोंगटे खड़े हो जाते हैं.
उस वक़्त आप अगर दौड़ लगा कर देखें
तो वर्ल्ड चैंपियन भी आपके आगे पानी भरेगा.
आप इतना फ़ास्ट भाग सकते हैं.


गुस्से और डर,
दोनों को ना आप मार सकते हैं,
ना ही जीत सकेंगे,
बस समझ सकते हैं
और फ़िर इसे किसी और
एनर्जी टाइप में ट्रांसफोर्म कर सकते हैं.

अगर आप इन्हें अपने भीतर दबाए चलते हैं
तो ये गहराई से आपके अंदर समा जाएंगे.

इससे सुलझेगा क्या, ये कहना मुश्किल है
लेकिन चीज़ें उलझती जायेंगी, ये तय है.

अस्तित्व आपको ऐसे ही उड़ान भरवाता है.
वो समझाने की कोशिश करता है
कि हज़ारों-लाखों सालों से एनर्जी ट्रेवल करती रही है
और आगे भी करती रहेगी.

जैसे पानी एक एनर्जी है,
इसमें आप गुस्सा भर दीजिए और ये भाप बन गया.
या इसको आप डर से ठंडा कर दीजिए
और ये बर्फ़ बन जाएगा.
सिंपल एनर्जी ट्रांसफॉर्मेशन.
पर इसे ख़त्म नहीं किया जा सकता.
आप इसे अस्तित्व से बाहर उठा कर नहीं फेंक सकते.

ऐसे ही आपके साथ भी होगा.
कोई आपको ट्रांसफोर्म कर सकता है
लेकिन आपको कहीं फेंक नहीं सकता.
फेंकेगा भी कहां?

घूम-फ़िर के आप एक डोमेन,
एक रेंज में ही रोटेट कर सकते हैं.
हर कोई इसी नियम से आता और जाता है.
रोटेशन फ्रीक्वेंसी बस अलग है.

जब ये बात दिमाग समझ लेता है,
तब उथल-पुथल कम हो सकती है.

उससे पहले तक – “मेरा क्या होगा?”
ये एपिसोड चलता रहता है.

जब आपको पता चलने लगता है कि
आपका कुछ नहीं होगा.
आप घूमने उतरे हैं और घूमते रहिए.

तो गुस्से या डर जैसी एनर्जी
मुस्कराहट और संतुष्टि का रूप लेना शुरू कर देती हैं.

अब पूरा ब्रहमांड आपके भीतर जागने लगता है
और आप ख़ुद ही अस्तित्व हो जाते हैं.

और तभी समय से परे जा सकते हैं.

जिसे ये झलक मिले,
वो तर ही जाता है.

तो इस नवरात्रे, 
इन 9 दिनों में, 
अपने गुस्से और डर को
थोड़ा दूर से देखिए.
आप खिलखिला उठेंगे
और दूसरे भी.
हैप्पी नवरात्रे.


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Sep 24, 2019

“हाउडी मोदी” Vs “क्लर्क बनेंगे कंपेन” - एक छोटी सी लव स्टोरी





एक तरफ़ जहां अमेरिका में 50,000 भारतीय
“हाउडी मोदी कंपेन” का हिस्सा बनते नज़र आए
और जोश, ज़ज्बे और विदेशी धरती पर 
ताल ठोकते दीख रहे थे,

वहीँ दूसरी तरफ़ भारत में,
हरियाणा भी अपनी एक अलग खूबसूरती के साथ
लाइमलाइट में बना रहा.
“हाउडी मोदी कंपेन” को हरियाणा के
“क्लर्क बनेंगे कंपेन” ने कड़ी टक्कर दी.

50,000 के मुकाबले 15 लाख लोग,
हरियाणा में एक जिले से दूसरे जिलों की तरफ़
पूरे जोश और ज़ज्बे के साथ दौड़ते दिखे.
क्या छोटा, क्या बड़ा, क्या बैचलर और क्या शादीशुदा,
सभी के सभी पूरी तैयारी से अपने एग्जाम सेंटर की
तरफ़ कूच करते नज़र आ रहे थे.

इसरो का “चंद्रयान कंपेन” भी हरियाणा 
को हैरानी भरी निगाहों से ओब्सर्व कर रहा होगा.
विक्रम लैंडर ने तो इतनी सारी भीड़ एक साथ, 
किसी राज्य की धरती पर शायद ही देखी हो.

जो भी हो.
इतना बड़ा इवेंट मैनेज करना कतई आसान 
नहीं रहा होगा.
और दिक्कतें आई भी.
जिन्हें खोना पड़ा,
उनके लिए असीम दुःख और तकलीफें भी लाई.

पर कुल मिलकर ये तीन दिवसीय इवेंट सबके लिए,
सवालों और जवाबों का अनूठा सिलसिला 
बन कर उभरा.

कम्पटीशन हमेशा टफ ही होता है.
चाहे विदेश में हो या अपने देश में.

हर कोई अपना डंका बजवाना चाहता है.
रास्ते और प्लानिंग अलग-अलग हो सकती हैं.

किसी भी लोकतंत्र में पावरफुल होने का मतलब है
संतुलन की कोशिश.
क्योंकि ये लोगों से बना, लोगों के लिए 
एक प्लेटफ़ॉर्म है.

कई दफ़ा,
सिर्फ़ परंपरागत चलते रहने से भी चीजें 
नहीं बदल पाती.

अगर एडवांस में ही
कुछ ऐसे अरेंजमेंट करने पर ध्यान दिया जाए किए
कि भीड़ बनने से पहले ही लोगों के 
लिए मूलभूत सुरक्षित
सुविधाएं और मापदंड डेवेलप कर लिए जायें
तो फ़िर उथल-पुथल की स्थिति से
किसी भी तरह की परेशानी से शायद ही 
रूबरू होने ही नौबत आए.

और तब हर कंपेन,
सक्सेसफुल और किफ़ायती होगा.
                                                                           
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जो भी शानदार है, सब आपके भीतर है.





जब मन ख़ुश होता है,
सबकुछ अच्छा लगता है.
एक कंपन, एक ख़ुशनुमा एनर्जी,
आपको मुस्कुराने के लिए लगातार उत्साहित करती है.

उस पल में, जब आप 100 फीसदी आनंदित होते हैं,
तो पाते हैं कि बाहरी संसार या उसकी 
कोई एक्सटर्नल एक्टिविटी
कहीं से भी आपको प्रभावित नहीं कर रही है.

ये उमंग, ये तरंग आपके अंदर उठ रही है.
ये भीतर के संसार की सुंदरता से आपको 
परिचित करा रही है.

एक्चुअली, आपका मूल स्वभाव ही ख़ुशी है.

अक्सर जब आप बाहर के किसी रिएक्शन को 
अपने अंदर इंजेक्ट करते रहते हैं,
और इसे एक प्रोसेस बनने की परमिशन देते हैं,
तभी चीज़ें दुःख देती हैं और 
आप डिस्टर्ब होते हैं.

अदरवाइज ऐसा कोई भी कारण शायद 
ही पैदा हो सकता है,
जो आपके भीतर के आनंद को हरा सके.

बाहर चाहे कुछ भी आपके फेवर का ना हो,
दुनिया में कुछ भी बने या बिगड़े,
आपको दुनिया सर पे रखे या ठोकरों से नवाजे,

रिश्ते-नाते,
जीवन के उतार-चढ़ाव,
सक्सेस- फेलियर
फॅमिली एंड प्रोफेशनल लाइफ,
कोई भी ऐसा सब्जेक्ट,
जिसे याद करके आपको कभी अफ़सोस फ़ील हो,
तब भी
इतना होने के बाद भी
ख़ूब सहने के बाद भी
अगर आप थोड़ा भी इंतजार कर सकने 
की कला को जान सकें
और ये समझ सकें कि ये सब चीज़ें आपके अंदर नहीं,
केवल और केवल बाहर घटित होती हैं.
और आपके कंट्रोल में हमेशा रहेंगी ही नहीं,

बस तभी, आप
अपने अंदर की केमिस्ट्री को अपने अनुकूल
बनाने की तरफ़ ध्यान दे सकेंगे.

अभी आपको बाहर की ब्यूटी ही सबकुछ लग रही है.
मगर,
जिस दिन और जिस पल,
आप अपने भीतर उतरे,
उस पल पूरा अस्तित्व ही
आपके अंदर नाचने लगेगा.

वो जो उत्सव होगा,
वो ही सच्चा होगा.
बाकी सब आपको सेकंड-हैंड नाटक लगेंगे.
क्योंकि
इस धरती पर ऐसा कुछ भी नहीं है,
जिसे आप हमेशा के लिए पा सकें
और जिसे पाकर आप हमेशा के लिए
ख़ुश रह सकें.

जो भी शानदार है,
सब आपके भीतर है.

ख़ुद की दिव्यता को पहचानिए.
फ़िर किसी भी इच्छा की इच्छा नहीं होगी.

आप जिस भी पल में होंगे,
और जहां भी होंगे,
वहां अधूरे नहीं होंगे.

और जब जिंदगी का पेट भरा होता है,
तभी वो किसी और के लिए कुछ कर सकती है.

आपको हमेशा भूखा नहीं मरना चाहिए.
कभी तो पेट भरा मिले.
हाँ या ना?


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Sep 21, 2019

जिनका उन्होंने सपना देखा था.





किसी भी चीज़ को करने के लिए
इंसान को मोटिवेशन की ज़रूरत होती ही है.
उसे हिम्मत जुटानी ही पड़ती है कि वो आगे बढ़े,
नए रास्तों की तलाश करे और
जो समय बीत चुका है, उसमें से सबसे 
बेहतरीन लम्हों को
साथ लेकर, उनकी मुस्कान पकड़ कर 
अपनी लाइफ़ को अधिक  
सुंदर, और ताज़ा बनाने के प्रयास ज़ारी रखे.

अपनी महक ना खोना, जीवन का बहुत बड़ा फैक्टर है,
जो आपको जिंदा रखता है,
वरना
सिर्फ़ सांसे चलती है,
आदमी मरा हुआ सा महसूस करता है.

ओरिजिनल होना बहुत ज़रूरी है.
और अब जब सभी जगह बड़े-बड़े नाटक 
खेले जाने के दिन हैं,
आपका ओरिजिनल होना आपको कुछ 
ख़ास बना देता है.

आप जैसा चाहें, वैसे बनिए, 
मगर ओरिजिनल बनिए.

कोई और आपको कैसा भी देखना चाहे,
आपको अपनी स्वाभाविकता को कभी ये 
सोच कर नहीं छोड़ना चाहिए कि
लोग आपके बारें में क्या कहेंगे.

वो ज्यादा से ज्यादा क्या कह सकते हैं?
क्या दूसरों के पास इतनी फुर्सत है कि वो
आपके बारें में सोचने में इतना समय लगा सकें?

क्या आपके पास इतना समय होता है कि
आप सबके बारे में सोचने में बहुत ज्यादा 
समय लगा पाते हों?
नहीं.

तो लोगों की चिंता छोड़िये.
उनके पास आलरेडी ही अपनी इतनी परेशानियां होंगी.
फ़िर आपको लेकर वो अपनी परेशानियां 
नाहक ही क्यों बढ़ाना चाहेंगे.

आप वो कीजिए, जो आपको पसंद हो.
ज़रूर करके देखिए.
इससे मन को तसल्ली होती है.

सभी एक दूसरे को देख कर अगर
अपनी पसंद का चुनाव करने लगें
तो जिंदगी रंगहीन ही हो जाए.

सबको वो करने दीजिए, जो वो चाहते हैं.
आप बस वो कीजिए, जिसे करते हुए
आप गुनगुना सकें, ख़ुश महसूस करें
और दिन ऐसे बीते, जैसे कुछ हुआ ही ना हो.

हर किसी को वो करके देखना चाहिए, जो
उसके दिमाग या दिल में पेंडिंग रह गया है.
तभी वो जान सकेगा कि रियलिटी 
एक्चुअल में है क्या?

किसी ने सच ही कहा है
कि सभी को बहुत अमीर और फेमस होना चाहिए,
उन्हें वो सारी चीज़ें करनी चाहियें,
जिनका उन्होंने सपना देखा था.

ताकि वो ख़ुद भी ये जान सकें कि
सिर्फ़ अमीर होना या फेमस होना ही
लाइफ़ को मीनिंगफुल बनाना नहीं है.
ये कुछ और है, जो लाइफ़ को अंदर से सजाता है.
आजकल इसे इनर इंजीनियरिंग कहा जा रहा है.


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