Sep 10, 2019

फिजिक्स - क्वांटम कंप्यूटर - रिसर्च - आत्मा - डॉ. श्रीकृष्ण.





इसरो के चंद्रयान के सफ़र ने जहां
भारतीय बच्चों के मन में अंतरिक्ष विज्ञान के
प्रति क्रेज पैदा कर दिया है,

वहीँ फिजिक्स और मैथ्स के इंटरनेशनल साइंटिस्ट
भी अब हिंदुस्तान की उस बात की पुष्टि
अपने एक्सपेरिमेंट्स में करने लगे हैं,
जिसमें आत्मा को अजर-अमर बताया जाता रहा है.
पहले तक इस कांसेप्ट की हंसी उड़ाने वाले
साइंटिस्ट अब अपनी रिसर्च से इस निष्कर्ष पर
पहुंचने लगे हैं कि बॉडी ख़त्म हो जाती है
और आत्मा कभी नहीं मरती.

उपलब्ध जानकारी के अनुसार,
लगभग 20 सालों की रिसर्च में
ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के फिजिक्स और मैथ्स
के प्रोफेसर सर रोगर पेनरोज और
यूनिवर्सिटी ऑफ एरीजोना के फिजिक्स साइंटिस्ट 
डॉ. स्टुअर्ट हमरॉफ ने 6 रिसर्च पेपर्स पब्लिश किये हैं.

उनके अनुसार शरीर के डेड होते ही आत्मा,
यूनिवर्स की तरफ़ आगे बढ़ जाती है
और उसके डेटाबेस में सेव्ड इनफार्मेशन 
ख़त्म नहीं होती.

अमेरिका के 1 फेमस साइंस चैनल पर जल्द ही,
इससे जुड़ी एक डाक्यूमेंट्री फ़िल्म भी रिलीज़ 
होने वाली है.
उनके अनुसार ह्यूमन माइंड एक 
बायोलॉजिकल कंप्यूटर है,
इसकी सेंसिटिविटी या अवेयरनेस ही आत्मा है,
जो क्वांटम कंप्यूटिंग से वर्किंग में रहती है.
माइंड के अंदर प्रोटीन से बनी बेहद छोटी
एटॉमिक नलिकाएं हैं,
जो ऊर्जा से भरपूर हैं और क्वांटम स्टेट 
क्रिएट करती हैं.
उससे उपजी चेतना ही आत्मा है.

जब आदमी दिमागी रूप से डेड होने लगता है,
तो ये एटॉमिक सेल्स, क्वांटम स्टेट को खोना
शुरू कर देते हैं और ऊर्जा धीरे-धीरे,
बॉडी से निकल कर यूनिवर्स का हिस्सा बनने लगती है.


म्यूनिख में प्लंक इंस्टीट्यूट है,
जो क्वांटम मैकेनिक्स के जन्मदाता,
मैक्स प्लंक के नाम पर है.
इंस्टिट्यूट के साइंटिस्ट हेंस पीटर टुर भी
इस तथ्य की पुष्टि करते नज़र आते हैं.


हज़ारों साल पहले से जिस आत्मा को हिंदुस्तान ने
चेतन- शक्ति कहा था,
उसे अब साइंटिस्ट भी एक्सेप्ट कर रहे हैं.

साइंस प्रैक्टिकल करके रिजल्ट आने पर यकीं करती है.

इस तरीके से पुराने ऋषि-मुनियों को
शानदार साइंटिस्ट मानना पड़ेगा.
बिना ज्यादा पब्लिसिटी और तर्क के,
वो उस समय के हिसाब से कितने एडवांस
और साइंटिफिक रहे होंगे?

ये गर्व करने का विषय बन सकता है.

श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो कर्म और आत्मा 
की पीएचडी करवाई,
और जो बाद में गीता-सार के रूप में भी पब्लिश हुई,
वो कमाल की टेक्निकल स्टडी रही होगी.

उस समय का टेक्निकल मिनिस्टर कौन था,
ये कौतुहल का सब्जेक्ट है.


वास्तव में,
हमने हमेशा अपने फेलियर को ही ज्यादा 
इम्पोर्टेंस दी है.
और उसके बाद गुलामी के सफ़र ने
इसे और पक्का कर डाला,
वर्ना मुस्कुराने और फ़क्र से सर ऊंचा रखने के
हमारे पास बहुत सारे कारण हैं,
हम मगर, गज़नी की तरह
उन चीज़ों को भुलाते रहते हैं.

अब, ये रिवर्स होने का समय है.
पलट कर देखिए.


इमेज एंड इंफो सोर्स: गूगल


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