Sep 13, 2019

रैंकिंग और रेटिंग में सुधार, हर किसी का सपना होता है.




जैसे जीवन चलता है,
वैसे रैंकिंग भी चलती रहती है.
अच्छी रैंकिंग क्रेज पैदा करती है.
कम अच्छी रैंकिंग और ऊपर जाना चाहती है.
रैंकिंग में आ जाना हौसला बढ़ाती है.

जीवन की तरह एजुकेशन में भी रैंकिंग का,
अपना महत्व है.

जैसे आप, अपनी हेल्थ, वेल्थ और हैप्पीनेस की 
रैंकिंग हर साल चेक करते हैं,
ठीक वैसे ही,
ग्लोबल लेवल पर एजुकेशनल इंस्टिट्यूट की भी रैंकिंग,
हर साल होती है.

टाइम्स हायर एजुकेशन द्वारा रिलीज़,
इस 2020 की रैंकिंग में,
भारत के 56 यूनिवर्सिटी और इंस्टिट्यूट के नाम हैं.
पिछले साल, ये आंकड़ा 49 था.

हालांकि, कोई भी इंस्टिट्यूट टॉप 300 में,
अपना स्थान नहीं बना सका है.
साल 2012 के बाद ये पहली बार है कि,
भारत टॉप 300 से बाहर हुआ है.

ब्रिटेन की ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी लगातार 
चौथी दफ़ा, नंबर 1 पर कायम है.
कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी नंबर 2 पर,
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी नंबर 3 पर,
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी नंबर 4 और
मैसाचुएटेस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी नंबर 5 पर है.

भारत के नजरिए से,
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु टॉप पर है.
वहीँ आई.आई.टी रोपड़ ने प्रभावशाली रूप से रैंकिंग में जगह बनाई है.
आई.आई.टी इंदौर पिछड़ गया है.
आई.आई.टी दिल्ली, आई.आई.टी खड़गपुर और
जामिया मिलिया इस्लामिया ने अपनी रैंकिंग में इम्प्रूवमेंट की है.

ओवरआल,
सभी टॉप भारतीय संस्थानों को 300 के 
बाद की लिस्ट में,
नाम आ जाने से ही संतोष करना पड़ा है.

रैंकिंग करने वाली संस्था के एडिटर,
एली बोथवेल के अनुसार
भारत की युवा पापुलेशन और इंग्लिश के
अच्छे बढ़ते यूज़ से, ग्लोबल लेवल पर,
हायर एजुकेशन में, भारत के लिए बहुत
स्कोप निकल सकता है.


वैसे यूनिवर्सिटी रिप्रजेंटेशन में,
भारत नंबर 5 पर है.
एशिया में, जापान और चीन के बाद 
उसका नंबर आता है.

उम्मीद पर जैसे दुनिया कायम है,
वैसे ही भारत भी.
आने वाले सालों में कुछ और नई
और शानदार साइंटिफिक चीज़ें होंगी,
ऐसा सोचना और करना ही,
आने वाले समय की मांग है.

रैंकिंग और रेटिंग में सुधार,
हर किसी के जीवन का सपना होता है.

इमेज एंड इंफो सोर्स: गूगल / मीडिया

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