Sep 15, 2019

ओज़ोन का साथ दीजिए. ये स्वार्थी लेयर नहीं है.





आज वर्ल्ड ओज़ोन डे है.
ओज़ोन वायुमंडल की एक लेयर है,
जो धरातल से 10 से 50 किलोमीटर की हाइट रेंज में रहती है
और अणुओं से बनी, एक हल्के नीले रंग की गैस है.

ये सूरज से आने वाली पैराबंगनी किरणों से हमारी रक्षा करती है.
ये ना हो तो सबके तोते उड़ना तय है.
क्योंकि, इंसानों द्वारा नेचर को गिफ्टेड जहरीली 
गैसेस और प्रदूषण ने ओज़ोन लेयर 
में होल यानी छेद को
बड़ा करते रहने की ज़िम्मेदारी संभाल रखी है.

हम इसे डेवलपमेंट का थीम मान रहे हैं
लेकिन
ऊपर बिलकुल उल्टा हो रहा है.
और अब तोते उड़ ही रहे हैं.

अगर आप साइंस के महारथी हैं
तो पैराबंगनी किरणों की अल्ट्रा-वायलेट 
ताक़त से अनजान नहीं होंगे.

अगर ये किरणें ओज़ोन लेयर को क्रॉस करके,
धरती पर प्रभाव जमाने में सक्सेसफुल हो गई
तो स्किन कैंसर, मोतियाबिंद जैसी हाई स्टेटस की
बीमारियां बहुत कॉमन और आसानी से 
अवेलेबल हो जाएँगी.
खेतों की फसलों, समंदर के जीवों और 
नेचर का भारी नुकसान होना तय है.

जब इतना कुछ सबके साथ होगा तो
आपके साथ भी कुछ न कुछ तो होगा ही.

इसीलिए समय रहते ओज़ोन फ्रेंडली बन जाइए
वरना सूरज तो गुस्से में है ही.
ये ओज़ोन ही है जो उसे गुजारिश करके 
शांत रखे हुए है
ताकि सभी अपने फेस्टिवल्स, हिंदी दिवस
और श्राद्ध जैसे आत्मिक अनुष्ठान
खुले मन और भरपूर स्वास्थ्य के साथ मना सकें.

तो ओज़ोन का साथ दीजिए.
ये स्वार्थी लेयर नहीं है.

इमेज सोर्स: गूगल



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