Sep 16, 2019

भूख लगने से कहानी शुरू होती है.





पहले तुम आते हो.
दोनों आंखें खोलते हो.
पलकें झपकाते हो.
इधर-उधर देखते हो.
हैरानी और विस्मय से निहारते हो.
अभी सब कुछ नया है.

फिर भूख लगने से कहानी शुरू होती है.
तुम्हें खाने के लिए दे दिया जाता है.
पेट भरते ही सोचने-जानने और
समझने का दौर स्टार्ट हो जाता है.

तुम्हारे चारों तरफ़ एक भीड़ है.
तुम्हें कुछ चीज़ें, लोग और विचार
चुनने के लिए खड़ा किया जाता है.

तुम आंखें घुमाते हो और
अपना दायरा और उम्र बढ़ाते चलते हो.

तुम्हें जो सिखाया गया है,
उसी से तुम्हारे भविष्य का स्वभाव
तुम पक्का मान लेने की कोशिश करते हो.

कभी तुम लोगों से सीखते हो,
कभी किताबों में कुछ तलाशते हो,
कभी दूसरों से तुलना करके,
ख़ुद को परिपक्व मानने की
चेष्टा भी करते रहते हो.

कभी-कभी आसमान की तरफ़ भी,
तुम्हारी निगाहें चल पड़ती हैं.
कभी नेचर भी तुम्हारी मेंटर हो जाती है.

सपने देखने की कल्पनाएँ भी जागने लगती हैं
और “मन” का कांसेप्ट दस्तक देता है.

धीरे-धीरे तुम्हें और सबका साथ मिलना शुरू होता है,
और कुछ समय बाद साथ छूटना भी
साथ-साथ चलने लगता है.

हर उम्र, हर साल, हर पल की
एनर्जी और विचार अलग होते जाते हैं.
दूरी, सभी को पसंद है.
समय को भी.

तुमने अब तक अपने दिमाग में,
जो भी भरा है,
वो तुम्हें चलाता रहता है.
तुम्हें नहीं पता होता कि अगले पल क्या होगा,
लेकिन तुम्हारा मन सबसे समझदार
होने की भ्रांति पैदा करता है.

तुम लिमिटेड एडिशन बनकर,
अनंत ख़ुशी के सोर्सेज तलाशते हो.
यहां एनर्जी लोस को देखा जा सकता है.

एक दिन ऐसा भी आता है
कि तुम्हारी कोई इच्छा नहीं बचती.
और अचानक तुम, फ़िर से एक
न्यू-कमर हो जाते हो.

फ़िर से, दोनों आंखें खोलते हो.
पलकें झपकाते हो.
इधर-उधर देखते हो.
हैरानी और विस्मय से निहारते हो.

अब बंद आंखों के साथ कुछ नया है.
पहले ये सब खुली आंखों के साथ अवेलेबल था.

अब तुम मांगना बंद कर देते हो.
तलाशना बंद कर देते हो.
ढूंढना बंद कर देते हो.
शांत, एकदम शांत हो जाते हो.
और वो आ जाता है,
जिसे तुमनें पहली बार पेट भरते ही
मिस करना शुरू किया था.

अधिकांश जीवन ऐसे ही बीत जाते हैं.

कुछ चुनिंदा ही उपलब्ध हो पाते हैं,
जो पूरी तरह जी कर मरते हैं.

यहां किस्मत का रोल,
लीड भूमिका में आ जाता है.

भूख तुम्हें विचार-शून्य (मैडिटेशन मोड) 
भी कर सकती है,
या फ़िर, एक जानवर भी बना सकती है.

वरना पल-पल में जीने की लाचारी
साफ़ देखी जा सकती है.

पापी पेट का सवाल जो है.

वैसे भी,
कलयुग से आउटपुट,
केवल साइंटिस्ट ही निकाल सकते हैं.

तुमनें तो साइंस ही पढ़ी है ना?

इमेज सोर्स: गूगल

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