Sep 24, 2019

जो भी शानदार है, सब आपके भीतर है.





जब मन ख़ुश होता है,
सबकुछ अच्छा लगता है.
एक कंपन, एक ख़ुशनुमा एनर्जी,
आपको मुस्कुराने के लिए लगातार उत्साहित करती है.

उस पल में, जब आप 100 फीसदी आनंदित होते हैं,
तो पाते हैं कि बाहरी संसार या उसकी 
कोई एक्सटर्नल एक्टिविटी
कहीं से भी आपको प्रभावित नहीं कर रही है.

ये उमंग, ये तरंग आपके अंदर उठ रही है.
ये भीतर के संसार की सुंदरता से आपको 
परिचित करा रही है.

एक्चुअली, आपका मूल स्वभाव ही ख़ुशी है.

अक्सर जब आप बाहर के किसी रिएक्शन को 
अपने अंदर इंजेक्ट करते रहते हैं,
और इसे एक प्रोसेस बनने की परमिशन देते हैं,
तभी चीज़ें दुःख देती हैं और 
आप डिस्टर्ब होते हैं.

अदरवाइज ऐसा कोई भी कारण शायद 
ही पैदा हो सकता है,
जो आपके भीतर के आनंद को हरा सके.

बाहर चाहे कुछ भी आपके फेवर का ना हो,
दुनिया में कुछ भी बने या बिगड़े,
आपको दुनिया सर पे रखे या ठोकरों से नवाजे,

रिश्ते-नाते,
जीवन के उतार-चढ़ाव,
सक्सेस- फेलियर
फॅमिली एंड प्रोफेशनल लाइफ,
कोई भी ऐसा सब्जेक्ट,
जिसे याद करके आपको कभी अफ़सोस फ़ील हो,
तब भी
इतना होने के बाद भी
ख़ूब सहने के बाद भी
अगर आप थोड़ा भी इंतजार कर सकने 
की कला को जान सकें
और ये समझ सकें कि ये सब चीज़ें आपके अंदर नहीं,
केवल और केवल बाहर घटित होती हैं.
और आपके कंट्रोल में हमेशा रहेंगी ही नहीं,

बस तभी, आप
अपने अंदर की केमिस्ट्री को अपने अनुकूल
बनाने की तरफ़ ध्यान दे सकेंगे.

अभी आपको बाहर की ब्यूटी ही सबकुछ लग रही है.
मगर,
जिस दिन और जिस पल,
आप अपने भीतर उतरे,
उस पल पूरा अस्तित्व ही
आपके अंदर नाचने लगेगा.

वो जो उत्सव होगा,
वो ही सच्चा होगा.
बाकी सब आपको सेकंड-हैंड नाटक लगेंगे.
क्योंकि
इस धरती पर ऐसा कुछ भी नहीं है,
जिसे आप हमेशा के लिए पा सकें
और जिसे पाकर आप हमेशा के लिए
ख़ुश रह सकें.

जो भी शानदार है,
सब आपके भीतर है.

ख़ुद की दिव्यता को पहचानिए.
फ़िर किसी भी इच्छा की इच्छा नहीं होगी.

आप जिस भी पल में होंगे,
और जहां भी होंगे,
वहां अधूरे नहीं होंगे.

और जब जिंदगी का पेट भरा होता है,
तभी वो किसी और के लिए कुछ कर सकती है.

आपको हमेशा भूखा नहीं मरना चाहिए.
कभी तो पेट भरा मिले.
हाँ या ना?


इमेज सोर्स: गूगल







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