Sep 6, 2019

साइंस ख़ुद से बोर ना हो, तो वो इंजीनियरिंग को जन्म देती है.




साइंस और धर्म यानि लाइफ साइंस
दोनों ही अनंत यात्रा करते हैं.
साइंस एक्सटर्नल लॉजिक से अपनी उड़ान भरता है,
और 
धर्म इंटरनल लॉजिक से.
ये दोनों एक्सरसाइज कम्फर्ट ज़ोन की तरफ 
सभी का ध्यान खींचते हैं.

साइंस दिमाग को अपना दादा मानता है
और धर्म मन को.

रिसर्च चलती रहती है.
उस चीज़ को पकड़ने के लिए जो हो तो सकती है,
मगर अब तक दिखाई नहीं दी.
सर्च है – पहले आ चुकी चीज़ों की स्टडी
और
रिसर्च है – आ चुकी चीज़ों से कुछ नया करने,
कुछ नया तलाशने की तैयारी.

इससे आदमी को सुखद महसूस होता है.
उसे लगता है कि आज उसने कुछ नया किया.
पिछले वाले कल से कुछ नया, कुछ अलग.
अगर आदमी ऱोज-ऱोज उसी सर्च को 
अपने दिमाग में घुमाता रहे
तो बोरियत होना नेचुरल है.
इसलिए वो नए की तरफ़ भागता है.

साइंस ख़ुद से बोर ना हो, तो वो इंजीनियरिंग 
को जन्म देती है.
धर्म ख़ुद से बोर ना हो, तो वो 
अध्यात्म हो जन्म देता है.
और इस तरह ये दोनों जुड़वाँ बच्चे 
आदमी की यात्रा को अस्तित्व की सैर कराते रहते हैं.

ख़ास बात ये है कि इन दोनों प्रोसेस में
पास या फ़ेल जैसी चीज़ नहीं होती.
बस इतना होता है कि या तो
आप को कोई नई चीज़ पता चल गई 
या फ़िर नहीं चली.
बस इतना ही.

गर पता चल गई तो आप क़दम आगे बढ़ाएंगे
और गर नहीं पता चली तो थोड़ा रुक कर
उसी प्रोसेस को नए तरीके से रिपीट करेंगे.


साइंस और धर्म की तरह ही ढ़ेरों ऐसी चीज़ें और हैं,
जो आदमी को उत्साह और नयेपन से भर सकती हैं.

एक्चुअली हर चीज़ एक एनर्जी है
और आदमी को एनर्जी ट्रांसफॉर्मेशन करते चलना है.

उसने धरती पर लगभग हर चीज़ देख ली है,
अनुभव की है.
अब वो ऊपर उठना चाहता है,
अंतरिक्ष में, आकाशगंगाओं में, अनंत में.

ऐसी जगहों पर
जहां अब तक उसकी यादों के निशान मौजूद नहीं हैं.

एक साइंटिस्ट इसे साइंस और रिसर्च से 
देखना चाहता है.
एक कवि इसे अपनी कल्पना से सच करना चाहता है.
एक संत इसे परमात्मा की ख़ोज कह सकता है.
एक आदमी इसे कर्म या किस्मत
कह कर डिफाइन करता है.

हर कोई, कुछ ना कुछ तलाश रहा है.
जिन्होंने तलाश कर पा लिया है,
वो बीत चुके हैं.
और जिनकी तलाश अभी अधूरी है,
उनको कुछ दिनों बाद बीत जाना होगा.

अस्तित्व वैसा का वैसा रहेगा,
बाकी सबको बदलते रहना होगा
क्योंकि
परिवर्तन संसार का नियम है.
ये नियम जिसनें भी बनाया है
उसे ही पता हो सकता है
कि चंद्रयान इस समय कहां और कैसा होगा?

मेरी क्लास है,
मुझे लेक्चर के लिए जाना है.
बाय.

इमेज सोर्स: गूगल
(केवल एक अभिव्यक्ति

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