Sep 24, 2019

“हाउडी मोदी” Vs “क्लर्क बनेंगे कंपेन” - एक छोटी सी लव स्टोरी





एक तरफ़ जहां अमेरिका में 50,000 भारतीय
“हाउडी मोदी कंपेन” का हिस्सा बनते नज़र आए
और जोश, ज़ज्बे और विदेशी धरती पर 
ताल ठोकते दीख रहे थे,

वहीँ दूसरी तरफ़ भारत में,
हरियाणा भी अपनी एक अलग खूबसूरती के साथ
लाइमलाइट में बना रहा.
“हाउडी मोदी कंपेन” को हरियाणा के
“क्लर्क बनेंगे कंपेन” ने कड़ी टक्कर दी.

50,000 के मुकाबले 15 लाख लोग,
हरियाणा में एक जिले से दूसरे जिलों की तरफ़
पूरे जोश और ज़ज्बे के साथ दौड़ते दिखे.
क्या छोटा, क्या बड़ा, क्या बैचलर और क्या शादीशुदा,
सभी के सभी पूरी तैयारी से अपने एग्जाम सेंटर की
तरफ़ कूच करते नज़र आ रहे थे.

इसरो का “चंद्रयान कंपेन” भी हरियाणा 
को हैरानी भरी निगाहों से ओब्सर्व कर रहा होगा.
विक्रम लैंडर ने तो इतनी सारी भीड़ एक साथ, 
किसी राज्य की धरती पर शायद ही देखी हो.

जो भी हो.
इतना बड़ा इवेंट मैनेज करना कतई आसान 
नहीं रहा होगा.
और दिक्कतें आई भी.
जिन्हें खोना पड़ा,
उनके लिए असीम दुःख और तकलीफें भी लाई.

पर कुल मिलकर ये तीन दिवसीय इवेंट सबके लिए,
सवालों और जवाबों का अनूठा सिलसिला 
बन कर उभरा.

कम्पटीशन हमेशा टफ ही होता है.
चाहे विदेश में हो या अपने देश में.

हर कोई अपना डंका बजवाना चाहता है.
रास्ते और प्लानिंग अलग-अलग हो सकती हैं.

किसी भी लोकतंत्र में पावरफुल होने का मतलब है
संतुलन की कोशिश.
क्योंकि ये लोगों से बना, लोगों के लिए 
एक प्लेटफ़ॉर्म है.

कई दफ़ा,
सिर्फ़ परंपरागत चलते रहने से भी चीजें 
नहीं बदल पाती.

अगर एडवांस में ही
कुछ ऐसे अरेंजमेंट करने पर ध्यान दिया जाए किए
कि भीड़ बनने से पहले ही लोगों के 
लिए मूलभूत सुरक्षित
सुविधाएं और मापदंड डेवेलप कर लिए जायें
तो फ़िर उथल-पुथल की स्थिति से
किसी भी तरह की परेशानी से शायद ही 
रूबरू होने ही नौबत आए.

और तब हर कंपेन,
सक्सेसफुल और किफ़ायती होगा.
                                                                           
इमेज सोर्स: गूगल








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