Oct 22, 2019

अपने बर्थडे पर बुलाना मत भूलना.




अगर तुम कोई भी तुलना ना करो.
किसी से, किसी की भी, 
किसी भी तरह की तुलना.
अगर ये बात अपने दिमाग में 
दही की तरह जमा सको.
और इसे अपने आसपास के लोगों के बीच 
रहते हुए
प्रैक्टिकल करते हुए
विचारों को आते और जाते हुए देख सको
और थोड़ा सा डिस्टेंस, सभी प्रकार के 
तर्कों से बना पाओ,
तो फ़िर तुम्हारे लिए कोई फेलियर नहीं रहेगा.
फ़िर तुम्हारे लिए कोई सक्सेस भी नहीं रहेगी.
केवल तुम रह सकोगे.
आराम से
जीवित से
रियल और सफाईदार.

ये ठीक वैसा ही प्रोसेस है,
जैसे घर के बर्तन साफ़ करना या कपड़े धोना.

तुम बस ख़ुद को धो सको
ताकि ख़ुद की सफ़ाई हो जाए.
बस इतनी सफ़ाई कि
जब भी तुम्हारी कोई ज़रूरत किसी को आन पड़े
तो तुम बिना मैले हुए उसके काम आ सको.
बिना किसी ओपिनियन का सहारा 
लेकर ख़ुद खड़े हो सको.
तुम्हें कोई परवाह ही ना करनी पड़े
और दूसरे तुम्हें देखकर ख़ुद भी 
चमकने की चाहत रह सकें,
इतना ही जिंदगी तुमसे उम्मीद करती है.

और जैसे ही तुम ये समझने का रिस्क 
उठा लेते हो तो
अस्तित्व ख़ुद तुम्हारे पैरों को छू कर 
नमस्कार करता है.

बस, जिस दिन तुम्हारे अंतर्मन के 
दाग, धुलकर साफ़ होंगे.
तुम तुलना के कष्ट से मुक्ति पाओगे
और फ़िर कोई पराया ना होगा.
सब तुम्हारा होगा.

तुम उसी दिन अपना बर्थडे मनाना.
बाकी दिन तो बीतने के दिन हैं.
वो ही दिन होगा,
जब तुम नहीं बितोगे.
उस दिन से रगड़ाई शुरू होगी
और तुम निखरने लगोगे.
तुम्हारे भीतर कुछ नया होगा.
जिंदगी अंगड़ाई लेगी
और उसे किसी भी बाहरी अप्रूवल की 
तुलना से आज़ादी मिलेगी.

अगर तुम बस इतना सा चाह सको
तो असल खज़ाने के दरवाजे, 
तुम्हारे लिए खुल गए समझो.

अपने बर्थडे पर बुलाना मत भूलना.

                                                                       image source: google 

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