Nov 28, 2019

और फिर, वो दोनों शहर लौट गए.





एक शहर में एक बड़ा फेमस प्राइवेट स्कूल था.
वहां के हर टीचर को अपने एक बेस्ट स्टूडेंट को
किसी गांव में ले जाना होता था 
ताकि
वो किसी ओर की दुनिया को भी अच्छे से जान सके
और
लाइफ़ के बेस्ट एक्सपीरियंस को फ़ील कर सके.

एक बार उस स्कूल का एक स्टूडेंट आर्यन,
जो कि एक अमीर परिवार से था,
अपने टीचर के साथ गांव के खेतों के पास से गुजरा.
रास्ते में, एक जगह पर, उन्होंने देखा कि
पुराने फटे हुए एक जोड़ी जूते पड़े हैं.
वास्तव में, वो जूते खेत में काम कर रहे 
एक गरीब मजदूर के थे.
मजदूर दिन-भर काम करने के बाद,
अपने घर की ओर निकलने ही वाला था.

अचानक आर्यन को एक मज़ाक सूझा.
उसने अपने टीचर से पूछा – सर,
क्यों ना हम फटे हुए,
इस एक जोड़ी जूते को कहीं झाड़ियो में 
छुपा कर रख दें,
जब वो मजदूर अपने जूते तलाशता हुआ यहाँ आएगा
और जूतों को यहाँ ना पाकर परेशान होगा तो
कितना मज़ा आएगा?
इट वील मेक अस लाफ.

उसकी ये बात सुनकर टीचर सीरियस 
हो उठा और बोला –
किसी गरीब के साथ ऐसा मज़ाक करना
बिलकुल भी ठीक नहीं है.

मगर हाँ, अगर तुम उस मजदूर का
रिएक्शन ही देखना चाहते हो,
तो बजाय जूते छुपाने के कुछ अलग भी कर सकते हो.

आर्यन ने पूछा – वो क्या ?
टीचर ने अपने छोटे बैग में से,
जमा किए हुए 10 – 10 रूपए के कुछ सिक्के निकाले
और आर्यन से कहा कि दोनों जूतों में थोड़े - थोड़े
सिक्के छुपा आओ.
फ़िर हम देखेंगे कि मजदूर को कैसा फील होता है?

आर्यन ने ऐसा ही किया.
सिक्के छुपाने के बाद वो दोनों झाड़ियों के
पीछे छिप कर बैठ गए.

जैसे ही मजदूर घर जाने के लिए जूते पहनने लगा,
उसने पाया कि कोई कठोर चीज़ 
उसके पैरों में दब रही है.
उसने फ़ौरन जूते में से पैर बाहर निकाला और
जूते को उल्टा कर दिया.
सिक्के जमीन पर गिर गए.
उसने उन्हें देखा, उठाया और आस - पास देखा.
वहां उसे कोई नहीं दिखाई दिया.
फ़िर दूसरे जूते में से भी उसे सिक्के मिले.
वो हैरान रह गया.

उसने आसमान की ओर देखा और बोला – हे ईश्वर,
तू महान है.
तू जानता था कि घर में बीमार माँ की दवाई
के पैसे भी नहीं हैं,
और आटा ना होने से बच्चे भी भूखे बैठे होंगे.
तूने मां की दवाई और बच्चों की भूख 
के इंतजाम के लिए पैसे भेज दिए.
तेरा लाख-लाख शुक्रिया. तुझे प्रणाम है दाता.

उस गरीब मजदूर की बातें सुनकर आर्यन 
की आँखे भर आई.
उसने ऐसा, अपने जीवन पहली बार देखा था.

अब टीचर ने उससे पूछा – क्या तुम्हारी मज़ाक
वाली बात के बजाय,
जूते में सिक्के डाल कर तुम्हें कम ख़ुशी मिली?

आर्यन ने कहा – सर,
आज आपने इन सिक्कों के बहाने, 
मुझे जो पाठ पढ़ाया है,
वो मैं जिंदगी भर नहीं भूलूंगा.
मैं जान गया हूँ कि कुछ लेने की बजाय,
कुछ देने का सुख अधिक है
और देने में ज्यादा ख़ुशी मिलती है.
थैंक यू टीचर.

और फिर वो दोनों शहर लौट गए.
वो मजदूर भी अपने घर की तरफ निकल गया.
उसके जूते अब भी मुस्कुरा रहे थे.
और आर्यन का मन भी.
उसके अंदर की अमीरी अब चमक रही थी.





कहानी और नाम काल्पनिक है. भाव गहरा है.
इमेज सोर्स: गूगल

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