Dec 6, 2019

ये मेंटल फाइटिंग का दौर है.





लाइफ के अधिकतर समय आदमी,
अनुभव की तसल्ली करने में बिजी होता है.
जब बाहर होता है तो 
अनगिनत एक्टिविटी देखता है.
जब अंदर होता है तो उन घटनाओं 
को रीसायकल करता चलता है.
उसी हिसाब से कर्म का ग्राफ 
ऊपर – नीचे होता रहता है.
और वैसे ही सोच का दायरा बुनता जाता है.

जब सभी दिशाओं से मन को 
खट्टा करने वाली खबरें,
तेजी से सुनाई देती हैं
तो दिक्कत बढ़ने लगती है.
जैसे ठंड बढ़ने पर अस्थमा का संकट, 
ठीक वैसे ही.
मानो सबकुछ ख़त्म ही होने वाला हो.

ये समय है भीतर से स्ट्रोंग हो जाने का.
मुश्किलों के चक्रव्यूह में उलझते हुए भी
अपने मन के कवच को मजबूत बनाने का.

पुराने समय के योद्धा लड़ते हुए अपने 
शरीर पर सुरक्षा कवच पहनते थे
चोट तो लगती ही थी, 
मगर बचाव का उपाय भी बना रह जाता था.

आज दूसरे तरीके के युद्ध हैं.
अलग तरीके की लड़ाई है और
अलग तरीके के दुश्मन हैं.
ये मेंटल फाइटिंग का दौर है.

और इसीलिए
आपका मेंटली स्ट्रोंग होना
और बाहर की हर उथल-पुथल का 
सामना करने की
पॉवर जुटाए रखना,
ये सबसे बड़ा दांव है, 
जो आप लगा सकते हैं,
बशर्ते आपने अपने मन की लेयर्स पर 
थोड़ा-बहुत काम किया हो.
वर्ना जीवन हमेशा आशंकाओं का 
ढेर बना ही रहेगा.
जीने के लिए बहुत कम समय मिलेगा.

सबकुछ बड़ी तेजी से बदल रहा है.
किसी की छोटी नाव या कोई बड़ा जहाज,
किसी ना किसी तूफ़ान के थपेड़े झेल ही रहे हैं.

लेकिन फिर भी पार तो लगना ही है.
आपका सफ़र दूसरों को देख के 
पूरा नहीं होने वाला.

सब कहीं ना कहीं उलझन के स्वेटर 
को पहने खड़े हैं.
बस स्वेटर को कैसे धोना है, 
सुखाना है और प्रेस करके रखना है,
ये सीखने का क्लू है.

भीतर की प्रसन्नता,
उदार मन और गहरे प्रेम के बिना,  
स्ट्रोंग कवच नहीं बन पाएगी.
ये गरीब ही रह जायेगी.

तो इससे पहले कि
जीवन की मंदी आपको डसने लगे,
अपने मन की मजबूत लाठी से
इसका सर फोड़ डालिए.

फिर आपके अनुभव ही आपके
गाइडिंग फ़ोर्स बन के उभर आयेंगे.
और
आपकी लाइफ रेसिपी
लज़ीज़ और अनोखी होगी.

क्या ये किसी वरदान से कम है?


इमेज सोर्स: गूगल











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