Dec 13, 2019

एक किलो प्याज की कीमत तुम क्या जानो रमेश बाबू?





आजकल नागरिकता से ज्यादा प्याज के चर्चे हैं.
इस संस्कृति में प्याज, 
रसोई के सबसे 
महत्वपूर्ण कंटेंट में से एक है.

इतिहास गवाह है कि सिर्फ़ इंसानों ने ही 
किसी के दिल नहीं तोड़े.
कभी-कभी कुछ सब्जियां या फ्रूट्स भी 
इंसानों की तरह हो जाती हैं.

और इन दिनों
एक किलो प्याज की कीमत तुम क्या 
जानो रमेश बाबू?

एक्चुअली सिस्टम के कॉप्लेक्स होने का 
झंझट कभी कभी किसी
प्रोडक्ट की इमेज, बेवजह ही ख़राब कर देता है.

अब देखिए ना,
प्याज बेचारी का इसमें क्या दोष?
अपने इस्तेमाल के लिए,
अपने खाने को लज़ीज़ बनाने के लिए,
तड़का लगाने के लिए,
उसे धरती पर उगाते, हम हैं.
उसे बेचते, हम हैं और 
खरीदते भी, हम ही हैं.
किसी और ग्रह से कोई एलियन 
इसे लेने नहीं आता.
फ़िर अपने लालच और प्रॉफिट के लिए 
उसे छुपाते फिरते हैं.
दूसरों की आंखों में धूल झोंकने को रेडी रहते हैं.

जब लोगों की पहुँच से वो दूर होने लगती है
तो रोना शुरू कर देते हैं कि
इस प्याज के नखरे तो देखो,
कल तक इसे कोई नहीं पूछता था 
और आज
ये ज्यादा ही महंगी हो रही है.

प्याज ने कौन सा बिज़नेस करना है?
सब आदमी ही करता है.
उसे थोड़ा मज़े लेने की आदत है
तो इस बार प्याज को हथियार बना लिया है.
अगली बार किसी दूसरी चीज़ से 
उथल-पुथल मचा देंगे.

हर सदी में,
इस ग्रह के लोग अलग-अलग कहानियाँ बुनते हैं
और अपनी समस्याओं का स्वेटर 
बड़ा करते चलते हैं.
हकीकत में सब इच्छाओं का खेल है.

अगर हर आदमी दूसरे के लिए,
केवल 2% भी अच्छा सोचना 
शुरू कर दे तो
ये जीवन और इससे जुड़े मुद्दे 
एक वरदान बन सकते हैं.
फ़िर पूरी पृथ्वी हल्की और मुस्कुराती मिलेगी.

फ़िलहाल प्याज ने कम से कम, 
बाक़ी चीज़ों को सस्ता बना रखा है
तो ये भी कम खूबसूरत नहीं है.

फ़िर भी आप, गुनगुना सकते हैं कि
प्याज हमें किस मोड़ पे ले आया......



केवल एक हास्य रचना

इमेज सोर्स: गूगल






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