Dec 18, 2019

ठंड के मौसम में, आपका माइंड, आपसे क्या कहता है?





इन दिनों ठंड का जलवा है.
पिछले एक सप्ताह से तो उसने 
तूफ़ान मचाया हुआ है.
तूफ़ानी ठंडा.

ठंड इन दिनों अपने दोस्तों को 
इनवाइट करती है
और
कहती है कि आज कुछ तूफ़ानी करते हैं.
और वो ऐसा करती है.

भारत में हर मौसम, एक अलग 
वाइब्रेशन के साथ डांस कराता है.
गर्मियों में सूरज, गुस्से से लाल नज़र आता है
तो वहीँ ठंड में, किसी छोटे बच्चे के लाल टमाटर जैसे गालों की
तरह, गरिमामय उपस्थिति दर्ज़ कराता है.

हालांकि सूरज, पूरे साल एक ही 
स्वभाव में ही रहता है,
किसी से कुछ कहता नहीं, 
किसी का कुछ छीनता नहीं,
वो सबको इक्वल एनर्जी और 
गर्माहट से नवाजता है.
हां, ठंड में उसके लिए सम्मान की 
भावना थोड़ी और गहरी हो जाती है.

शुक्र है कि भारत की नेचर परिवर्तनशील है,
वर्ना अगर एक जैसा ही मौसम, पूरे साल बना रहे
तो ये निहायत ही बोरिंग और मायूस 
कर देने वाला अनुभव हो सकता था.

ठंड के और भी कई ज्यादा फ़ायदे हैं.
अगर, आप कभी गौर करें तो देखेंगे कि
ठंड के मौसम में आपका माइंड, 
किसी और मौसम के मुकाबले 
ज्यादा शांत होने लगता है.
विचारों और इमोशन की मात्रा भी 
बहुत कम हो जाती है.
खून कम उबाल मारता है.

सामाजिक नाटक करते रहने से 
थोड़ी आज़ादी महसूस की जा सकती है.
हर तरह के रिलेशन में प्यार की खुश्बू 
ज्यादा बनी रहती है,
क्योंकि ठंड की वजह से बातें करना 
कम हो जाता है
और झिक-झिक करने की वजहें 
अपने आप नीचे बैठने लगती हैं.
करियर या फ्यूचर का डर भी 
किसी आम मौसम के मुकाबले बहुत 
कम हो जाता है.
हीटर जला के या चूल्हा जला के गर्माहट लेना अधिक इम्पोर्टेन्ट नज़र आता है.

बेवजह के टोटके या ड्रामें ठंड में जलकर 
राख हो जाते हैं,
क्योंकि ठंड सबको एक जैसी ही लगती है.

हां, ठंड अगर थोड़ी पक्षपाती होती तो
कोई ना कोई उस पर भी केस ठोक सकता था,
लेकिन प्रकृति और अस्तित्व हमसे 
बहुत ज्यादा जागरूक और समझदार हैं.

कुछ महान चीज़ें
जैसे कि सही वातावरण बनाना,
जीव को कहाँ और किस तरीके से पैदा करना,
उसको एक अद्भुत तरीके से मुक्ति देना,
साथ ही साथ बॉडी सेल्स में आनंद की 
एनर्जी देना – ये कुछ ऐसी नियामतें हैं
जो बाय डिफ़ॉल्ट हर जीव को फ्री दी जाती हैं.
वो बात अलग है कि हर कोई अपनी 
समझदारी लगा-लगा कर अपनी
साइकोलॉजिकल मुसीबतें बढ़ाता रहे,
इसका कहीं कोई इलाज़ नहीं है.

ठंड का शरीर पर पड़ रहा प्रभाव,
ये बताने के लिए काफ़ी है
कि कौन कितना बड़ा है.

फ़िर भी, चिम्पांजी के बाद आने वाली 
कुछ नस्लें
ये साबित करने में जुटी रहती हैं
कि हमसें बेहतर कोई नहीं.

यहीं ठंड एक दिन, उन्हें जमा देती है.


इमेज सोर्स: गूगल




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