Dec 6, 2019

आप एक सुपर नेचुरल इनफिनिट कैलकुलेटिंग डिवाइस हैं.





कई दूसरे सुपर कंप्यूटर और रोबोटिक्स
मैकेनिज्म की तरह ही
आपका मन भी एक कमाल का कंप्यूटर है.
इसे आप सुपर नेचुरल इनफिनिट कैलकुलेटिंग
डिवाइस कह कर भी पुकार सकते हैं.
इसका डेटाबेस और मेमोरी मैनेजमेंट 
भी शानदार है.

इसे कितना भी पुराना समय याद रह जाता है.
ये हर वो काम जो आप करते हैं,
उसे मेमोरी बना डालता है.
ये आपको पल-पल की याद ताज़ा रखने
में हेल्प भी करता है
तो कहीं कहीं थोड़ा चतुर होने के कारण
आपको मुश्किलों में भी डाल सकता है.

इसे आजादी बहुत पसंद है 
और इसी चक्कर में
ये दूसरों को गुलाम बनाने के दंगल में
भी आपको उलझा देता है.

आप देख सकते हैं कि कभी-कभी
बड़े - बड़े लोग जल्दी गुस्से में आ जाते हैं,
क्योंकि उन्हें लगता है कि वो नीचे
वालों को इतना दे रहे हैं
लेकिन वो उसके मुताबिक रिजल्ट नहीं देते.
ये उनके मन का नाटक है,
जो उनके कान में आकर उन्हें
मिसगाइड कर जाता है कि
तुम देने वाले, बड़े आदमी.
जबकि वो ले-ले कर ही बड़े हुए होते हैं.
बस उनका मन थैंक्यू शब्द को
बकवास मानने लगता है.
वे वहीँ से छोटे होना शुरू हो जाते हैं.

एक और भी केटेगरी है.
आपने सुना ही होगा कि कुछ लोग कहते हैं
कि हम तो अपने दिल की सुनते हैं.
उनको दिल को बीच में लाने से बचना चाहिए
क्योंकि दिल सिर्फ़ धड़कने की मशीन है.
जिसकी आप सुनते हैं वो है मन या माइंड.
दिल बस धक्-धक् करता है.
आप इसे अच्छे से जानते हैं.
मन या माइंड जब थोड़ी चालाकी खेलना चाहता
तो दिल को आगे कर देता है.
पर सारा ड्रामा उसका ही रचा होता है.

कुल-मिलाकर आपका अपना शरीर ही दुनिया
की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग मशीन है,
जिसे आप चाहकर भी पूरी तरह नहीं जान सकते.
अगर जान सकते तो किसी की
जान शायद ही कभी जाती,
लेकिन ये चली जाती है.

जीते-जी, मन आपसे कितने नाटक 
करवाता रहता है
और आप करते हैं.
जिस दिन से आप इसे अपने तरीके से
मैनेज करना सीख लें
तो ये आपको अस्तित्व की सभी तहें
छूने में मदद करने लगता है
और तब से आप समझ पाते हैं कि
इस ग्रह पर आए सभी लोग एक ही
तरीके से पैदा होते हैं
और एक ही तरीके से टाटा कह जाते हैं.
तब मन की दुविधाएं कम होने लगती हैं
और जीवन किसी शानदार संभावना 
से टकरा सकता है,
वरना मन एक कचरे के ढेर की तरह
चौबीसों घंटे सड़ांध मारता है
और आदमी ख़ुद से मिले बगैर,
अपनी इंजीनियरिंग करे बिना ही
हार्डवेयर के दूसरे स्पेयर-पार्ट्स पर अपनी
नज़र गड़ाते – गड़ाते ही दम तोड़ जाता है.
उस समय मन का जाल टूट जाता है
और एक शानदार टेक्नोलॉजी जो
जीवन को कहीं से कहीं ले जा सकती थी,
वो भटकने पर मजबूर हो जाती है.

मन को अच्छा खाना खिलाकर आप
इसे किसी अच्छे रास्ते की तरफ़
जरुर मोड़ सकते हैं.
बस एक आदमी को सिर्फ़ इतना ही
करने की जरुरत है.

पर हम हमेशा ही कुछ चाहते हैं,
एक्स्ट्रा, थोड़ा और एक्स्ट्रा
और
वहीँ ये मशीन अपना डेटाबेस जला डालती है.

अपनी मशीन का फ्रिक्शन कम करके देखिए,
ये भी अच्छा रिजल्ट देना चाहती है.


इमेज सोर्स: गूगल






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