Jan 19, 2019

दुःख होगा भी तो खुशबू की तरह बहेगा





उसे पत्थरों में ढूंढने की जरुरत कहाँ
सभी दिशाओं के ज्ञान की जरुरत कहाँ
तुम्हारा घर
तुम्हारा परिवार
तुम्हें प्यार करने वाले आत्मीय लोग
जिस दिन भीतर से तुम उन्हें
अपना ब्रह्मांड अपना संसार मान लोगे
उसी पल कुछ नया घटित हो उठेगा
शांति प्रवेश कर जाएगी
ना कोई शंका बचेगी
ना संदेह
ना कोई ग़लतफहमी और
ना ही कोई उदासी
हर रिश्ता स्वाभाविक और विश्वसनीय
दुःख होगा भी तो खुशबू की तरह बहेगा
सुख होगा भी तो बढ़कर चौगुना
फ़िर कहीं और मत्था टेक
झूठी आस कमज़ोर तलाश से मुक्ति मिलेगी
तुम असली कोहिनूर को भीतर ही पा लोगे
बस तुम पहले देने वाले बनना
तुमसे लेने वाले तुम्हें
आज नहीं तो कल
समझ ही लेंगे
फ़िर घर बैठे तुम कर सकोगे
अपना राजतिलक

19 जनवरी 2019
7.49 AM

Jan 16, 2019

बस तुम्हारा तारकोल जमना नहीं चाहिए.






हम सभी एक उबड़-खाबड़ सड़क पर पैदा होते हैं

ख़ुशी और सफ़लता के लिए तलाशते रहते हैं कोई साफ़ सड़क

खुशी के लिए जीने से बहुत कुछ तो नहीं आता

लेकिन

असंख्य कमजोर इच्छाओं की तुलना में एक छोटी ख़ुशी दुनिया बदल देती है

अस्थायी हार विफलता की गारंटी नहीं है

एक तुच्छ जीत स्थायी सफलता का ट्रेडमार्क नहीं है

हारने या जीतने का सवाल आपके लिए बहुत छोटा है

किसी को नोचे बगैर और नीचे गिराए बगैर

गिर-पड़ के भी तुमने ख़ुद को हल्का सा जान लेने का जोख़िम लिया है

तो ये एक बड़ी सफ़लता है

तुम्हारी सड़क लंबी ना भी हो तो क्या हुआ  

लेकिन

इसे साफ़-सुथरी तुम कभी भी बना सकते हो

बस तुम्हारा तारकोल जमना नहीं चाहिए.

17 January 2019
8.15 AM

Jan 15, 2019

सब उथल-पुथल इंसान ही तो करते हैं जिंदगी में.





समय समय पर

सब उथल-पुथल इंसान ही तो करते हैं जिंदगी में

आपको पैदा करने से लेकर अर्थी उठाने तक

आपको पढ़ाने से लेकर आपको आगे बढ़ाने तक

आपको प्यार देने से लेकर आपको धोखा देने तक

आपका विश्वास बढ़ाने से लेकर आपका विश्वास तोड़ने तक

आपको भयमुक्त करने से लेकर भयभीत करने तक

आपको बेचना सिखाने से लेकर खरीदने तक

आपको छोटा बनाने से लेकर बड़ा बनाने तक

आपको सिर पे बिठाने से लेकर गिरा देने तक

आपको राजा से लेकर रंक बनाने तक

एंड वाईस-वर्सा

चक्र चलता रहता है

आप घूमते रहते हैं

फ़िर एक दिन थम जाते हैं और स्वाहा

हस्ती अलविदा बस्ती अलविदा

कमाल देखिए

मिटटी वहीँ है

पानी वही है

आकाश चाँद सितारे सूरज सब वहीँ

पेड़–पौधे गिलहरी तक वहीँ हैं

बस आप नहीं हैं बाकि सब वैसे के वैसे

फ़िर इतराना कैसा, किस पर और कब तलक


आखिर आप भी एक इंसान हैं 


और 


सब उथल-पुथल इंसान ही तो करते हैं जिंदगी में

कुछ तो नया कीजिये बीत जाने से पहले.

15 जनवरी 2019
10.36 PM

Jan 14, 2019

अगर वो सब ना हों तो जीने का मज़ा ही क्या है






जब भी आपका माइंड आपसे जरुरत से ज्यादा नोंक–झोंक करने लगे या ऐसा लगे कि कहीं कुछ गलत है जिसे समय रहते ठीक कर लेना चाहिए तो ये कविता आपको वहां ले जा सकती है, जहां समाधान की गुंजाईश है.

आइए, चल कर देखते हैं.

आज की सुबह
किसी से भी मिलने से पहले मैं

परमपिता को थैंक यू कहूँगा कि
उसने मुझे आज का दिन देखने का मौका दिया
लाखों होंगे जो कल रात के बाद उठे ही नहीं होंगे

मैं ख़ुद को थोड़ा मेंटली फ्रेश कर लेना चाहूँगा
ठीक वैसे ही जैसे नहा-धोकर फिजिकली फ्रेश महसूस करता हूँ

आज मैं अपने सभी कामों को एक पेज पर लिख लूँगा
ताकि उन्हें समय रहते पूरा कर सकूँ

आज मैं अपने मन को साफ़ करता चलूँगा
ताकि शाम होने तक भी बेफिक्री बनी रहे

आज मैं अपने साथ-साथ उनको भी वैल्यू दूंगा
जो मेरी जीवन यात्रा में मुझे रोमांचित रखते हैं
अगर वो सब ना हों तो जीने का मज़ा ही क्या है

आज मैं उन सबको धन्यवाद दूंगा जो
मुझ पर तब भी अपना यकीन बनाये रखते हैं
जब कुछ अच्छा नहीं चल रहा होता

आज मैं उन सबको भी थैंक यू कहूँगा जो
मेरी कमियों को लेकर चिंतित हो जाते है
यानि कहीं ना कहीं उन्हें मेरी परवाह तो है

आज मैं अपने काम को बेस्ट तरीके से करना चाहूँगा
बजाय इसके कि दूसरे लोग क्या कर रहे हैं और क्या नहीं

आज मैं अपने माइंड की गंदगी को साफ़ रखूंगा
ताकि वो भी मेरे घर जैसा खुबसूरत लगे
और जो भी मुझसे मिले वो दोबारा भी मुझसे मिलना चाहे

आज मैं अपने से जुड़े लोगों की अच्छाइयों का चिंतन करूँगा
और अपनी बुराइयों को दूर कर लेना चाहूँगा

आज मैं अपने शरीर के अंगों को भी थैंक्स करूँगा
अगर वो मेरी सपोर्ट ना करें तो बाकी सब बकवास ही है

आज मैं बिना स्वार्थ किन्ही 3 लोगों की मदद करना चाहूँगा
जो ख़ुशी मिलेगी वो किसी भी पैकेज से कहीं बड़ी होगी

आज मैं जिनसे भी मिलूँगा मुस्कराहट से मिलूँगा
कल क्या हुआ था इसे भूलकर

आज मैं अपने ज्ञान में ये भी जोड़ लेना चाहूँगा कि
कल मैं ना भी रहा तो भी दुनिया चलती रहेगी
और क्या गारंटी है कि कल मैं रहूँगा ही?

आज मैं वो ही करूँगा जो एक समझदार को करना चाहिए
आज मैं जी उठूँगा पूरी तरह खुशनुमा अपूर्णता में भी

आज मैं जीवन के हर पल का लुत्फ़ उठाऊंगा
ये दोबारा लौट कर आने वाला नहीं

आज मैं प्रेम की बारिश करूँगा
बिना ये सोचे-समझे कि कोई और क्या करता है

आज मैं फ़िर से जिंदा हो जाऊंगा जो कल तक नहीं था

बस आज
हे ईश्वर बस आज तुम मेरी मदद करना कि
आज को मैं पूरा जी सकूँ जी भर के

कल अपनी चिंता ख़ुद कर लेगा.

15 January 2019
10.02 AM

Jan 13, 2019

हाँ या ना?






आज लोहड़ी का पर्व है। कल मकर सक्रांति और आने वाले दिनों में नए साल के अलग-अलग पर्व आपके जीवन में चार चाँद लगाने वाले हैं.

जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, जिंदगी आपको ज्यादा से ज्यादा खुबसूरत पल दे कर जाना चाहती है ताकि आप इन पर्वों के माध्यम से जीवन के पलों की महत्ता को महसूस करना सीख लें। अपने आने और अपने जाने की वजह को बेमानी ना कहें। 
इसे समझ लें कि क्या ठीक है? क्यों ठीक है? कैसे ठीक है? कहाँ ठीक है? 

ध्यान से देखें तो हर साल एक्चुअली हम बड़े नहीं होते बल्कि छोटे होते जाते है। तो जब छोटा होते – होते गायब हो ही जाना है तो मंजिल और रास्तों के बीच का Joy बना रहे और Confusion दूर हो, ये करते चलना चाहिए।

एक छोटा सा वार्तालाप मिला। आपके सामने है। पता नहीं सही है या गलत लेकिन पढ़ने के बाद कुछ क्लू मिलने तो शुरू हो ही सकते हैं। ये आपके ऊपर है कि आप क्या Catch करेंगे?

जैसे जैसे मेरी Age बढ़ती गयी, मुझे समझ आने लगा कि अगर मैं Rs. 200 की घड़ी पहनूं या Rs. 20000 की, दोनों समय एक जैसा ही बताएंगी। हाँ या ना?

मेरे पास Rs. 200 का बैग हो या Rs. 20000 का, इसके अंदर के सामान में कोई परिवर्तन नहीं होंगा। हाँ या ना?

मैं 200 गज के मकान में रहूं या 2000 गज के मकान में, प्यार, ख़ुशी या तन्हाई का एहसास एक जैसा ही होगा। हाँ या ना?

बाद में मुझे यह भी पता चला कि यदि मैं बिजनेस क्लास में यात्रा करूं या इकोनोमी क्लास में, अपनी मंजिल पर उसी नियत समय पर ही पहुंचूंगा। हाँ या ना?

इसीलिए, अपने बच्चों को बहुत ज्यादा अमीर होने के लिए प्रोत्साहित करने की बजाय उन्हें यह सिखाने पर ज़ोर दीजिये कि वो खुश कैसे रह सकते हैं?
और जब वो बड़े हों, तो चीजों के महत्व को देख पाएं, सिर्फ़ उसकी कीमत को नहीं।

सुना भी गया है कि ब्रांडेड चीजें व्यापारिक दुनिया का सबसे बड़ा नाम होती हैं लेकिन गरीब और मध्यम वर्ग लोग इससे बहुत जल्दी, बहुत ज्यादा प्रभावित होते नज़र आते हैं।

ब्रांड होना अपनी जगह सही हो सकता है पर
क्या यह सबसे ज़रूरी है कि आप I Phone लेकर चलें और घूमे –फिरें तभी लोग आपको बुद्धिमान और समझदार मान पाएंगे? हाँ या ना?

क्या यह सबसे ज़रूरी है कि आप Mac’D या KFC में जाकर खाएं तभी लोग यह समझेंगे कि आप कंजूस नहीं हैं? हाँ या ना?

क्या यह सबसे ज़रूरी है कि आप रोज अपने Friends के साथ किसी फेमस Cafe पर जाकर बैठे, तभी लोग यह जान सकेंगे कि आप एक रईस परिवार से हैं? हाँ या ना?

क्या यह सबसे ज़रूरी है कि आप Gucci, Lacoste, Adidas या Nike ही पहनेंगे तभी High Status वाले कहलाये जायेंगे? हाँ या ना?

क्या यह सबसे ज़रूरी है कि आप अपनी हर बात में 2-4 अंग्रेजी शब्द शामिल करें, तभी सभ्य समझे जायेंगे? हाँ या ना?

क्या यह सबसे ज़रूरी है कि आप Adele या Rihanna को सुनेंगे तभी साबित होगा कि आप विकसित हो चुके हैं? हाँ या ना?

किसी ने ये भी कहा है कि
मेरे कपड़े तो आम दुकानों से खरीदे हुए होते हैं।
Friends के साथ किसी ढ़ाबे पर भी बैठ जाता हूँ।
भूख लगे तो किसी ठेले से ले कर खाने में भी कोई अपमान नहीं समझता। कोई भी ब्रांड भूख से बड़ा नहीं लगता।
अपनी सीधी सादी भाषा मे बोलता हूँ।

चाहूँ तो वह सब कर सकता हूँ जो ऊपर लिखा है लेकिन
मैंने ऐसे लोग भी देखे हैं जो एक Branded जूतों की जोड़ी की कीमत में पूरे सप्ताह भर का राशन ले सकते हैं। हाँ या ना?

मैंने ऐसे परिवार भी देखे हैं जो मेरे एक Mac'D के बर्गर की कीमत में सारे घर का खाना बना सकते हैं। हाँ या ना?

बस मैंने यहाँ यह रहस्य पाया है कि बहुत सारा पैसा ही सब कुछ नहीं है। किसी की बाहरी हालत से उसकी कीमत लगाना हास्यास्पद सा लगता है।

इंसान होने के असली ब्रांड है उसकी नैतिकता, व्यवहार, मेलजोल का तरीका, सहानुभूति और भाईचारा है, ना कि उसकी मौजूदा शक्ल, सूरत और हालात।

आप भी अपनी कीमत पहचानिए। कौन रोक रहा है? आप किसी बाहरी ब्रांड से जाने जाते हैं या अंदर से ख़ुद एक ब्रांड हैं? 

सार ये है कि आपकी सोच में ताकत और चमक होनी चाहिए। छोटा-बड़ा होने से फर्क नहीं पड़ता, सोच बड़ी होनी चाहिए। मन के भीतर दीप जलाते रहिए और सदा मुस्कुराते रहिए।

इस "सबसे ज़रूरी" शब्द को पकड़ लीजिए और फ़िर रेवड़ी मूंगफली खाते हुए लाइफ़ से कहिये- हैप्पी लोहड़ी