Mar 31, 2019

तुमसे जीवन के होने का जिक्र है





तुम्हारे हिसाब का कुछ हो जाये तो सुख
उसके हिसाब का कुछ हो जाये तो दुःख
दोनों के हिसाब का कुछ हो जाये
तो
एडजस्टमेंट
यानि
समझौता


और
गर तुम
अचानक कभी
चलते-फिरते
जीते-जागते
सुख-दुःख और समझौते
इन तीनों ही बिन्दुओं पर
सहमति उठाने का जोख़िम ले सको
तो ये निश्चय ही
सहनशक्ति का संगम बनेगा

और  
तुम माप-तौल वाली
पक्षपाती इंसानी फिलोसोफीस से
मुक्ति पाओगे
जैसे कि
जीत-हार से
मौन-तकरार से
भीतर-बाहर से
आगे-पीछे से
ऊपर-नीचे से
जात-पात से
धर्म-कर्म से
जीवन-मरण से
और
अच्छे–बुरे से


अब आगे का रास्ता
वरदान है
अब ये
तुम्हारे होने-ना होने का नहीं
बल्कि
तुमसे जीवन के होने का जिक्र है

अब तुम्हें नहीं
बल्कि
अस्तित्व को तुम्हारी कहीं ज्यादा फ़िक्र है.

31 March 2019
Sunday, 02.27 PM
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Mar 26, 2019

तुमने मुझे मेरे भीतर उतारा है.





आज
भले ही मेरी
या
किसी और की
तार्किक बुद्धि
और तर्क से भरी मन की परतें
अजीब सा महसूस करें
कि  
बदलाव हो रहा है
लेकिन चाहे जो हो
मुझे ये अच्छा लगने लगा है

अब मैं देख पाता हूँ वो कुछ-कुछ
जो
मेरे अंदर के जीवन को सहज रखने में मदद करता है

अब पहले जैसा डर नहीं लगता
कि
अगर कुछ मेरे हिसाब से नहीं हुआ
तो क्या होगा

इससे अब मुक्ति है कि कब क्या होगा
यहाँ कभी भी कुछ भी हो सकता है
ये ही यहाँ की सुंदरता है
और ये हमेशा ही ऐसी रहेगी

जीवन के दरवाजे अब खुलने लगे हैं
अब बच्चों सा खिलखिलाने का समय है
महसूस करने का समय है
अद्भुत अनुभव लेने और हैरान होते रहने का समय है

ये जीवन को वैसे ही देखने का जिक्र है
जैसा ये होता है
इसमें “मेरा जीवन या तेरा जीवन” जैसा कुछ भी नहीं है
केवल जीवन है
अंदर से पनपता जीवन और उसकी खूबसूरती

ये किसी भी पैकेज को पा जाने
या
मनचाहा पद प्राप्त कर लेने
और  
किसी भी इच्छा-पूर्ति से भी
अधिक
मूल्यवान रूप से सुंदर है

और 
मुझे इसके लिए हमेशा
तुम्हारा आभारी होना ही चाहिए

तुमने मुझे मेरे भीतर उतारा है
और 
मैं समझने की फ़िराक में हूँ
कि क्या 
ये इतना आसान था भी कभी.

26 March 2019
03.37 PM
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Mar 19, 2019

ये उनके दूरदर्शी होने की इंतिहा थी.





ये एक जादू-भरी झप्पी पाने जैसा है.
वो हमेशा मेरे लिए रहीं
आज भी उतनी ही हैं
न कम और न ज्यादा
बस कम्पलीट
जितनी होती है एक माँ.


उनसे बातें करना मुझे खुश रखता था
उनकी बचपन की बातें
स्कूल - कॉलेज के दिन
उनकी शादी के किस्से और
फिर हमारा जन्म
सब कुछ सुनना कितना आत्मीय था
जैसे अभी अभी सब घटा हो
हमारे सामने.



वो मुझे उस कठिन समय के बारे में बताती थी जो वो पीछे छोड़कर आई.


वो पुराने समय की एक महान ग्रेजुएट थी
जिसने परिवार की मान्यताओं के सम्मान में अपनी आत्मा को स्वाहा किया
और
हमें बिना खिड़की, दरवाजों के घर में भी राजकुमारों की तरह पाला.


अपने समय की एक शानदार और जानदार महिला
सुंदर आँखें, सुंदर चेहरा, 
लिखना, गाना 
और भीतर से ताकतवर.


उन्हें रिश्तों में सीधे चलना पसंद था
पर रिश्तें हमेशा ही जलेबियों से घुमावदार पाए गए हैं  
और 
ये समझना उनके लिए कतई आसान नहीं रहा.


वो अपने रिश्तों की देखभाल करने में गर्व महसूस करती थी
और उनसे उतनी न्यूनतम उम्मीद भी रखती थी
जितनी इंसान होने के नाते रख लेने में कोई बुराई नहीं है.


उन्हें जो कुछ भी मिला
अच्छा या बुरा
उन्होंने हमसे केवल अच्छा ही साँझा किया  
शायद इसीलिए कि हम बड़े होकर किसी को कुछ दें तो केवल अच्छा दें
वरना चुप रहें
ये उनके दूरदर्शी होने की इंतिहा थी.


मैं उनके क़र्ज़ तले भी जिंदा महसूस करता हूँ
क्योंकि 
उन्होंने हमें सरल इंसान बनाने के लिए एक कठिन जिंदगी जी.


मुझे उनका अंश होने पर फक्र है
और मैं अपनी अंतिम सांस तक
उनका कर्ज़दार रहना पसंद करूँगा.


20 March 2019
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Mar 10, 2019

बस तुम इतना कर देना




हे परमेश्वर
बस तुम इतना कर देना
कि
जब कभी तुम्हारे स्वर्ग में खिलें
गुलाब
तो
एक गुच्छा बनाना
मेरी माँ को देना
और
ये कहना
कि
ये मेरी तरफ़ से है

उन्हें बताना
मैं उन्हें प्यार करता हूँ
याद करता हूँ
हर दिन हर पल

उनसे कहना
कि मुझे उन जैसा
दूसरा कोई नहीं मिला

माँ को याद करते हुए
आज
मेरे भीतर एक दर्द है

और
वह तब तक नहीं जाएगा
जब तक मैं माँ को
स्वर्ग में
मुस्कुराने की वजह ना दे दूँ





11 March 2019
7.59 AM
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