Apr 6, 2019

भिंडी की सब्जी खिलाने की क्या जरुरत थी.





“गर तुम नाराज थे तो बोल देते
भिंडी की सब्जी खिलाने की क्या जरुरत थी”

कभी- कभी कुछ ऐसे पल आते हैं
जब मैं पाता हूँ  
कि
वो नहीं देख पाया
जिसे महसूस कर लेना चाहिए था
और जो भी होता है
अक्सर हमेशा मुझसे बड़ा ही कुछ हो जाता है
और
फ़िर
आसमां की और देखते हुए
हँस पड़ता हूँ खुद पर
क्योंकि उस पल में मुझे
ख़ुद को बेवकूफ समझने में
बड़ा मज़ा आता है

और 

फ़िर हर तरफ़ मुस्कान बिखर जाती है
माहौल बदल जाता है
मैं जीरो हो जाता हूँ
और हर कोई मुझसे बड़ा.


ऐसा पहले
दिन में अक्सर होता था
और अब
ये आदत बन गयी है
अच्छा भी लगता है
इस सच को समझ लेना कि
मैं इस अस्तित्व की एक छोटी सी बूंद हूँ.


अब घर और बाहर में फ़र्क नहीं करना पड़ता
सब एक जैसा रहता है
ये शानदार है
एक जैसा एक तरफ़ा हो जाना.


जो भी हो ये असली होने जैसा फ़ील देता है
और दिल बच्चे सा धड़कता लगता है
वैसा ही समां और वैसी ही नीयत
ख़ुद को दूसरों से अलग करना मुश्किल हो जाता है
सब अपने ही लगते हैं
उल्टे सबमें ख़ुद को पाने जैसा लालच पैदा हो उठता है
और दिल कुछ खोना भी नहीं चाहता
कुछ होना भी नहीं चाहता.


और जब सब मुझसे वजूद में,
कद में और अनुभव में बड़े दिखाई देते हैं
तो इस बड़ी सी दुनिया में
हल्का होना आसान हो जाता है
किसी की नाराजगी भी अपनेपन की ताजगी देती है
इस छोटे से साँसों और भावों के सफ़र में
जीने का मज़ा लेना हो तो
एक बार
बस एक बार
बेवकूफ़ और बुद्धू
बनके तो देखिये
फ़िर हर समझदार तुम सा होना चाहेगा
क्योंकि
आपको लगता है
बस तभी
आप समझदार बनते हैं
ये दूसरों की नज़र से ख़ुद को देखने जैसा है


और
जीने के लिए
अपने भीतर मुस्कुराते हुए जीने के लिए
आपका बुद्धू होना काफ़ी है.

“आओ अब खाना खातें हैं
भिंडी टेस्टी बन पड़ी है”






चलते-चलते :

अगर आप इस धरती को ही स्वर्ग के रूप में देखना ही चाहते हैं तो आपको पहले ख़ुद को स्वर्ग में रहने लायक बनाना ही होगा. दूसरा कोई उपाय नहीं हैं. अपने, केवल अपने बारें में लगातार सोचते रह जाने की वजह से ही यहाँ नरक की सड़कें मजबूत हुई हैं. सबसे ज्यादा समझदार समझ लिए गए लोग ही सबसे ज्यादा लापरवाह और बेपरवाह पाए जातें हैं और नतीज़ा आपके सामने हैं.

अब प्रेम, इंसानियत और आनंद के समय को आना ही चाहिए. आप भी इसमें अपनी ज़िम्मेदारी और हिस्सेदारी डालिए.
फ़िर देखिये, शायद जीवन ख़िल उठे?


06 April 2019
07.43 AM
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Apr 4, 2019

सब कुछ कमाल का हो रहा है.





आज जीवन अपनी महत्वपूर्ण संभावना की ओर है
चाहे वो विज्ञान हो
कला का कोई क्षेत्र
तकनीकी उपलब्धियां
या के
अध्यात्म से जुड़े नए-नए आयाम.


सब कुछ कमाल का हो रहा है
सचमुच कमाल का
अनदेखा
अनजाना
दौड़ता हुआ
गायब होता हुआ
फ़िर से कुछ नया होता हुआ
ये जादूगरी का दौर है
मानवीय विकास और तकनीक का जबरदस्त संगम.

आज से लगभग 10-20 साल पीछे जाइए
और
देखिए आज और उस कल का डिफरेंस
लगभग सब कुछ बदलता जा रहा है
बड़ी ही तेजी से
ये ऑफलाइन से ऑनलाइन जीवन का आगाज है


आज से 20 साल बाद क्या होगा
पता नहीं
लेकिन जो भी हो
ये ज़रूर कुछ शानदार सफ़र लिए हुए होगा
मशीनें इंसानों को चलाएंगी
या कुछ और
ये रोचक होगा.


कुल मिलाकर
ये अलग- अलग रंगों से बना जीवन हो गया है
अच्छी सुविधाएं
मानसिक मजबूती
कुछ कर गुजरने का जूनून
और घर बैठे नेटवर्किंग.


आप जो मर्ज़ी काम कर सकते हैं.


हाँ, एक चीज
जो वक़्त के इस उतार-चढ़ाव से
बिलकुल भी बदली नहीं है
और
शायद कभी बदले भी ना
वो है अपने भीतर प्रेम की मिठास.


समय और प्रेम यथावत रहेंगे
और
आपके जीवन को हैरान करते रहेंगे
ये दर्द में भी मलहम का काम करेंगे
और
ख़ुशी में आपको गद्गद करते रहेंगे.


अपने जीवन काल में आप
अगर कभी प्रेम की इस संभावना को छू सके
तो फ़िर
अतीत, भविष्य और वर्तमान तीनों
आपके लिए एक बिंदु पर उपस्थित रह सकते हैं
और आप
दुनिया के विकास के साथ-साथ
अपने भीतर के आयामों के गवाह भी बने रह सकते हैं
और

गहराई से ये समझ लेना कि
जीवन के हर दौर में
आपकी साँसे सस्ती होती जाएँगी
किसी नेट पैक की तरह
ये आपके प्रेम को मजबूती देता रहेगा.
आपके अंदर छुपे प्रेम को.


04 April 2019
07.55 AM
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Mar 31, 2019

तुमसे जीवन के होने का जिक्र है





तुम्हारे हिसाब का कुछ हो जाये तो सुख
उसके हिसाब का कुछ हो जाये तो दुःख
दोनों के हिसाब का कुछ हो जाये
तो
एडजस्टमेंट
यानि
समझौता


और
गर तुम
अचानक कभी
चलते-फिरते
जीते-जागते
सुख-दुःख और समझौते
इन तीनों ही बिन्दुओं पर
सहमति उठाने का जोख़िम ले सको
तो ये निश्चय ही
सहनशक्ति का संगम बनेगा

और  
तुम माप-तौल वाली
पक्षपाती इंसानी फिलोसोफीस से
मुक्ति पाओगे
जैसे कि
जीत-हार से
मौन-तकरार से
भीतर-बाहर से
आगे-पीछे से
ऊपर-नीचे से
जात-पात से
धर्म-कर्म से
जीवन-मरण से
और
अच्छे–बुरे से


अब आगे का रास्ता
वरदान है
अब ये
तुम्हारे होने-ना होने का नहीं
बल्कि
तुमसे जीवन के होने का जिक्र है

अब तुम्हें नहीं
बल्कि
अस्तित्व को तुम्हारी कहीं ज्यादा फ़िक्र है.

31 March 2019
Sunday, 02.27 PM
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