Apr 12, 2019

आपको एक बार कोई भंडारा जरुर अटेंड करना चाहिए.







कोई आपके आगे झुक नहीं रहा है तो हो सकता है उसकी कमर में दर्द हो. गलतफहमी ना रखें.



पेश हैं ऐसे ही कुछ स्वरचित हास्य से भरे हयूमर कोट्स जो जीवन का रस लिए हुए हैं. 


Quote : दुनिया में जितना भी अच्छी बातें या उपदेश हैं, सब को पता है. उनका सहीं इस्तेमाल का तरीका मगर किसको पता?


Quote : दुखी आदमी ही किसी को सुख दे पाता है और फ़िर वो ख़ुद भी सुखी हो जाता है.


Quote : जिंदा रहते हुए ही किसी के अपने बनें. मरने के बाद आपको वो नहीं मिलेगा, जिसके लिए आप इतनी बड़ी कार लेकर दूर से चल कर आयें हैं.


Quote : गंदी खाद खाने के बाद भी फूल कितने सुंदर होते हैं. आपने अपना ये क्या हाल बना रखा है? आप तो सब कुछ अच्छा ही खा रहे हैं.


Quote : व्यक्तिगत जिंदगी में अगर आपको पूरी आज़ादी चाहिए तो दूसरों को भी आज़ादी से रहने दें.


Quote : अगर तुम ईश्वर को नहीं मानते तो एक बार उनके जैसा बनके दिखा दो. कम से कम दूसरे लोग तो यकीन कर लेंगे.


Quote : आपकी लाटरी लग गयी. बहुत अच्छी बात है. अब दूसरों का नंबर लगने दीजिए. आपकी टिकट कट चुकी है.


Quote : किसी के हिसाब का कुछ नहीं होता. जीवन कोई मुनीम-गिरी करना या हिसाब-किताब नहीं है. ये हैरान कर देने वाली अद्भुत घटना है.


Quote : जब इसी पल में आप किसी का अच्छा कर सकते हैं तो कर डालिए ना. अच्छेपन की आपकी तलाश भी आख़िरकार पूरी हो जाएगी.


Quote : लोगों को जिस काम के लिए रखा जाता है, अगर वो सिर्फ़ उस पर ध्यान दे सकें तो फ़िर किसी भी क्षेत्र में मंदी नहीं है. सिर्फ़ स्कोप ही रह जाता है और उदासी का कोई दौर हमेशा के लिए ख़त्म.



Quote : जो आसानी से मिल जाता है, उसकी कद्र नहीं होती. आपको एक बार कोई भंडारा जरुर अटेंड करना चाहिए.


Quote : अपनों से दूर जाने के बाद आपकी इज्ज़त बढ़ जाती है. पर अफ़सोस, अब आप उनके किसी काम के नहीं. आप दूर जो हैं.


Quote : अगर आपकी कार का कोई टायर कभी पंचर हो जाए तो सिर्फ़ सड़क को मत कोसिये. हो सकता है आप जैसे ही किसी आदमी ने ही कोई कील कभी उस सड़क पर फेंकी हो.


Quote : जो सीखना चाहे, वो छिपकली से भी सीख सकता है. जो ना चाहे वो बर्फ़ के पहाड़ों में कमी निकाल देगा.


Quote : पहले मैं सबके साथ थोड़ा थोड़ा हँस लेता था. अब मैं ख़ुद पर सबसे ज्यादा हँसता हूँ.


Quote : वो हर चीज़ जो आपके अंदर हैं. एक दिन वो ही बाहर आती है. और आ भी क्या सकता है?


Quote : सर्दी में हम जिस स्वेटर को पहनना पसंद करते हैं, उसे ही गर्मी में उतार फेंकते हैं. जैसे मौसम बदलता है. वैसे ही जीवन भी.


Quote : अगर लोगों के पास आपके लिए कभी भी समय नहीं है तो कहीं ना कहीं आपसे कहीं ज्यादा इम्पोर्टेन्ट काम उनके पास ज़रूर होंगे. उनकी चिंता छोड़िये. आप उनके गले मिलिए जिनके जीवन में आप कहीं न कहीं इम्पोर्टेन्ट हैं.


Quote : एक घर में लगभग सभी लोग एक जैसा ही खाना खाते हैं. फिर भी सबकी हेल्थ में दिन रात का फ़र्क रहता है. क्यों? ये आप कहीं बेहतर जानते हैं.


Quote : हर आदमी का जेनेटिक्स अलग है. आप पीले रंग से नीले रंग का काम कैसे करवा सकेंगे? एंड वाईस-वर्सा.


Quote : जो आप पर गुस्सा करता है, वो आपकी चिंता करता है क्योंकि उसे आपसे प्यार है. बाकी सब आपसे तब तक जुड़े हैं, जब तक आप उनके सामने हो.


Quote : मैंने मदद के लिए तुम्हें पुकारा और तुम आ गए. तुम्हारा उपकार है. मैंने तुम्हें याद किया और तुम आ गए, ये चमत्कार है.


Quote : सबकी प्लेसमेंट कन्फर्म है. यहाँ भी और वहां भी. अपना बायोडाटा तैयार रखना.


Quote : लाइफ इज क्रेजी. आप लाइफ के लिए कोई क्रेज बनाए रखें और आइसक्रीम की तरह पिघल रही इस जिंदगी के अलग – अलग फ्लेवर की याद लेते चलें. ये यात्रा के अंतिम पड़ाव का डिनर पैक होगा.


11 April 2019
7.57 AM.
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Apr 9, 2019

आप "थू" भी नहीं कर सकते.






लोगों को जन्म से लेकर अब तक

कठिन परिश्रम करने को कहा गया

करियर और पैकेज पर सबने दिमाग लगाया
मगर

किसी ने ये काउंसलिंग नहीं की

कि ऐसा काम करना जिसमें

दुविधा और कठिनाई कम हो

और

बीच-बीच में ख़ुशी मिलती रहे

यानि संतुलन का एहसास.





हो सकता है दुनिया में ऐसा कोई काम

हो ही ना,


लेकिन किसी का भी मन

ख़ुशी और तसल्ली तो चाहता ही है ना.








असल में



अब अधिकांश लोग

अपना

लगभग हर काम

बड़ी पीड़ा से कर रहें हैं,


अपना मन मार कर

लाचारी और बेबसी से,


बस पैकेज है जो

लोलीपोप की तरह टेस्टी लगता है,

कई जगह तो वो भी नहीं मिलता

और देखिये कि आप "थू" भी नहीं कर सकते.





मेहनत भी पूरी है,

लेकिन जीवन उदास है,

क्योंकि

चीज़ों को करना मज़बूरी है.



भीतर ही भीतर मरते जाते हैं

शिकायतें बड़ी हो जाती हैं 

और

जिंदगी छोटी.





कितना नाटकीय है ये सब,

पसंद का जीवन ना मिले तो मुसीबत,

जीवन की पसंद ना मिले तो मुसीबत,

मिल भी जायें तो कोई नयी मुसीबत.




सब होते हुए भी एक ख़ालीपन,

फ़िर भी हिम्मत के साथ संतुलन

बनाता आदमी,

अपने भीतर ही भीतर कुछ गुनगुनाता आदमी.





हेल्थ बीमा है लेकिन हेल्थ नहीं,

पैसा आया है लेकिन वेल्थ नहीं

आदमी बड़ा हुआ, रिश्ते खोटे हो गए

पोस्टिंग बड़ी और कद छोटे हो गए.



कहते हैं
आदमी का काम बोलता है,



सच है
अब आदमी कहाँ बोलता है?


वो तुम्हें ख़ोज रहा है.


10 April 2019
6.45 AM
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Apr 7, 2019

आज तुम्हें गए पूरा एक महीना हो गया.






प्यारी माँ,

आज तुम्हें गए पूरा एक महीना हो गया

और

इन 30 दिनों में मैंने पिछले 4 दशक याद किए,

तुम्हारे आशीर्वाद के 40 साल

तुम्हारे दुलार के हजारों दिन.



ये अपने आप हुआ

और

मुझे अक्सर ऐसा लगता है

तुम कहीं चले गए हो बस,

मिटे नहीं हो, मिट सकते ही नहीं.




मुझे याद है

तुम्हारी आखिरी धड़कन की आवाज,

आँखों से बहते तुम्हारे वो बिन बोले शब्द

जो वेंटीलेटर से निकल कर जुबां तक नहीं पहुँच सके.



अपनी मौत से ठीक पहले भी,

तुमने वो ही कहा

जो बचपन से कहा करती थी

कि

तुम मनुष्य बनना जारी रखना,

किसी का बेटा, भाई, दोस्त या पार्टनर बनने से

कहीं पहले ही.



तुम्हें इंसानियत सीखनी होगी

और

साथ ही साथ ख़ुद को ऐसा भी बनाना होगा

कि

किसी की भी गलती हो, ग़लतफ़हमी हो जाए

तो

तुम्हें उनके लिए निभाना और हारना सीख लेना होगा,

बस तभी तुम जीने का मकसद जान सकोगे,

फ़िर चाहे अकेले पड़ जाना

लेकिन इसी सच के साथ ही जीना और मरना


कि तुम यहाँ किसी और की वजह से हो

और

इस वजह की लाज़

तुम्हें ही बरकरार रखनी होगी.




माँ,

मैं ये ठीक से तो नहीं कह सकता
कि पास हुआ या फ़ेल, 

पर

तुम्हारे हिसाब का थोड़ा बहुत बनने में ही

मेहनत बहुत लगी,

कभी-कभी पैर भी डगमगाए

आज भी डगमगाते हैं

लेकिन फ़िर भी

अपनी अपूर्णता के साथ भी

मैंने तुम्हारी बातों को दिल में उतारा

और

मुझ जैसे बेवकूफ के लिए

ये कतई आसान नहीं रहा.



अब तुम दिखाई नहीं देती  

तो और भी कठिनाई है,

कोई बताने वाला ही नहीं रहा

कोई बेवजह मेरे लिए रोने वाला,

मुझे हँसाने वाला ही ना रहा.


पता है माँ

तुम्हारे जाने के बाद,

मैं छत पर जाकर खूब रोया

और

तुमसे किया आखिरी वादा मैंने तोड़ दिया.


मैं बस ये ही नहीं कर सका माँ

बाकी तुमने ही जिंदगी दी थी

और

उसे वापिस लौटाने का  
ईश्वर ने मुझसे हर संभव प्रयास करवाया,

पर आखिर में हम मैच हार गए,

तुम अपने असली वतन चली गयी 

और मैं 

चुपचाप देखता रहा, खुली गीली आँखों से.


मुझे नियति को स्वीकार करना ही पड़ा,


ये आज नहीं तो कल मेरे साथ भी होना ही है.


आपके साथ मगर सफ़र शानदार रहा


हमनें खूब आइसक्रीम और चोटें खाई,


जख्म देखे,


ख़ुद पर हँसना सीखा,


रोना सीखा


दर्द में भी दूसरों को देना सीखा


मानवता देखी 


और तरह तरह की किस्मों के लोग भी देखे,


कुछ अच्छे, शानदार, समय पर बेवजह साथ देने वाले


और कुछ नकली से दो-मुहें टाइप के लोग भी,




कुछ भी हो ये यादगार रहेगा,


आपकी इच्छा-शक्ति से लेकर 


परमात्मा के अनदेखे 


चमत्कारों की कहानी,


और प्रभु ने सदा ही हमारी लाज़ रखी.





माँ, 

मैं अपनी बेवकूफियां अब भी 

जारी रखना चाहूँगा

ताकि

तुम्हें ये सुकून और तसल्ली रहे 

कि

तुम्हारे इस आधे-अधूरे चिराग ने

अपने हिस्से की रोशनी बांटने में

कभी देर नहीं की 

वो भी बिना किसी से उम्मीद करे.


अलविदा माँ.

जाते-जाते मैं तुम्हारा शुक्रिया करना चाहता हूँ,

तुमने मुझे प्रैक्टिकल नहीं होने दिया 


और शायद ये ही वजह है कि


मेरे अंदर अब भी एक छोटा इंसान धड़कता है,

पत्थर हुए बिना


मुझे बस ये ही मेरी कमाई लगती है


जो मुझे जिंदा रखे हुए है.


मैं कुछ देर अब वापिस छत पर जाना चाहता हूँ,

वहां पर स्वर्ग है,
भाव का स्पर्श लिए हुए.



07 April 2019
1.49 PM
Image Source: Google


(Just One Month before…Same Day….Same time…...........You took your Last Breath….MAA…..Let’s Celebrate the Pain.)