Apr 30, 2019

8 महीने परिवार के साथ पार्किंग में रहना.






आज जैसा दिखता है,
कल वैसा बिलकुल भी नहीं था.

जीवन में एक कठिन शुरुआत.
स्कूल में अपने शुरुआती वर्षों में
बेहद शांत और कोई भी दोस्त नहीं.
फ़िर पता चलता है कि
वो लोगों को हँसा कर दोस्त बना सकता है.
ये टर्निंग पॉइंट.

लेकिन पढ़ाई के रिजल्ट हैरान-परेशान करने वाले.
टीचर के रिपोर्ट-कार्ड में पूरी क्लास को डिस्टर्ब करने वाला एक बच्चा भर.
घर पर शीशा देखकर फेस एक्सप्रेशन और नक़ल का अभ्यास जारी.

पिता बच्चे के टैलेंट से प्रभावित
लेकिन माँ चिंतित.
पैसा भी एक समस्या.
खर्च निकलना बड़ा मुश्किल.
ग़रीबी टैलेंट पर भारी.
किराये का मकान.
स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ
फैक्ट्री में 8 घंटे की शिफ्ट में काम करना.
16 की उम्र में स्कूल छोड़ने की नौबत.

फ़िर कनाडा जाना
और
8 महीने परिवार के साथ किसी पार्किंग में रहना.

क्या आप उसके इमोशनल थॉट प्रोसेस को समझ सकेंगे?

बचपन अधूरा, पिछड़ा होने की फील, ग़रीबी की दुत्कार और रहने में किल्लत.
ये जान लेना कि दूसरों की तुलना में उसे
बहुत ज्यादा मेहनत करनी ही होगी.
सबसे बड़ी बात ये कि
जीवन के जादू पर पूरा भरोसा.


ये हैं
एक्टर और कॉमेडियन जिम कैरी.
17 जनवरी, 1962 को जन्म.

1979 तक चौकीदार की नौकरी.

1983 में हॉलीवुड की एंट्री.

1993 तक लगातार अपने फेलियर से लड़ना.

उसके बाद हर फ़िल्म सफ़लता की गारंटी.

और 
अब जिम कैरी एक लीजेंड है.


ये एक दिन का खेल नहीं था, 

पल-पल की कहानी थी.


जिम को आने वाली पीढ़ियों को याद रखना ही चाहिए
ताकि वो भी जान सकें
कि चांदी के चम्मच लिए बिना भी लोगों ने ख़ुद को सोना कैसे बनाया?


चलते-चलते:
जब 1994 में कैरी के पिता की मृत्यु हुई, तो उन्होंने अपने पिता के ताबूत में 10 मिलियन डॉलर का चेक उस व्यक्ति को श्रद्धांजलि के रूप में रखा, जिसने स्टार बनने के उनके सपनों को शुरू किया था और मरते दम तक उनका साथ निभाया.

चेक पर जिस तारीख़ और साल का जिक्र था, उससे कहीं पहले ही जिम ने ये कारनामा कर दिखाया. ये उसकी फीलिंग्स की जीत थी. असली जीत. ख़ुद से कमाई हुई.



इंफो एंड इमेज सोर्स: गूगल

Apr 29, 2019

शायद यहीं कुत्ते बाज़ी मार गए हैं. कुत्ते कहीं के.





इन दिनों कितने ही इंसान,
लोगों को कम,
कुत्तों को ज्यादा लाइक करते हैं.

शायद उनका प्यार या उनकी वफ़ादारी,
लोगों से कहीं ज्यादा ऊँचे लेवल की होती होगी.

वरना आस-पास इतने इंसानों के होते हुए भी
कोई किसी कुत्ते से प्यार करे,
ये कैसे मुमकिन है?

कुछ तो जरुर ऐसा है
जो आपसे ज्यादा
उन्हें कुत्तों पर भरोसा होने लगा है.

कुत्तों से लव-अफेयर गारंटीड सफ़ल है.
जब तक कुत्ता जिंदा है,
शायद ही वो आपको कभी धोखा दे.

भगवान् हमसे कितना प्रेम करते हैं,
ये कोई % में नहीं बता सकता
लेकिन
कुत्ता 100% प्रेम है.

आप सुबह अपने काम पर जाने से पहले
उससे कैसा भी बर्ताव करें,
पर जब आप घर लौटते हैं तो
जैसा
वेलकम वो आपका करता है
वैसा तो पूरी दुनिया में कोई पति, पत्नी या बच्चे
शायद ही कर पाते हों?
क्या आपने ये कभी महसूस किया है?

ये सारा का सारा प्योर लव का मामला है
और प्योर होने के लिए आपको खुशनुमा बनना होगा.

कुत्ता ख़ुद से ख़ुश है
और ख़ुश इसीलिए
क्योंकि गिविंग प्रोडक्ट है.
और इसीलिए ही आपको ढेर सारा
प्यार कर पाता है,
बिना कोई प्लानिंग किए, बिना कोई ब्रेक लिए.

हैरान मत होइए.
आप देखते ही होंगे
कि कितने ही लोग
अब अपने परिवार, दोस्तों या दूसरे संबंधो की बजाय
अपने कुत्ते से ज्यादा प्यार करने लगे हैं.
उसे ज्यादा वक़्त देते हैं.

वो झिकझिक भी नहीं करता,
ज्यादा उम्मीदें भी नहीं रखता,
आपकी ईगो भी हर्ट नहीं करता,
आपको नीचा भी नहीं दिखाता,
आपके लिए उसकी जान भी हाज़िर है
और पूरी 100% वफ़ादारी भी.
उससे कोई प्यार क्यों नहीं करेगा?



सवाल ये नहीं है
कि क्या कुत्ते इंसानों से बेहतर हैं?

सवाल ये है कि क्या
इंसान कुत्तों से कुछ सीख कर
ख़ुद को दूसरों के लिए और बेहतर बना सकता है या नहीं?

ये ही असली सवाल है.



चलते-चलते हास्य रस:

क्या जमाना आ गया है. बताओ, अब इंसानों को भी किसी और से कुछ सीखना पड़ रहा है? हमनें तो सुना था कि वो सबसे चतुर जीव है, पर वो तो दुखदायी निकला. प्रेम का अभाव ही सभी परेशान करने वाली चीज़ों का कारण है और शायद यहीं कुत्ते बाज़ी मार गए हैं. कुत्ते कहीं के. हा हा.

08.13 AM
29 अप्रैल 2019
इमेज सोर्स: गूगल


वो फॅमिली स्ट्रेस से कैसे निपटे?





एक गाँव में एक टीचर रहता था.
अच्छा सेटल था,
लेकिन
ऱोज-ऱोज की फॅमिली स्ट्रेस से बेहद परेशान भी.

इस अशांति से फ्री होने का
एक ही रास्ता उसे नज़र आया
कि वो आत्महत्या कर ले.
किन्तु ये फ़ैसला इतना आसान भी नहीं था.

उसके परिवार का क्या फ्यूचर होगा,
अगर वो ऐसे चला जाए तो?
इस उलझन से वो कैसे निपटे?

समाधान की अंतिम इच्छा लिए
वो गाँव से कुछ ही दूरी पर स्थित
महर्षि रमण के आश्रम में जा पहुंचा.

उन्हें नमस्कार कर
आत्महत्या का कारण बता उनसे मार्गदर्शन माँगा.

उस समय महर्षि
आश्रमवासियों के भोजन के लिए
बड़ी सावधानी से पत्तलें तैयार कर रहे थे.
उन्होंने चुपचाप उसकी सारी बातें सुनी.

टीचर ने सोचा कि इतना बड़ा फ़ैसला है,
शायद
गुरूजी इसलिए ही लेट हो रहे हैं
और
कुछ भी बोल नहीं रहे हैं.

पत्तल बनाने में उनकी मेहनत,
लगन और फोकस देख कर
टीचर को बड़ा आश्चर्य हुआ.

उससे रहा ना गया.
उसने पूछा, "हे प्रभु,
आप इन पत्तलों को
इतनी मेहनत और लगन से बना रहे हैं,
लेकिन क्या आप नहीं जानते कि
कुछ देर बाद ही भोजन के उपरान्त
ये कूड़े में फेंक दी जायेंगी.

महर्षि मुस्कुरा कर बोले, आपने ठीक कहा.
लेकिन
किसी भी चीज़ का पूरा यूज़
हो जाने के बाद उसे फेंकना बुरा नहीं है.
बुरा तो तब है,
जब उसका यूज़ किये बगैर ही
किसी अच्छी अवस्था में ही कोई उसे फेंक दे.

आप तो ज्ञानवान हैं,
हज़ारों बच्चों को शिक्षित करते हैं,
आप ज़रूर मेरे कहने का मतलब
समझ ही गये होंगे.

ये सुनकर टीचर महोदय को जैसे
अपनी प्रॉब्लम का समाधान मिल गया.
उनमें फ़िर से जीने का जोश उमड़ पड़ा
और
उन्होंने आत्महत्या का विचार
हमेशा के लिए हवा में उड़ा दिया.

सभी सोर्स: इंटरनेट/गूगल


Apr 28, 2019

बवंडर या सुनामी?






आजकल पाँव जमीं पर नहीं पड़ते मेरे.

ये ही गुनगुनाते हैं सब, जब होता है कुछ ऐसा

आइए नीचे चल कर देखते हैं कि हुआ?




जब मैं ऑफिस पहुंचा,
1 घंटे बाद ही
बीवी का फोन आया,
बोली- आज क्या तारीख है?

मैं घबराते हुए बोला- 28 अप्रैल

उसने तुरंत फोन काट दिया.

मैं काफी डर रहा था
और सोचने लगा....


उसका बर्थडे - नहीं,

मेरा बर्थडे – बिलकुल भी नहीं,

हमारी एनिवर्सरी – फ़रवरी में थी.

बच्चों का बर्थडे नहीं,

सास-ससुर का बर्थडे – सर्दियों में है.

सास-ससुर की एनिवर्सरी – जनवरी में ही तो गयी है.

सिलिंडर बुकिंग - करवा चुका हूँ.

मोबाइल और डिश टीवी रिचार्ज – हो गया था.

बिजली बिल और दूध का बिल – चुका दिया गया है.

पानी का बिल- ये भी हो चुका.

बच्चों की किताबें और फ़ीस सबमिशन – डन.

सप्ताह की सब्जियां और किरयाना – कल ही तो लाया था.

और कोई गलती – याद नहीं आ रही.

तो
तारीख क्यों पूछी उसने?

मेरा लंच 

और 

लंच ब्रेक भी 

इसी सोच और डर में गुजरा.


खैर,

शाम को छुपता-छुपाता जैसे-तैसे घर पहुंचा.

बच्चे पार्क में खेल रहे थे.

मैंने पूछा - घर का मौसम कैसा है?

बवंडर या सुनामी?

गुड़िया ने कहा- सब ठीक है
पर आप ऐसे क्यों पूछ रहे हो पापा?

मैंने कहा- सुबह तुम्हारी मम्मी ने आज की तारीख पूछी थी.

बेटी मुस्कुराई और बोली – ओ पापा,

आज सुबह ही मैंने रसोई की दीवार पर

टंगे कैलेंडर में से कुछ पन्ने फाड़ लिए थे.

शायद इसलिए वो कंफ्यूज हो गई होंगी.


उफ़्फ़.

मेरी जान में जान आई.

यकीन मानिये.

आपको टीवी देखकर 

नेगेटिव होने

और

लोगों से मिलने की क्या जरुरत है?


एक शादीशुदा आदमी का जीवन 

तो 

पहले से ही दहशत से भरा होता है.


इमेज सोर्स: गूगल.