Jan 30, 2020

A से B एंड सो ओन सो ओन.





जीवन रहस्यों की पगडंडी है.
जितना तुम आगे बढ़ोगे,
ये तुम्हें पीछे धकेलता रहेगा.
ये कहेगा तुमसे कि अभी तो 
कुछ हुआ ही नहीं है.
तुम थोड़ा और ज़ोर लगाओगे.
A से B एंड सो ओन सो ओन.

जब तुम Z तक पहुंचोगे,
कितने ही साल निकल चुके होंगे,
कितने ही रिश्तें बह चुके होंगे,
कितने ही लम्हें यादें बन चुके होंगे.

उस वक़्त तक तुम सबकुछ बन चुके होंगे,
सबकुछ पा चुके होंगे,
कितना कुछ पचा चुके होंगे.
सारा ज्ञान तुम में भर चुका होगा.
सारी इच्छाएं पूरी हो चुकी होंगी.
Z पर तो फाइनल स्पीच रह जाती है.

तुम चाहोगे कि लोग तुमसे,
तुम्हारे अनुभव पूछे,
कोई चांस नहीं.

तुम चाहोगे कि तुम्हारी उपलब्धियों पर 
लोग ताली मारें,
कोई चांस नहीं.
तुम चाहोगे कोई साथ खड़ा रहे 
मरते दम तक,
कोई चांस नहीं.
तुम चाहोगे कि जो कमाई की, 
उसका एन्जॉय कर लूँ,
बॉडी ऐसा कोई चांस नहीं देगी.

फ़िर तुम A की तरफ़ वापिस लौटना चाहोगे
लेकिन ये प्रैक्टिकल नहीं है.

फ़िर तुम चैक करोगे कि ये हुआ क्या?
जिस ख़्वाब से जन्नत की कल्पना की थी,
वैसा तो कुछ भी नहीं है.

और तब तुम,
अगर पहचान पाए कि
असली ख़्वाब कौन सा है
तो शायद कुछ फूल खिल सकें
तो शायद तुम्हारी सुई कहीं अटके
तो शायद कुछ क्लिक हो.
तो शायद जीवन धड़के.

अभी तो A टू Z का सफ़र है.
पूरा कर लो.
फ़िर अगर समय बचा तो चर्चा होगी.
क्योंकि
हर विज़न के साथ एक प्रोविजन होता है.
नो विज़न के साथ भी.
आफ्टर विज़न के साथ भी.


इमेज सोर्स: गूगल


No comments: