Jan 1, 2020

कौन आया, कौन जीया और कौन बीता?





लो जी.
ये आ गया.
ठीक वैसे ही, जैसे पिछली बार 2019 पधारा था.
इस बार इन्क्रीमेंट हुआ और ये डिजिट
बदल कर 2020 हो गई.

अब दिल कहेगा, चल भूल जा वो 
सब जो तुझे पसंद नहीं आया.
वो ही याद रख, जो तेरे काम का है.

दिल बड़ा नटखट है.
स्वाद लेता रहता है.
हमें गोली देता हुआ कि हम समझदार हो रहे हैं.
थोड़े एडवांस हो रहे हैं.
कुछ सुधार हो रहा है.

कुछ-कुछ होता है.
और ये दिल मांगे मोर.

जो कल तक नहीं थे, वो दस्तक दे रहे हैं.
जो कल तक छोटे थे, वो बड़े हो रहे हैं.
जो कल तक बड़े थे, वो, और विस्तार ले रहे हैं.
जो कल तक विस्तार ले रहे थे, वो पूरे हो चुके हैं
और 
जो पूरे हो चुके हैं, वो भी 
अपने तरीके से सेलिब्रेट कर ही रहे होंगे.

लाइफ का बाज़ार लंबा-चौड़ा दिखता जरुर है,
पता नहीं, बंद क्यों फटाफट हो जाता है.

कल एक साल बीत जाने की अंतिम रात थी.
आज नए साल की ये पहली रात होगी.

कौन आया, कौन जीया और कौन बीता?
घड़ी की टिक-टिक अस्तित्व की घंटी है.
ये बजती ही जा रही है.
इसे बजना ही है.
इसे बीतना ही होगा,
जैसे एक पुराना साल.

अगर आप खर्च नहीं होंगे तो 
बड़प्पन आना मुश्किल है.
अगर आप पुराने नहीं होंगे तो 
नयापन आना मुश्किल है.
अगर आप उलझेंगे नहीं तो सुलझना मुश्किल है.
अगर आप रोयेंगे नहीं तो हंसना मुश्किल है.
अगर आप गरीब नहीं रहे होंगे तो 
अमीरी पाना मुश्किल है.
अगर आप नटखट नहीं रहे होंगे तो 
गंभीर होना मुश्किल है.
अगर आप डल नहीं रहे होंगे तो 
होशियार बन पाना मुश्किल है.
अगर आप शर्मीले नहीं रहे होंगे तो 
निडर होना मुश्किल है.
अगर आप उदास नहीं रहे होंगे तो 
ख़ुश रहना मुश्किल है.
अगर आप दर्द से नहीं गुजरेंगे तो 
मुस्कान समेटना मुश्किल है.
अगर आप अकेले नहीं जिये होंगे तो 
सामाजिक होना मुश्किल है.
एंड वाईस-वर्सा.

लाइफ़ का हर एक्सपीरियंस संतुलन के लिए 
जन्म लेता है.
अगर आप किसी एक तरफ़ नहीं लटके
और दोनों साइड को रेस्पेक्ट दे सके
तो फ़िर कोई चीज़ पुरानी है या नयी,
इस झंझट, इस तनाव से मुक्ति है.

क्योंकि जीवन,
किसी के भी विचारों और इमोशन से कहीं बड़ा है.

कभी-कभी अपने विचारों और इमोशन से 
हटकर इसे देखना ही,
सही देखना है.
आपकी आंखें नए साल को भी ऐसे देख पायें,
फ़िर तो पुराना साल भी प्यारा ही लगेगा.

तुम प्यार में ही जीना.
जीवन तुम्हें वहीँ मिलेगा.


इमेज सोर्स: गूगल












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