Jan 11, 2020

और एक्सट्रीम, ख़ुद आकर आपके गले लगेगा.





पांच चीज़ें होती है.
सफ़र की पांच रेसिपी.

पहली चीज़ जीरो.
जैसे नया साल.
स्टार्टिंग पॉइंट.
एंट्री टिकट पक्की हुई.

आप आते हैं.
रोते बिलखते.
पेट भरता है.
मुस्कराहट.
पेट खाली,
रोना शुरू.
विचार, भावनाएं कुछ नहीं.
सबको देखकर आप ख़ुश.
आपको देखकर सब ख़ुश.
करियर आगे बढ़ता है.

दूसरी चीज़ – मिनिमम
आप बढ़ना शुरू करते हैं.
शरीर के सेल्स बढ़ने और एक्टिव होने शुरू.
दिल के साथ दिमाग की एक्सरसाइज एक्टिव.
आस-पास के एनवायरनमेंट के हिसाब से पर्सनालिटी डेवलपमेंट.
हैरानी भरी निगाहें
कम सवाल
कम शिकायतें
उमंग भरा सफ़र.

कुछ दिनों बाद
तीसरी चीज़ – एवरेज
दिमाग का पलड़ा भारी,
तेज धार,
दूसरों से तुलना के तूफ़ान,
आगे निकलने की चिंता,
पेट की भूख से भी बड़ी-बड़ी भूखें.
सब्र का टूटता बांध.
कुछ कर दिखाने का कीड़ा.
कुछ बन जाने का साइकोलॉजिकल लॉजिक.
कैसे भी, किधर से भी
ख़ुद की पतंग सबसे ऊंची उड़ाने की जिद.
शिकायतों भरे,
उम्मीद भरे दिन.
पीड़ाओं की परवाह से बेखबर लम्हें.
सेटल हो जाने के दिन.
अपने-पराये का राग.
काम निकाल लेने की जल्दबाजी
रेस्पेक्ट्फुल बने रह जाने के सपने.
उगते सूरज सी उमंग.

चौथी चीज़ – मैक्सिमम
दिमाग और दिल की रस्साकसी.
ढ़लते सूरज का उभार,
बॉडी सेल्स का स्लो मैनेजमेंट,
सैर की चिंता,
चोटों की चिंता,
अपने छोटों की चिंता,
जीवन बने रहने की फ़िक्र.
थोड़ी थोड़ी दयाशीलता,
माफ़ करने का रुझान,
गलत-सही से दूर भागने का मन.
किसी और के लिए कुछ अच्छा कर देने की कसक.
यादों के पलों में जीने की और ढ़लती सांसे.
कम भागा-दौड़ी,
कम और हल्का खाना,
शरीर के कैल्सियम और आयरन की चिंता.
सर्दियों में धूप के शांत पलों को समय देने के दिन.

पांचवी चीज़ – एक्सट्रीम
आशीर्वाद देने के दिन,
लोगों से मिलने-जुलने के दिन,
बचपन और जवानी याद करने के दिन,
अपनी और दूसरों की गलतियों 
और गलतफहमियों पर मुस्कुराने के दिन.
अपनी यात्रा के अच्छे पैक-अप का इंतजार.
आसमां, चांद, सितारों,
और ईश्वर के बारें में सोच उठना.
कम भूख,
केयर कौन करेगा - एक बड़ा सवाल.
आगे क्या होगा? इसकी घबराहट
सांसों की उथल-पुथल.
सोशलिज्म से इन्कार.
गायब हो जाने का भय.
एग्जिट टिकट कन्फर्म.


जीरो से एक्सट्रीम का सर्किल,
अद्भुत घटना, अद्भुत सफ़र और ठहराव.

इन सबके बीच इतना ही कि
अगर आप मिनिमम पर जोयफुल हैं
और कम से कम शिकायती भी,
तो, एवरेज मिल जाने पर आप ख़ुशनुमा
और मिनिमम आलोचक होंगे.
मैक्सिमम पर आप आभार से भरे मिलेंगे.
और एक्सट्रीम,
फ़िर ख़ुद आकर आपके गले लगेगा.
ये ग्रेस में जीने जैसा है.

इसका उल्ट भी लोग जीते हैं.
वो सदा, भारीपन से भरा रहेगा.

ये आपका सिलेक्शन है कि
आप जीरो नंबर प्लेटफ़ॉर्म से 
एक्सट्रीम प्लेटफ़ॉर्म पर कैसे रुकते हैं
और फ़िर कैसे आगे बढ़ते हैं?

नया साल और नए प्लेटफ़ॉर्म 
हमेशा से ऐसे ही रहे हैं.
आप उनसे कैसे पेश आयेंगे,
ये चॉइस, 
ईश्वर आपको देता ही है,
हमेशा.



इमेज सोर्स: गूगल







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