Jan 13, 2020

आज, आप चाहे कहीं भी हों. हैप्पी लोहड़ी.




कोई भी त्यौहार हो या फ़ेस्टिवल.
क्लासिक वाइब्रेशन लेकर आता है.

आप नए साल की पहली तारीख़ से शुरू कीजिए.
आज लोहड़ी है.
फ़िर मकर सक्रांति
और धीरे-धीरे अलग-अलग लिगेसी 
और विरासत की खूबसूरती
लिए ढ़ेरों त्यौहार.

ऐसा नहीं है कि पहले काम कम था 
या लोगों में जागरूकता नहीं थी.
सबकुछ था और 
तभी शायद वो मिलने-जुलने, शेयर करने,
एक दूसरे की हेल्प करने में कम 
ही हिचकिचाते थे.
समय समय पर जब भी किसी की 
ज़रूरत होती तो
वो साथ खड़ा रहने में ग्रेसफुल तरीके से 
शामिल होता था
और प्रैक्टिकल मदद भी करता था.

ये ठीक है कि 40% लोग सिर्फ़ बातें हाकनें 
की केटेगरी में रहे होंगे
लेकिन कम से कम 60% आपके लिए दिल से उपलब्ध भी थे.
ये कम नहीं था.

हालांकि आज के दौर में ये 60 से 
सीधे 6 पर अटकने लगा है.
विकास और उपलब्धियों के साथ दूरियां बढ़ना भी नेचुरल है.

खैर,
त्योहारों के जरिए आप अपने 
करीबियों के साथ कुछ दिन या कुछ पल
बीता लेते थे
अपने मन की बात कह लेते थे,
हल्कापन महसूस करते थे.

अब हाईटेक फ़ोन हैं, स्टेटस ऑनलाइन है तो
ये काम मेसेज या फ़ोटो और वीडियो 
भेज के होने लगा है.

समय के साथ जो भी चीज़ सामने आए, ठीक है.
स्वीकार कर लेना ही समस्याओं को दूर कर 
लेने का सबसे शॉर्टकट रास्ता है.

तो त्यौहार
आपको चिल करने के लिए आते हैं,
नार्मल रूटीन से थोड़ा अलग जीने का 
पैगाम लाते हैं.
अकेलेपन की मॉडर्न लाइफ़-स्टाइल को 
कुछ देर के लिए दूर भगा डालते हैं
और इनसे गलतफहमियों का कूड़ा भी 
जल्दी जल जाता है.

जैसे फैशन बदलता रहता है,
वैसे ही लाइफ़ भी अलग-अलग रूप में 
सामने आती रहती है.

त्योहारों से जुड़कर आप अपने अतीत को 
वर्तमान से जोड़ते हैं
और भविष्य की एक बुनियाद बनाने का 
हौसला जगाते हैं.

अपनी मिट्टी के त्योहारों और पकवानों की 
बात ही कुछ और है.

आज आप चाहे कहीं भी हों,
कैसे भी हों,
कैसा भी सोचते हों,
कुछ भी करते हों,
इन सबसे ब्रेक दिलाकर
आपको ख़ुद से मिलवाने का काम,
इन फेस्टिवल्स से बेहतर कोई और 
नहीं कर सकता.

ये जोड़ने का पैटर्न है.
टूटने के बहाने तो मिलते ही रहेंगे.
फिलहाल ये जुड़ने का समय है.
जुड़ कर देखिए.
अपनों के साथ, अब तो कुछ मीठा कीजिए.
उनके लिए भी त्यौहार मनाना सीखिए.


इमेज सोर्स: गूगल

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