Jan 28, 2020

करोड़पति तो लाखों हो सकते हैं, लेकिन पदमश्री सबको नहीं मिलता.





बड़े लोगों को कुछ बड़ा मिल जाए तो
कम हैरानी होती है
क्योंकि किसी ना किसी रास्ते से
उनका कनेक्शन फिट बैठ जाता है
और निशाना लग जाता है.
लेकिन अगर किसी छुपे हुए रुस्तम को 
कुछ बड़ा मिलता है तो फ़िर 
सबको ऐसा लगता है जैसे उन्हें ही मिला हो.

अभी पद्मश्री पुरस्कारों का अनाउंसमेंट हुआ है.
आप अगर गौर से देख सकें तो 
इन रेपुटेड पुरस्कारों में
आपको कुछ नाम ऐसे भी मिलेंगे
जिसे लेकर आपका अट्रैक्शन शायद 
ही कभी रहा हो.
लेकिन वो नाम और उनके 
काम वाकई इतने बेसिक और शानदार हैं
कि आप ख़ुशी के आंसुओं के साथ 
भीगने का मज़ा ले सकें.

ऐसे नाम जो टैलेंट से नहीं भरे हैं,
ऐसे नाम जो रेफेरेंस से नहीं बढ़े हैं,
ऐसे नाम जो सालों से ऐसे सपनों के साथ 
चले, जो उनके अपने लिए नहीं थे.

ऐसे ही एक शख्सियत हैं 
चंडीगढ़ के जगदीश लाल आहूजा.
लंगर बाबा के नाम से पोपुलर.
12 साल की उम्र में पेशावर से मानसा पहुंचे.
पटियाला में रेहड़ी लगानी स्टार्ट की.
फिर सिर्फ 4 रुपए 15 पैसे के साथ 
चंडीगढ़ शिफ्ट.
पिछले 39 साल से भूखे और 
जरूरतमंद लोगों को खाना खिला रहे हैं.

उनकी कहानी किसी फ़िल्मी कहानी से 
कहीं ज्यादा कलरफुल है.
भूखे मरने पर मजबूर एक 
व्यक्ति करोड़पति बनता है
और फ़िर अपनी दादी से मोटिवेशन 
लेकर इतिहास रच देना.

करोड़पति तो लाखों हो सकते हैं,
लेकिन पदमश्री सबको नहीं मिलता.

केलों के बिज़नेस से ऊंचाई तक जाना
और फ़िर लगभग 4 दशकों तक जरुरतमंदों को
दाल, रोटी, चावल और हलवा खिलाना
वो भी बिना किसी छुट्टी के.

उनकी वजह से PGI चंडीगढ़ का कोई 
मरीज रात में भूखा नहीं सोता.
कमाल है.

हर रात 500 से 600 व्यक्तियों का लंगर.
लंगर के दौरान आने वाले बच्चों को 
बिस्कुट और खिलौने भी.
मजबूरों का पेट भरने की लगन,
रोचक बात ये कि अपना सबकुछ बेचकर.

वो तो लंगर बाबा हैं ही,
उनकी धर्मपत्नी को भी सब सम्मान से 
“जय माता दी” कहकर बुलाते हैं.

आज कल के अजीबो-गरीब समाचारों के दौर में
मानवता से जुड़ी ऐसी खबरें आत्मा को
तसल्ली से भी कुछ ज्यादा 
आरामदायक फ़ील करा देती हैं.

अब समय है महान लोगों को पूजने का.

लंगर बाबा का ये जलवा हर सामान्य आदमी को
ये सोचने पर ज़रूर मजबूर करता है
कि महान होना ज्यादा बड़ी बात है 
या बड़ा बनना?

क्योंकि आप बड़े अपने लिए होते हैं
लेकिन महान किसी की सेवा करके ही
बना जा सकता है.

आज चंडीगढ़ मुस्कुरा रहा है.
उसके पास ख़ुश होने की धांसू वजह है.
वहां लंगर बाबा जैसे कमाल के लोग बसे हैं.
जीने का ढंग सिखा रहे हैं.
प्रैक्टिकल तरीका.
भारत में ऐसे कितने ही चंडीगढ़ है जो 
फूल खिला रहे हैं.

पद्मश्री मिलने पर लंगर बाबा और 
दूसरे महान लोगों को भी दिल से अभिनंदन.

यहाँ दिल, जीत जाता है.


इमेज सोर्स: गूगल


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