Jan 4, 2020

वो सिर्फ़ एक माली नहीं, एक ग्रीन प्लांट इंजिनियर है. चुड्सिंह द ग्रेट





उसका कद सामान्य श्रेणी में ही आता है.
वो हर सुबह हम से पहले कॉलेज पहुंच जाता है.
उसके चलने और बात करने का 
तरीका भी सालों से एक सा है.

अपने सुपरवाइजर के साथ वो आराम से 
पेश आता है
और कई बार उसके अहम से टकराव 
करने से भी बचता ही है.
वो अधिकतर लोगों से अलग सा है.

वो कॉलेज का एक टिका हुआ माली है 
और
कैंपस की अलग-अलग बिल्डिंगों के 
आस-पास के हरे घास के मैदानों की साफ़-सफ़ाई
और मेंटेनेंस का जिम्मा उसके हवाले ही रहता है.
वैसे उसे रोज गाइड कर दिया जाता है 
कि आज उसे क्या करना है.
वो आदेशों के मुताबिक अपना काम करता है 
और मस्त रहता है.
काम करते वक़्त मैंने उसे हमेशा 
चिंतामुक्त और मुस्कुराते भी देखा है.

एक फ़िक्स समय पर उसके 
डिपार्टमेंट के लोग चाय पीते हैं, 
लंच साथ करते हैं
और एक दूसरे से अपने सुख-दुःख भी 
शेयर करते चलते हैं.
उसका नाम चुड़ू है और प्यार से सभी 
उसे चुड्सिंह द ग्रेट कहकर पुकारते हैं.

मैं उसे माली ना कहकर, 
ग्रीन प्लांट इंजिनियर कहना 
ज्यादा पसंद करता हूं.
इसके पीछे ये राज है कि
और दूसरे लोगों से अलग ये भाईसाहब 
अपने काम से काम रखते हैं,
बेवजह इधर-उधर के मुद्दों पर ना 
अपना दिमाग ख़राब करते और ना दूसरों का.

जब वो पेड़ों और घास के बीच होता है 
तो सिर्फ़ उनका होता है.
जब वो चाय पी रहा होता है 
तो सिर्फ़ चाय पीता है.
जब कभी थकने के बाद वो लंच टाइम में,
झपकी भी लेता है तो वो गहरी झपकी होती है.
उसके काम करने के तरीके में 
कोई मिलावट नहीं है
और ना ही कोई आर्टिफीसियल फ्लेवर.
जो है, जैसा है, सबके सामने है.
बिंदास.

सबसे तगड़ी बात तो ये है कि
गुजारे लायक आमदनी में भी उसके 
भीतर किसी से
सहानुभूति लेने की इंच मात्र भी इच्छा 
मैंने कभी नहीं देखी.
वो अपने मन में जिस पर भी यकीं 
करता होगा, 
उसी से सब कह लेता है.

उफ़्फ़ करना उसकी डिक्शनरी से 
बाहर का मैटर है.
अगर किसी दिन वो कॉलेज में नहीं आए तो
ऐसा लगता है कि उसके डिपार्टमेंट के 
दूसरे लोग बस टाइम पास करने के 
लिए नयी कहानियां बना रहे हैं.
वो भी शायद समझते हैं कि 
चुड़ू क्यों एक प्लांट इंजिनियर है.

हम लोग गाहे-बगाहे उसके लिए कुछ चीज़ें 
इकठ्ठा करके उसे देने को कोशिश करते हैं.
उसे कुछ देते हुए हमें ज्यादा 
सम्मानजनक फ़ील होता है.
वो नार्मल ही रहता है.
उसकी ये क्लासिक नेचर उसे 
बहुत ऊँचे दर्ज़े का इंसान बना देती है.

उसका भरा-पूरा परिवार है.
और उसे प्यार करने वालों की कोई 
कमी नहीं है.
शायद ये उसकी नीयत का कमाल है,
जो उसके साथ साथ हमें भी निहाल कर देती है.

पिछले दिनों एक पेड़ की छटाई करते वक़्त 
वो कुछ उंचाई से गिर पड़ा.
हालांकि ये एक हल्का नेचर झटका था 
लेकिन उसकी चिंता सबको हुई.
अब वो ठीक है पर वो पेड़ अब भी उदास है.
उसने एक सीधे- साधे आदमी को उल्टा 
जो गिरा दिया था.

कॉलेज का बॉस उनसे घर मिलने गया 
तो और अच्छा लगा.
अब चुड़ू बिलकुल चंगा है
पर उसकी नीयत को देखकर
आंखें ख़ुशी के मारे डबडबा भी जाती हैं.

वो बात अलग है कि
हम वर्किंग टाइम में इंसान होने का नाटक 
कम ही कर पाते हैं.

वो एक नेचुरल एक्टर है जो 
अपनी अदाकारी से घास के तिनकों को भी
हँसा देता होगा.
इसलिए उसको प्लांट इंजिनियर कहना 
कहीं से भी कोई छोटा शब्द नहीं लगता.

जैसी इंजीनियरिंग उसके पास है,
लोग तरसते हैं कि हमें मिली होती.

ये ही उसका जीता हुआ एकमात्र मैडल है,
पर सब पर भारी.

जीने की कला और टेक्निक, 
कोई चुड्सिंह द ग्रेट से सीखे.
हैप्पी न्यू इयर इंजिनियर.




इमेज सोर्स: गूगल



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