Feb 11, 2020

उम्र बढ़ने के साथ, सेल्फ़-हेल्प ही प्रैक्टिकल विकल्प बचता है,






संडे की वो शाम भी, गज़ब की ही रही.
चाय पीकर, थोड़ा टहलने का मौका मिला,
तो चूका नहीं मैं.

घर वाली रेस्पोंसिबिलिटी निभा के,
अपने लिया थोड़ा जीवन निकलना
बड़ा टफ हो जाता है.
नाराजगी से ज़िल्लत का जोखिम कौन ले?
नौकरी में ही पेट भर जाता है.

हालांकि कोई प्रेशर नहीं होता,
मगर मन कहता है कि जितना हो सके,
पहले ये, फ़िर तुम.
तसल्ली, कभी-कभी ख़ुशी से भी, 
बड़ी चीज़ लगती है.
है ना?

गाहे-बगाहे कोशिश रहती है कि
ख़ुद से भी मिला जाए,
हवाओं से बातें हों,
पंछियों से संवाद हो,
आसमां की लालिमा से मुलाकात हो
और चाँद की चांदनी भीतर उतर जाए.

इसके लिए कोई टाइम-टेबल नहीं बनता.
जब मौका लगे, तभी ठीक.

अब पहले जैसे दोस्तों का 
जमघट नहीं लग सकता.
सब दूर-दूर अपने जीवन में बिजी, जैसे मैं.

शिकायत तो बिलकुल भी नहीं, 
हां मगर, मिस वो होते रहते हैं.
फ़ोन से याद करना, जैसे फॉर्मेलिटी की रेसिपी.
तो नहीं हो पाता.
हां, सुख-दुःख के हिस्से फ़ोन से 
इधर-उधर बिखर ही जाते हैं.

उम्र बढ़ने के साथ,
सेल्फ़-हेल्प ही प्रैक्टिकल विकल्प बचता है,
करना पड़ता है.
करना चाहिए भी.

तो संडे,
मीठा सा मौसम और टहलना.
लोगों के चेहरे नज़र आना, 
लेकिन सब अनजाने.

बड़े होकर, बड़े शहरों में बसना
यानि ख़ुद के साथ ही हंसना.

फ़िर पैरों ने कहा - बस कर. घर चल.
लौट गए साहब.
 आकर पसर गए.
कुछ नए-पुराने चेहरे आंखों के सामने घूमने लगे.

तब अचानक याद आया कि
बचपन में बड़ों ने बताया था कि 
सब परमात्मा के अंश हैं.

हंसी तो बहुत आई.
कैसे-कैसे अंश देखने को मिलते हैं.
कोई गूंगे, कोई बहरे, कोई गुमसुम,
कुछ शोर वाले, कुछ खोपड़ा-खाऊ, कुछ पकाऊ से,
कोई कंजूस, कोई लड़ाईबाज़, 
कोई ड्रामेटिक तो कोई शक्की,
कोई उदासी के केक सा, 
कोई उम्मीदों का सुल्तान 
तो कोई इंफो एक्सचेंजर,
कोई डूबा हुआ, कोई भागा हुआ, 
कोई उलझा हुआ तो कोई सताया हुआ.
जैसा बताया था, 
वैसा – वैसा तो रेयर ही कोई दिखाई देता है.
दिखता भी है तो जल्द ओझल हो जाता है.

खैर,
मैं इन अंशो को कागज़ के पन्नों में 
समेट ही रहा था कि
अचानक रसोई से एक 
तेज आवाज़ उभरी – रोटी खा लो.
सरसों का साग बनाया है.

बस फ़िर क्या था.
थैंक यू के साथ भूख मिटने का सफ़र शुरू हुआ
और सोने पर जाकर ही रुका.

कई संडे, वाकई यादगार होते हैं.
जैसे तुम.
अफ़सोस, ये बीत भी जल्दी जाते हैं.


इमेज सोर्स: गूगल







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