Mar 25, 2020

ये 3 वीक का फ्री एक्सक्लूसिव कोर्स है, विद इक्वलिटी मैनेजमेंट.





वो ही रह गया,
जिसे रहना था.
सब बह गया,
जो बहना था.

ना कोई कल,
ना कोई आज है
और ना ही आने वाला कोई कल.
ना कुछ बीतने को,
ना बताने को,
ना ही कुछ जताने को.

सबकुछ समय से परे. तंबू हो गया, अब टेंट.
ये, 3 वीक का, फ्री एक्सक्लूसिव कोर्स है, 
विद इक्वलिटी मैनेजमेंट.

ना कुछ, पुराना,
ना कुछ नया.
सब, बीच में समा गए हैं.
ना कोई छोटा रह गया, ना कोई बड़ा.
ना कोई ज्यादा रह गया, ना ही कोई कम.
समानता के अधिकार को विस्तार मिला.
अमीरी - ग़रीबी, ज्ञान-अज्ञान,
अँधेरा-उजाला, अगला-पिछला,
ऊपर-नीचे, आगे-पीछे,
तू-तू, मैं-मैं,
सारा अंतर मिट गया. सब, हो गए स्टूडेंट
ये, 3 वीक का, फ्री एक्सक्लूसिव कोर्स है, 
विद इक्वलिटी मैनेजमेंट.

घर-बाहर,
कस्टमर-दुकानदार,
नफ़रत-प्यार,
मजदूर-नंबरदार,
एकांत-संसार,
भूलचूक-उपकार,
सब, एक छतरी के नीचे आकर, 
खड़े हो गए सेंट-परसेंट.
ये, 3 वीक का, फ्री एक्सक्लूसिव कोर्स है, 
विद इक्वलिटी मैनेजमेंट.

चिंताएं, उदास हैं,
खुशियां, अपवाद हैं.
आदमी, आदमी के डर से बाहर निकल आया है.
क्या सच है और कैसा ये छलावा है?
सब, एक सुर में गीत गा रहे हैं,
पंछी, अपने घर को वापिस आ रहे हैं.
सुख और दुःख के कारण मिट गए हैं,
कुछ ख़ुद में, कुछ घर में सिमट गए हैं.
हवा का, ये कौन सा दौर है. इतना डेवलपमेंट ? 
ये, 3 वीक का, फ्री एक्सक्लूसिव कोर्स है, 
विद इक्वलिटी मैनेजमेंट.

जिसको कहते थे, तुम अपना,
तुम्हारे साथ जाने को तैयार नहीं.
वायरस का झंझट है, अब क्यों ये प्यार नहीं ?
खोखले बर्तनों में अब पानी कम है.
जो कल ख़ुशी थी, आज वो ही गम है.
तेज भागने वाले, निस्तेज दीख रहे हैं.
धीमे चलने वाले, उम्मीद पर टिक रहे हैं.
ऑनलाइन चिंता, धराशायी पड़ी है.
ऑफलाइन चिंता मुहं झुकाए खड़ी है.

ना कुछ करने को और ना कुछ कराने को.
ना कुछ जीत में है और ना कुछ हराने को.
सब, अपनी शिकायतों से, बाज आ रहे हैं,
जो कल ना आ सके थे, वो आज आ रहे हैं.
अब एक हो चला है, टेम्परेचर और टेम्परामेंट.
ये, 3 वीक का, फ्री एक्सक्लूसिव कोर्स है, 
विद इक्वलिटी मैनेजमेंट.

ये जो भी हुआ है,
अजब ही हुआ है.
जिसने भी किया है,
गज़ब ही हुआ है.
इस एकांत को चाहे, वेदांत बना डालो,
या फ़िर, छोटा सा, देहांत बना डालो.
कुछ ये, तुम्हें सीखा दे,
कुछ तुम, इसे सीखा दो.
इसे सदियों तक, याद रख लो,
या फ़िर, पल भर में ही उड़ा दो.
ये सबक है या लाचारी,
ये स्वास्थ्य है या बीमारी,
सुस्ती है के कुछ ख़ुमारी,
या कोई अनसुलझी महामारी.
कुछ भी हो, कुछ दिनों में हो सकेगी, 
फाइनल सेटलमेंट.
ये, 3 वीक का, फ्री एक्सक्लूसिव कोर्स है, 
विद इक्वलिटी मैनेजमेंट.

जो भी हो,
इसने तहलका मचाया है,
जो घूम रहे थे इधर-उधर,
ये, सबको घर ले आया है.

कुछ दिनों बाद, ये पतझड़ भी निकल जाएगा,
इस जनरेशन के लोगों को, पर, 
हमेशा याद आएगा.
ये करो ना,
वो करो ना,
बस करोना.

करते चलो, अपने दिलों को अच्छी यादों से, 
डेंट-पेंट.
ये, 3 वीक का, फ्री एक्सक्लूसिव कोर्स है, 
विद इक्वलिटी मैनेजमेंट.

ख़याल रखना.

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