Apr 15, 2020

अपने दिमाग से कहिए - वेट यार, कुछ देर और सही.





अगर आप, अपने शरीर की कॉमेडी का,
इंटरव्यू लेने में दिलचस्पी रखते हैं,
तो ये छोटा सा एक्सपेरिमेंट,
लॉकडाउन के इन गज़ब के दिनों में,
एक बार, ज़रूर करके देखें.

कुछ-कुछ होता है.
जब आपका पेट बिलकुल खाली हो और
कई घंटो से खाना नसीब ना हुआ हो,
तो सारे थॉट्स, इमोशन, भविष्य की चिंता,
घर-बाहर का तनाव, कई सारे, दूसरे मसले,
और भी न जाने क्या-क्या,
यानि वो सब भी, जो आदमी ने किसी भी,
डर के चक्कर में बटोर कर, 
छुपा कर रखे होते हैं,
वो सब दिमाग से साफ़ हो जाता है.
जैसे कभी था ही नहीं. 
चकाचक साफ़.

घर के बर्तन और कपड़े, 
आपको चकाचक चाहिए होते हैं,
वैसे ही, 
दिमाग के बर्तन और कपड़े भी, 
यकायक साफ़.

भूखे पेट,
सिर्फ़ एक लक्ष्य, 
पूरा फोकस, गहरी लगन कि
कैसे भी करके, 
इस पापी पेट में कुछ पड़ जाए.
पेट के सेल्स भूख से तड़फ रहे हैं,
बिलख रहे हैं.
कल की, कल देखेंगे.
अभी, किसी तरह, जिंदा बचें,
बस ये ही चिंता है.

आप, रसोई की तरफ़ भागते हैं.
खाना बना हुआ रखा है.

अब,
बेशक, खाना आपको मिलने वाला है.
फ़िर भी,
एक बार, 
अपने दिमाग से कहिए - वेट यार,
कुछ देर और सही.
एक बार,
पेट की एक्टिंग का एपिसोड तो, 
पूरा देख लें.

तेज चलती सांसे,
बंधा हुआ हौसला,
मन कर रहा है,
बिस्तर पर पसर जाएं.
सुन्न होता, शरीर का कोना-कोना.
कुछ पानी की बूंदें, गले में गटक कर,
अपने पेट के सब्र का एग्जाम लीजिए,
जैसे अब तक, दूसरों का, लेते रहे हैं.

एक तरफ़, पेट की आग है
और दूसरी तरफ़, आप की अग्नि-परीक्षा.

आप देखेंगे कि कुछ समय बाद,
दिमाग से हटकर,
सबकुछ, पेट पर फोकस्ड होने लगा है.
दिमाग तो घास चरने चला गया,
कुछ भी मिलने की उम्मीद छोड़ कर.
उसके हाथ तो, खड़े हो गए.
कम्पलीट सरेंडर.
नो पास्ट, नो फ्यूचर, ओनली दीस मोमेंट.

तो जब आप, 
इस मोमेंट को अच्छे से देख लें,
तसल्ली हो जाए.
उसके बाद,
साबुन से 20 सेकंड हाथ धोते रहिए.

खाना तैयार है.
भरपेट खाना खाइए.
उसके बाद देखिये, क्या होता है?

अब पेट को ख़ुराक मिल गई.
वो चुपचाप बैठ गया.
आप क्या देखते हैं कि,
सुस्त पड़ा दिमाग, 
घास चर के वापिस लौट आया है.
अब आप, वो ही, दिमाग लगाना शुरू कर देंगे.
सारे थॉट्स, इमोशन, भविष्य की चिंता,
घर-बाहर का तनाव, कई सारे दूसरे मसले,
और भी न जाने क्या-क्या,
फ़िर स्टार्ट.
बैंड बजना शुरू.

कुछ घंटो बाद,
फ़िर से दिमाग गूंगा, और पेट सामने.
एंड वाईस-वर्सा.

इन सबको,
एक अच्छी पैकिंग में दिखाना हो
तो
जिंदा रहना, फर्स्ट नंबर पर है.
पेट की भूख मिटना, दूसरे नंबर पर.
बाकी सारी चीज़ें, थर्ड नंबर और उससे पीछे.

अभी लॉकडाउन चल रहा है.
अच्छा समय है
कि हम जाने कि कुछ फ़ुट के
हमारे इस अजूबे स्ट्रक्चर में,
बॉडी और थॉट्स के अलावा भी,
क्या कुछ ऐसा है, जो हमें,
और दिनों से कुछ अलग देखने पर,
दूसरों के लिए कुछ कर-गुजरने पर,
मजबूर कर दे.
ये ही आपके लॉकडाउन की,
घर बैठे सफ़लता होगी.

सफ़ल होइए,
सफ़ल बनाइए,
सफ़ल कहलाइए,
अपने भीतर से.

इमेज सोर्स: गूगल

No comments: