Nov 20, 2020

समय हमेशा ही एक जैसा रिएक्शन नहीं देता

 



वे दो भाई हैं.

एक बड़ा और एक छोटा.

प्यार बराबर है.

फैमिली कंबाइंड है तो

सुख-दुःख के दिनों में दूरियाँ नहीं रहती.

 

मैं छोटे भाई को जानता हूँ.

काफ़ी सालों पहले एक दोस्त के 

दोस्त के रूप में

मुलाकातें होती रही थी.

अब तो लगभग 22-23 सालों से 

मिलना-मिलाना दूभर है.

हाँ, ऑनलाइन ख़बरें और 

जानकारी मिलती रहती है.

 

दोनों भाई अपने मम्मी-पापा को 

बहुत प्रेम करते रहें हैं.

लेकिन समय हमेशा ही एक 

जैसा रिएक्शन नहीं देता.

 

अभी पता चला कि कोरोना के चलते

कुछ दिनों के गैप में ही उनके 

मम्मी-पापा दोनों को जाना पड़ा.

ये दुखद और हताश करने वाला था.

 

जिस पर बीतती है, वो

ही बता सकता है कि 

किस तरह का दर्द कई पलों

तक इंजेक्शन की तरह चुभता रहेगा.

 

सारे सपनों पर ब्रेक लग जाता है,

जब अचानक ऐसा हो जाता है 

जो सोचा ना जा सके.

 

खैर, लाइफ़ की ये ही बिसात आसमान की तरफ़

नज़र झुकाने पर मजबूर करती है.

 

ना कुछ कह सकते,

ना मिलने जाने का कोई रास्ता.

 

छोटा भाई स्वभाव से बहुत अच्छा रहा है,

मगर उससे मिल पाना या कुछ संवाद करना

संभव नहीं दिखता.

 

काफ़ी दिनों से बीमार चल रहे और

डायलिसिस पर रहे बड़े फूफा जी भी 

अब चल बसे हैं.

 

उन्होंने भी एक योद्धा की तरह 

अपना जीवन जीया है.

बुआ जी स्वावलंबी और शांतिप्रिय रही हैं लेकिन

दुःख की मात्रा यहाँ भी कम नहीं है.

 

जब किसी भी तरह से लोगों को जाते देखता हूँ

तो स्टेबल होने मकसद बेमानी से लगने लगते हैं.

एक दिन जाना तय है,

पर आप ये भी तय नहीं कर सकते.

मैच फिक्स है पर बल्ला आपके हाथ में नहीं रहेगा.

 

मौत एक समझदार टॉनिक है.

इसे पीते रहने से जिंदगी का सच

काला दिखाई नहीं पड़ता.

 

जो आ रहे हैं, उनका स्वागत.

जो जा रहे हैं, उनके प्रति संवेदनाएं.

 

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Nov 19, 2020

अब "हमेशा के लिए" जैसा कोई स्टैण्डर्ड काम नहीं करेगा.

 



समय के साथ चीज़ें बदल ही जाती हैं.

अब ये मेंडल थ्योरी या 

वंशानुगत विचारधारा से अलग तरीके के दिन हैं.

 

पहले जो होता था, वो होता था.

अब वो अतीत है.

बाद में जो होगा, वो होगा.

वो भविष्य है.

 

आदमी या कोई भी जीव

सिर्फ़ आज क्या है,

उसमें कैसे जीना है

और अधिकतम क्या किया जा सकता है,

ये ही आज की विशेषता है.


लाइफ शार्ट-पीरियड

वर्चुअल रियलिटी वर्शन हो चुका है.


छोटी-छोटी खुशियों में,

छोटे-छोटे पलों में ही ज़िंदगी की

खूबसूरती सबसे ज्यादा

निखर के सामने आती है.

अब "हमेशा के लिए" जैसा 

कोई स्टैण्डर्ड काम नहीं करेगा.

 

इतनी सूचनाएं आपके ऊपर नीचे घूमती हैं कि

कंफ्यूज होने के अलावा और

कोई आउटपुट नहीं है.

इसीलिए तसल्ली से, आराम से तय करें कि

अपने लिए और

अपने बच्चों के लिए जीवन कैसा हो.

अगर आपने 4-5 मोबाइल एप्प 

बनाने की क्षमता विकसित कर ली है

और आप का ये शौक भी बन चुका है 

तो ये कतई ज़रूरी नहीं है

कि आप IIT से ही पढ़ के बाहर निकले,

तभी समझदार कहलायेंगे.

बिना उसके भी आप अपने लिए

एक सुंदर आसमान का निर्माण कर सकते हैं.

अब जीवन हर पल खुशियों की चाभी तलाश रहा है,

ये कम्पटीशन से बहुत उम्दा

और अच्छा चुनाव है कि

एक चीज़ के लिए दूसरों से लड़ने की बजाय आप

आसान ख़ुशी भरा रास्ता चुनें.


जनरेशन भी अब वैसी नहीं रही हैं,

विकल्प अनेक हैं.

 

एकरूपता ऊबाऊ हो चुकी है.

 

तो बिना डर के जीना सीखें

और अपने बच्चों से भी जीना सीखें

क्योंकि जब आप उनकी उम्र में थे,

तो सबकुछ अलग था.

 

अब सबकुछ डेमोक्रेटिक होता जा रहा है.

अपनी वैल्यू गिराए बगैर

उनके इमोशन समझिए

तो ही जानेंगे कि पैदा करना और जीने देना,

दोनों नदी के दो किनारों जैसे हैं.

पानी भी नया है.

छपाक.

 

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Nov 17, 2020

बाहर की आज़ादी अभी उलझन भरे दौर में हैं.

 


ये पहले कॉमन होने लगा था कि

आप टेस्टिंग करके देखते थे कि 

क्या बेहतर है और क्या नहीं और कैसे?

इसमें कई सारे एलिमेंट्स का योगदान होता था

कुल मिलाकर एक लम्बी, बड़ी 

और ऊबाऊ एक्सरसाइज.

फ़िर फ़ैसला लिया जाता था कि किस और चलें.

 

जब से कोरोना ने पैर पसारे हैं,

सभी आप्शन में मंदी का माहौल है.

 

किसी भी तरफ़ निकल जाओ,

किसी से भी बात करो,

रोने-धोने और धंधा मंदा होने की बात के अलावा

कोई दूसरी जिज्ञासा पास ही नहीं फटकती.

 

अब हर कोई अपने पुराने काम को 

किसी भी परसेंटेज तक लाने की जुगत में है.

कुछ अभी चुप बैठे हैं,

कुछ ने थोड़ी शुरुआत की है.

कुछ नए समीकरण बनाने की तरफ़ बढ़ रहे हैं 

तो कुछ

मंदी के एनालिसिस से ख़ुद का बोझ 

हल्का करने में लगे हैं.

 

यानि बाहर की आज़ादी अभी उलझन 

भरे दौर में हैं.

कोरोना का ख़तरा भी ऐसा ही है.

जब तक वेक्सीन आ नहीं जाती 

और लग नहीं जाती,

तब तक तो झुंझलाहट बनी ही रहेगी दिमाग में.

 

फ़िर भी जीना तो है ही,

समय तो पास करना ही है

और इसे ख़ुशी-ख़ुशी कर लिया जाए तो

ज्यादा बेहतर.

क्योंकि आपके काम की बनावट या 

आपके हालात चाहे जैसी भी हो,

अगर आप अपने जीवन में

हर दिन आनंदित और मस्त रह सकते हैं,

तो यह भीतरी आजादी का संकेत है.

साफ़ है कि जिंदगी का ऊबाऊपन आपको

डगमगा नहीं सकता

और ये ही जीवन की इच्छा है.

इसे होने दें.

 

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