Nov 19, 2020

अब "हमेशा के लिए" जैसा कोई स्टैण्डर्ड काम नहीं करेगा.

 



समय के साथ चीज़ें बदल ही जाती हैं.

अब ये मेंडल थ्योरी या 

वंशानुगत विचारधारा से अलग तरीके के दिन हैं.

 

पहले जो होता था, वो होता था.

अब वो अतीत है.

बाद में जो होगा, वो होगा.

वो भविष्य है.

 

आदमी या कोई भी जीव

सिर्फ़ आज क्या है,

उसमें कैसे जीना है

और अधिकतम क्या किया जा सकता है,

ये ही आज की विशेषता है.


लाइफ शार्ट-पीरियड

वर्चुअल रियलिटी वर्शन हो चुका है.


छोटी-छोटी खुशियों में,

छोटे-छोटे पलों में ही ज़िंदगी की

खूबसूरती सबसे ज्यादा

निखर के सामने आती है.

अब "हमेशा के लिए" जैसा 

कोई स्टैण्डर्ड काम नहीं करेगा.

 

इतनी सूचनाएं आपके ऊपर नीचे घूमती हैं कि

कंफ्यूज होने के अलावा और

कोई आउटपुट नहीं है.

इसीलिए तसल्ली से, आराम से तय करें कि

अपने लिए और

अपने बच्चों के लिए जीवन कैसा हो.

अगर आपने 4-5 मोबाइल एप्प 

बनाने की क्षमता विकसित कर ली है

और आप का ये शौक भी बन चुका है 

तो ये कतई ज़रूरी नहीं है

कि आप IIT से ही पढ़ के बाहर निकले,

तभी समझदार कहलायेंगे.

बिना उसके भी आप अपने लिए

एक सुंदर आसमान का निर्माण कर सकते हैं.

अब जीवन हर पल खुशियों की चाभी तलाश रहा है,

ये कम्पटीशन से बहुत उम्दा

और अच्छा चुनाव है कि

एक चीज़ के लिए दूसरों से लड़ने की बजाय आप

आसान ख़ुशी भरा रास्ता चुनें.


जनरेशन भी अब वैसी नहीं रही हैं,

विकल्प अनेक हैं.

 

एकरूपता ऊबाऊ हो चुकी है.

 

तो बिना डर के जीना सीखें

और अपने बच्चों से भी जीना सीखें

क्योंकि जब आप उनकी उम्र में थे,

तो सबकुछ अलग था.

 

अब सबकुछ डेमोक्रेटिक होता जा रहा है.

अपनी वैल्यू गिराए बगैर

उनके इमोशन समझिए

तो ही जानेंगे कि पैदा करना और जीने देना,

दोनों नदी के दो किनारों जैसे हैं.

पानी भी नया है.

छपाक.

 

इमेज सोर्स: गूगल

 


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