Feb 8, 2018

जगजीत सिंह




अब किसी से क्या कहें…
अपने दिल की दास्ताँ…।
बस खुदा का शुक्र है…
जो भी हुआ अच्छा हुआ…।
तुमने दिल की बात कह दी…
आज ये अच्छा हुआ… ।

जब भी गज़ल- गायकी की बात होती है. जगजीत सिंह से ही बातचीत की शुरुआत होती है. हो भी क्यों ना ? गजल को आम आदमी के बीच लोकप्रिय बनाने में जगजीत सिंह का योगदान हिंदुस्तान कैसे भूल सकता है? ग़ज़ल के महानायक जगजीत सिंह आज 8 फरवरी के दिन ही जन्मे थे. आज चाहे वो हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी मखमली आवाज आज भी हमारे जीवन में गुलाब की तरह महकती है.

आइये जानते हैं गज़ल की इस महान आत्मा के बारे में.
1. जगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी 1941 को राजस्थान के श्रीगंगानगर में हुआ था.

2. उनकी Schooling खालसा स्कूल, श्रीगंगानगर में हुई. जालंधर के DAV कॉलेज से उन्होंने ग्रेजुएशन किया और हरियाणा की Kurukshetra University से उन्होंने हिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन की.

3. Kurukshetra University के उस समय के कुलपति प्रोफ़ेसर सूरजभान ने जगजीत सिंह जी की संगीत की प्रतिभा को भांप लिया और उनको म्यूजिक के फ़ील्ड में आगे बढ़ने के लिए उत्साहित किया। उनके मोटिवेशन से जगजीत 1965 में मुंबई चले आये.

4. जगजीत सिंह ने अपनी संगीत समझ को गहराई देने के लिए पंडित छगन लाल शर्मा के मार्गदर्शन में दो साल तक शास्त्रीय संगीत सीखा. उसके बाद उन्हें उस्ताद जमाल ख़ान साहब से ख्याल, ठुमरी और ध्रुपद की बारीकियां सीखने का अवसर भी प्राप्त हुआ.

5. अब उनके संघर्ष करने की बारी आ चुकी थी. मुंबई में शुरुआती दिनों में वो पेइंग गेस्ट के तौर पर रहे.

6. शुरू में पेट भरने के लिए वो विज्ञापनों के लिए जिंगल्स गाते और शादी या किसी फंक्शन में अपनी प्रस्तुति देकर  अपनी रोज़ी रोटी का जुगाड़ करते.

7. 1967 के दिनों में उनको मुलाकात चित्रा जी से हुई. दोनों को एक दूसरे का साथ अच्छा लगा और 1969 में दोनों ने शादी कर ली.

8. शुरू के दिनों में उन्हें कॉलेज स्टूडेंट्स की चॉइस के गाने ही गाने पड़ते थे क्योंकि शास्त्रीय संगीत को सुनने वाली ऑडियंस अभी जगजीत सिंह की रेंज से बाहर थी.

9. फिर एक दिन जगजीत का सितारा चमकने का दिन आ ही गया. मशहूर म्यूज़िक कंपनी H.M.V. को उस वक़्त एक क्लासिकल संगीत एल्बम बनानी थी. जगजीत ने मौका नहीं गवांया और नतीज़ा ये रहा कि 1973 में उनका पहला एलबम ‘द अनफ़ॉरगेटेबल्स’ रिलीज़ हुआ और सुपरहिट रहा. अब जगजीत सिंह का नाम और कद म्यूजिक इंडस्ट्री में बढ़ने लगा.

10. जगजीत सिंह गज़ल को आम आदमी तक ले जाना चाहते थे. उन्होंने इसके लिए गायकी में खूब Experiments भी किये. इस बात के लिये उन्हें उस समय के दिग्गजों की आलोचना भी सहनी पड़ी परन्तु वो अपना काम करते रहे.

11.  जगजीत साहब ने मीरो-ग़ालिब, फ़ैज-फ़िराक़, बशीर बद्र, गुलज़ार, निदा फ़ाज़ली और जावेद अख़्तर जैसे महान शायरों की गज़लों को अपनी मखमली आवाज़ दी.

12.  लता जी के साथ उन्होंने एल्बम ‘सजदा’ की, जो बहुत पसंद की गयी. निदा फ़ाज़ली के साथ एलबम ‘इनसाइट’ और जावेद साहब के साथ ‘सिलसिले’ सुपरहिट रहा.

13.  गुलज़ार के साथ उनकी दोस्ती भी एक मिसाल बनी. उनके साथ जगजीत सिंह ने ‘मिर्ज़ा ग़ालिब’, ‘मरासिम’‘, कहकशां, कोई बात चले’ और डिफ़रेंट स्ट्रोक्स जैसी Superduper ग़ज़ल एल्बम बनाई.

14. जिंदगी का सफ़र लेकिन सबके लिए हमेशा छावं नहीं देता. जगजीत सिंह को भी जिंदगी की कठिन परीक्षा देनी पड़ी. उनके इकलौते बेटे विवेक सिंह की साल 1990 में एक कार दुर्घटना में मौत हो गई. अपने बेटे की मौत से जगजीत सिंह टूट गए. वो सालों तक सदमे में रहे और  इस हादसे से उबरने में उन्हें काफी वक्त लगा.

15.  जगजीत सिंह ने न केवल हिंदी बल्कि पंजाबी, बंगाली, गुजराती और नेपाली भाषाओं में गाना गाकर हर वर्ग के श्रोता को अपना दीवाना बना लिया.

16.   ग़ज़ल गायकी में उनके योगदान को सम्मान देते हुए सरकार ने उन्हें पद्मश्री और पद्मविभूषण से भी नवाजा.

17.   अक्टूबर 10, 2011 को जगजीत सिंह साहब ने आखिरी सांसें ली.

18.  जगजीत सिंह ऐसे फनकार थे जिनकी तुलना किसी से करना जैसे सूरज को रोशनी दिखाने जैसा होगा. मोहब्बत के अलफ़ाज़, ज़ज्बात को बयाँ करना, और जुदाई के दर्द को सुरों में ढालना कोई जगजीत साहब से सीखे.

19. वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी.....तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो...तेरे आने की जब ख़बर महके....पत्थर के ख़ुदा, पत्थर के सनम....न जाने कितनी अमर गज़ल सुना गए जगजीत साहब. सुन कर लगता है कि हम सब की जिंदगी मानो जी हो जगजीत साहब ने....अकेले.


आज का ये आर्टिकल इस महान व्यक्तित्व को समर्पित.






बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पद्मावत



'पद्मावत' फ़िल्म ने बना डाले कई Records

1. संजय लीला भंसाली की 'पद्मावत' अब देश की 8वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बन गई है. बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के मामले में इसने शाहरुख़ खान की 'चेन्नई एक्सप्रेस' को भी पीछे छोड़ दिया है.

2. फिल्म 'पद्मावत' ने रिलीज के दूसरे ही सप्ताह में 400 करोड़ का आंकड़ा पार कर डाला है.

3. वैसे तो बॉक्स ऑफिस पर सलमान, शाहरुख, और आमिर खान की फिल्मों का जलवा रहता है. लेकिन इनकी फिल्मों और 'बाहुबली - 2' के बाद 'पद्मावत' ही पहली ऐसी फ़िल्म है जिसने 400 करोड़ के क्लब में अपनी जगह पक्की की है.

4. जिस रफ्तार से फिल्म बॉक्स ऑफिस पर दौड़ लगा रही है, उसको देख कर लग रहा है कि ये जल्दी ही 500 करोड़ के क्लब में अपनी जगह बना लेगी.

5.  गौरतलब है कि कड़े विरोध के बाद रिलीज़ हुई ‘पद्मावत’ कई राज्यों में रिलीज़ भी नहीं हो सकी थी. इसके बावजूद भी फ़िल्म का इतना चलना एक हैरानी माना जा रहा है.

6.  फ़िल्म के डायरेक्शन और कलाकारों के अभिनय को भी ख़ूब तारीफ़े मिल रही है. कुल मिलाकर भंसाली की इस फ़िल्म को दर्शक पसंद कर रहे हैं और विवादों को पीछे छोड़ फिल्म अब सफ़लता की पटरी पर सरपट दौड़ रही है.


आइये नज़र डाले उन बेहतरीन टॉप 10 बॉलीवुड फ़िल्मों पर जिन्होंने वर्ल्डवाइड अब तक शानदार बिज़नेस किये हैं.
      
1. फ़िल्म 'बाहुबली: द कन्क्लूजन' - 802 करोड़ रु.
2. फ़िल्म 'दंगल' - 702 करोड़ रु.
3. फ़िल्म 'पीके' - 616 करोड़ रु.
4. फ़िल्म 'बजरंगी भाईजान' - 604 करोड़ रु.
5. फ़िल्म 'सुल्तान' - 577 करोड़ रु.
6. फ़िल्म 'टाइगर जिंदा है' - 555 करोड़ रु.
7. फ़िल्म 'धूम 3' - 524 करोड़ रु.
8. फ़िल्म 'पद्मावत' – करीब 415 करोड़ रु.
9. फ़िल्म 'चेन्नई एक्सप्रेस' - 396 करोड़ रु.
10. फ़िल्म 'दिलवाले' - 372 करोड़ रु.


स्त्रोत:वेरियस

Feb 7, 2018

Google और NCERT



भारतीय स्कूलों में Internet Safety को बढ़ाने और ICT के बेहतर प्रचार-प्रसार के लिए Google और NCERT ने एक tie-up किया है. इस Joint Effort का मुख्य मकसद है “हर एक बच्चे के लिए इंटरनेट एक safe जगह बन सके और बच्चे के विकास में Digital Technology मददगार साबित हो”.

आइये जाने क्या है इस कार्यक्रम के सही मायने.
1.  NCERT के Syllabus में Internet Safety से जुड़े Modules शामिल किये जायेंगे.
2.  भारत के 1.4 Million Schools में ये कार्यक्रम लांच होगा. NCERT की Books में Digital Technology को शामिल किया जायेगा.
3.  इस कार्यक्रम का Main Motive “Internet को Students के लिए एक safe जगह बनाना है“, जहां वो Digitalization से सही मायनों में परिचित हो सकें.
4. इस कार्यक्रम को नाम दिया गया है – ‘A Course on Digital Citizenship and Safety in the ICT (Information and communication technology)’.
5.  Class 1st से Class 12th तक के सभी Students को ज़िम्मेदार Digital Citizen बनाना भी इस कार्यक्रम का Focus रहेगा.
6.  Student को Classrooms में Internet Safety से जुड़े Social, Ethical और Legal issues से परिचित करवाया जायेगा ताकि वो टेक्नोलॉजी को सही तरीके से इस्तेमाल करना जान सके.
7.  Digital Education को बढावा देने के लिए Google ने School Teachers के लिए भी एक Curriculum तैयार किया है. इसकी मदद से Teachers भी Students को एक अच्छा Digital Citizen बनाने में मदद करेंगे.
8.  इस कार्यक्रम में इंटरनेट के इस्तेमाल, उनसे जुड़े Positive और Negative Aspects को Students के साथ Share किया जायेगा ताकि वो इंटरनेट को बेहतर तरीके से Use करना सीख सकें.
9. इंटरनेट के बढ़ते खतरों, Cyber Crime और Cyber Security को समझाना भी इस Curriculum का एक अहम हिस्सा होगा.

देखा जाये तो Google का ये Initiative डिजिटल इंडिया Campaign को सही दिशा देने में मील का पत्थर साबित हो सकता है, बशर्ते हमारे Schools इसको सही तरीके से लागू करने की दिशा में आगे बढ़े.



Feb 3, 2018

पैरामेडिकल जॉब्स



MBBS में एडमिशन के सपने हर मेडिकल स्टूडेंट देखता है. उसके लिए भरपूर मेहनत भी करता है. कोचिंग भी लेता है. लेकिन लाखों स्टूडेंट्स के पीछे कुछ हजारों Seats ही MBBS की होती हैं. 

ऐसे में कई बार स्टूडेंट्स MBBS एंट्रेंस qualify करने में चूक जाते हैं और फिर उन्हें लगता है कि अब वो क्या करें? फिर वो डिप्रेशन में आ जाते हैं. आप बिलकुल ऐसा न करें. घबराने की कोई जरुरत नहीं हैं. करोड़ों लोग इस दुनिया में रहते हैं और हर कोई MBBS नहीं कर सकता. इसलिए निराश बिलकुल नहीं होना है. 

अगर आप MBBS में एडमिशन नहीं ले पाए तो मेडिकल फील्ड में कई ऐसे प्रोग्राम हैं जिनमे आप अपना अपना शानदार भविष्य बना सकते हैं. पैरामेडिकल साइंस भी उनमे से एक है. 

अगर आप लोगों की सेवा करने के साथ-साथ अपना भविष्य भी बनाना चाहते हैं, तो फिर आप पैरामेडिकल के क्षेत्र में खुद को आजमा सकते हैं.

ये वर्ल्ड का सबसे ज्यादा सेवाभाव का पेशा है और आप हैरान होंगे कि मेडिकल फील्ड का ऐसा कोई एरिया नही, जिसमें पैरामेडिकल स्टाफ की जरूरत न पड़ती हो. पैरामेडिकल स्टाफ के बिना तो MBBS डॉक्टर्स भी काम नहीं कर सकते.

क्या है Paramedical Science?
पैरामेडिकल मेडिकल साइंस का ही एक महत्वपूर्ण फील्ड है. पैरामेडिकल स्टाफ डॉक्टर के अहम असिस्टेंट के रोल में रहते हैं. ये लोग एक्स-रे, फिजियोथेरेपी, अल्ट्रासाउंड, डायग्नोसिस और मेडिकल लैब अटेंडेंट आदि का काम  सँभालते हैं और मरीज के इलाज़ के दौरान पूरी मेडिकल टीम को सपोर्ट करते हैं.

आइये जानें कि क्या है Paramedical Career में ख़ास?
इस फील्ड में आप 10वीं और 12वीं के बाद अपनी रूचि के अनुसार अलग-अलग Courses में एडमिशन ले सकते हैं.

उदाहरण के लिए नर्सिंग, रेडियोलॉजिस्ट, ऑप्टोमेट्रिस्ट, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, ऑडियोलॉजिस्ट, स्पीच थेरेपिस्ट, ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट, मल्टीपर्पस हेल्थ वर्कर, मेडिकल लैब असिस्टेंट जैसे कोर्स को कर के आप मानव सेवा के साथ-साथ अच्छी कमाई कर सकते हैं. भारत के अलावा विदेशों में भी पैरामेडिकल स्टाफ़ की बहुत ज्यादा डिमांड रहती है और हमेशा रहेगी.

1.  कॉर्पोरेट हेल्थ केयर सेंटरों के उभर कर आने से भारत में ही 2020 तक लगभग 12 लाख से ज्यादा पैरामेडिकल स्टाफ की जरुरत होगी. अगर आप मेहनत और लगन से काम करना सीख गए तो कभी बेरोजगार नहीं होंगे.

2.  अगर आप विदेश में सेटल होना चाहते हैं तो भी पैरामेडिकल फील्ड आपको बहुत सहारा देगा. आप हैरान होंगे ये जानकर कि पूरे विश्व में लगभग 25% पैरामेडिकल स्टाफ भारतीय होते हैं. देखिये, कितना Scope है आपके लिए. 2020 तक दुनिया को 43% भारतीय पैरामेडिकल स्टाफ की जरुरत होगी. यूरोप के देशों में भारतीय पैरामेडिकल स्टाफ को बहुत अहमियत दी जाती है क्योंकि हम भारतीय सेवाभाव में पूरे वर्ल्ड में नंबर 1 होते हैं.


3.  अगर आप इस क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, तो आप 10वीं या फिर 12वीं या Graduation के बाद पैरामेडिकल के अपने पसंदीदा कोर्स में एडमिशन लेकर अपना करियर संवार सकते हैं. शुरुआती दौर में प्राइवेट सेक्टर में 12-15,000 रूपए से आपकी नौकरी शुरू होती है. सरकारी अस्पतालों में मासिक सैलरी 35-40,000 रुपये तक होती है. विदेश में काम करते हैं तो लगभग 1 लाख रुपये तक की सैलरी से शुरुआत हो सकती है. जैसे-जैसे आपका Experience बढेगा आपकी सैलरी में भी इन्क्रीमेंट होता रहेगा.

4.  इस फील्ड में काम काम करने के लिए आपमें कुछ खासियतें जरुर होनी चाहियें. जैसे कि कम्युनिकेशन स्किल्स, शांत स्वभाव, टाइम मैनेजमेंट, लर्निंग एबिलिटी, पॉजिटिव थिंकिंग आदि.


5.  अधिक जानकारी के लिए पैरामेडिकल कोर्सेस से जुड़े अच्छे संस्थानों की जानकारी प्राप्त करते रहिये. आप केंद्रीय सरकार द्वारा स्थापित संस्था की वेबसाइट paramedicalcouncilofindia.org पर क्लिक करके भी जानकारी पा सकते हैं.



बेस्ट ऑफ़ लक. क्या पता, आप सबकी सेवा करते हुए खुश रहने के लिए ही पैदा हुए हों?

Feb 2, 2018

किड्स एंड TV




पहले और अब के वातावरण, टेक्नोलॉजी, लाइफ-स्टाइल और एजुकेशन में पल-पल होते बदलावों का असर हमारे बच्चों पर होना ही है. ख़ासकर टेक्नोलॉजी में आई क्रांति ने संयुक्त पारिवारिक संस्कारों से एकल स्मार्टफोन संस्कारों की तरफ तेज़ी से कदम बढ़ा दिए हैं.

अब हर चीज़ ऑनलाइन उपलब्ध हो रही है. आसानी से उपलब्ध हो रही है तो सुविधाएं बढ़ी हैं. आदतों में चेंज आना उसी परिवर्तन का एक हिस्सा माना जा सकता है.

इस चेंज को स्वीकार करने की ज़रूरत है. पर साथ ही साथ इस बात को भी ध्यान में रखना होगा की आप अपनी भावी पीढ़ी को किस रूप में देखना चाहेंगे ? ख़ासकर जब आप बुजुर्ग की केटेगरी में प्रवेश करेंगे.

विषय रोचक है. समय की कमी हो तो बोरिंग भी लग सकता है. लेकिन आप इसे चाह के भी इग्नोर नहीं कर सकते. सोचना आपने है. समझना आपने है. क्योंकि बच्चों को सही आकार उनके माता-पिता से बेहतर और कोई नहीं दे सकता.

फिलहाल जानते हैं की आज से कुछ साल पहले के और आज के किड्स में क्या कॉमन है? और क्या चेंज आ रहे हैं? और आख़िरकार बच्चें होते क्या हैं?

दुनिया का हर बच्चा इनोसेंट है. हर बच्चे की नेचर अलग-अलग है. किसी को कोई काम अच्छा लगता है तो किसी को कोई दूसरा काम. हर बच्चा इस दुनिया को एक अलग नजरिये से देखता है. आप भी उनको ऐसे ही देखना शुरू कीजिये. तुलना करने से कही उसका बचपन तो ख़त्म नहीं हो रहा?

हर बच्चे के शौक अलग-अलग होते हैं. बातों और चीज़ों को एक्सप्रेस करना या चीज़ों का कलेक्शन करना सभी बच्चों को अच्छा लगता है. मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि एक्सप्रेस करना और कलेक्शन करने का स्वभाव बच्चों की मेंटल और इमोशनल स्टेज को शो करता है. ऐसी एक्टिविटी बच्चों की मेंटल एबिलिटी बढाने में भी मददगार होती देखी गयी है.

कुछ बच्चों को कार्टून्स का कलेक्शन करना अच्छा लगता है तो कुछ को इरेज़र-पेंसिलों का, कुछ को रंगीन पन्नियाँ तो कुछ को पुरानी किताबें संभाल कर रखने का शौक होता है. ऐसा बच्चे तीन कारणों से करते हैं- 1. उनको पुरानी चीज़ों से प्यार होता है या 2. वो चीज़ें कभी काम आएँगी या 3. क्रिएटिव बच्चे इन चीज़ों का यूज़ अपनी क्रिएटिविटी के काम में करते हैं.

हर माता-पिता को बच्चों को समझने के लिए उनकी एक्टिविटी पर ध्यान देना जरुरी है. उन्हें जानना होगा कि आखिर बच्चे के दिमाग में उस समय क्या चल रहा है और वह इन चीजों का कलेक्शन क्यों कर रहा है? इससे न केवल बच्चे को अच्छा लगता है, वहीँ आपको भी ये समझने में आसानी हो जाती है कि आखिरकार बच्चे को किस डायरेक्शन में आगे बढ़ाना चाहिए.  

कुछ ऐसे सवाल जिसके आंसर एज ऐ पैरेंट आपको पता होते हैं, पर क्या आप उन आंसर को अप्लाई करते हैं या अवॉयड कर जाते हैं, कारण चाहे जो भी हो.

1.  बच्चे स्कूल से घर वापस आते ही सबसे पहले अपना फैवरेट कार्टून देखना शुरू कर देते हैं. टी.वी देखने के अलावा उन्हें कोई और काम नजर ही नहीं आता. रिसर्च कहती है कि कार्टून देखने से बच्चों की काल्पनिक शक्ति पर बहुत गलत प्रभाव पड़ रहा है. वे रियल लाइफ से दूर होते जा रहे हैं. आपको भी पता है की ये सच है. आप तब क्या उपाय तलाशते हैं?

2.  टीवी देखने से आँखों पर ख़राब इफ़ेक्ट भी पड़ता है. कम उम्र में भी बच्चे की आँखों पर चश्मा लग जाता है. आप तब क्या उपाय तलाशते हैं?


3.  टीवी देखते हुए, खासकर कार्टून देखते हुए खाने-पीने की आदतों में भी बदलाव आ जाता है. अधिकतर कार्टून करेक्टर फ़ास्ट-फ़ूड, बर्गर, समोसे आदि खाते दिखाई देते हैं. अब बच्चें क्या करें? कभी-कभी अलग सा खाना ठीक है, पर एक बार आदत हो गयी तो? कैसा शरीर बनेगा आपके बच्चे का? आप तब क्या उपाय तलाशते हैं?

4.  लड़ाई, झगडा, हिंसा वाले कार्टून देख कर बच्चे चिडचिडे हो सकते हैं. मारपीट करना शुरू कर देते हैं. आप तब क्या उपाय तलाशते हैं?


5.  आप वर्किंग हैं या घर के काम में बेहद बिजी हैं. बच्चे के लिए समय नहीं निकल पा रहे. वो कोई सवाल न करे या शरारत न करे तो आपने उसे कार्टून देखने के लिए टीवी का रिमोट थमा दिया. आपका कोई दोष नहीं लेकिन बच्चे को टीवी की लत लग चुकी है. आप तब क्या उपाय तलाशते हैं?


ऐसा नहीं है कि आपको उपाय पता नहीं हों. आप बेहतर जानते हैं क्योंकि बच्चे के माता-पिता हैं. बस उन उपायों को रियल लाइफ में अपनाइए और अपने बच्चों को भी अपने जैसा रियल बनाइये. फिर जब आप बुजुर्ग होंगे तो आपको किसी बात का दुःख नहीं होगा.

NET 2018



CBSE NET (राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा) 2018 की नोटिफिकेशन ज़ारी

1.  पात्रता परीक्षा देने वाले स्टूडेंट्स के लिए खुशखबरी.

2.  CBSE NET (राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा) 8 जुलाई 2018 को आयोजित की जाएगी.

3.  Online फॉर्म 6 मार्च से 5 अप्रैल तक भर सकतें हैं.

4.  पहले जहां स्टूडेंट्स को 9.30 AM से 4.45 PM तक पेपर देने रुकना पड़ता था और पूरा दिन लग जाता था, वहीँ अब स्टूडेंट्स 1 PM तक फ्री हो जायेंगे. CBSE ने पेपर के पैटर्न में पॉजिटिव बदलाव कर दिया है.

5.  अब स्टूडेंट्स को तीन पेपर की बजाय केवल दो ही पेपर देने होंगे. पहला पेपर 1 घंटे (9.30 AM -10.30 AM) और दूसरा पेपर 2 घंटे (11 AM -1 PM) का होगा.

6.  पहले पेपर में 50 MCQs और दुसरे पेपर में 100 MCQs पूछे जायेंगे. हर सवाल 2 Marks का होगा. यानि पहला पेपर 100 Marks का और दूसरा 200 Marks का. टोटल 300 Marks की परीक्षा. सभी सवाल करने Compulsory होंगे.

7.  पहले पेपर में Reasoning Ability, Comprehension, Divergent Thinking और General Knowledge से जुड़े सवाल पूछे जायेंगे वही दुसरे पेपर में आपके Subject Based सवाल होंगे.

8.  अधिक जानकारी के लिए https://cbsenet.nic.in पर अपडेट लेते रहिये.

9.  Golden Chance है आपके पास. अच्छे से NET Exam की प्लानिंग और तैयारी शुरू करें.



टीम मैजिक की तरफ से आप सभी को Exam के लिए Best of Luck.

म्यूजिक लवर मेंढक




पूरे संसार में मेंढकों की लगभग 5000 प्रजातियाँ पाई जाती हैं.

मेंढक अपनी स्किन से ही पानी पी सकते हैं.

मेंढक अपनी लम्बाई से 20-30 गुना लम्बी जम्प मार सकते हैं.

नर मेंढक की लम्बाई मादा मेंढक से छोटी होती है.

मेंढक जमीन और पानी दोनों जगहों पर रह सकतें हैं. पानी में इनकी लाइफ ज्यादा रहती है. पर ये समुंदर में नहीं रह सकते.

कुछ केयरिंग नर मेढक अपने बच्चों के व्यस्क होने तक उनको अपनी पीठ पर ही रखते हैं.

“गोल्डन डार्क फ्रॉग” दुनिया का सबसे जहरीला मेंढक माना गया है.

रेगिस्तानी मेंढक कई सालों तक बिना पानी के भी रह सकता है. इट नॉव्स हाऊ टू सर्वाइव.

“क्यूबन ड्‍वार्क” दुनिया का सबसे छोटा मेंढक माना जाता है. ये क्यूबा से बिलोंग करता है.

“गोलियथ” मेंढक दुनिया का सबसे बड़ा मेंढक माना जाता है. ये अफ्रीका से बिलोंग करता है. लगभग 3.5 किलोग्राम वजनी और 30 सेंटीमीटर लम्बा.

अमेजन नदी के पास चिड़िया की शेप वाले और हरे रंग से लाल रंग में बदल जाने वाले मेंढक भी रहते हैं. लाल रंग में बदलना मतलब बारिश आने के संकेत. हर्बल ज्योतिषी होते हैं ये मेंढक.

दो सिंग वाले खुरदरे मेंढक एशिया, ब्राजील और अर्जेंटीना में मिलते हैं.

लाल रंग के सुंदर मेंढक दक्षिण अफ्रीका के जंगलों में होते हैं और पता है, उनकी आवाज कैसी होती है? - घोड़े की हिनहिनाहट जैसी.

कुछ म्यूजिक लविंग मेंढक भी होते हैं. उनकी आवाज़ ऐसी जैसे कोई बांसुरी बजा रह हो. ये प्यारे मेंढक थाईलैंड में मिलते हैं. कभी वहां जाएँ तो इनसे जरुर मिलिएगा.

मेंढक की औसत लाइफ 10-12 साल की होती है. वैसे कुछ मेंढक 22-35 साल भी जिन्दा रहते देखे गए हैं.

अफ्रीका के कुछ मेंढक बेहद खतरनाक भी होते हैं. इन्हें एरो मेंढक कहा जाता है.

अफ्रीका में ही ब्राई” ब्रांड के मेंढक ऐसे भी पाए गए हैं जो 6 फुट के सांप को भी निगल जायें.


तो ये थे कुछ नेचुरल मेंढक जो अलग- अलग व्यवहार दिखाते हैं.


और हाँ, बारिश में मेंढकों का उछलना-कूदना कभी मिस न करें. क्या पता "मेंढक कल हो ना हो"??

Feb 1, 2018

Birthday Wish



परमात्मा ने हम सबको अलग-अलग जगह पैदा किया. हमें रहने की अलग-अलग परिस्थितियाँ दी. उसका उद्देश्य होगा कि हम अलग-अलग रह कर भी एक दुसरे को समझ सकें और दुनिया को और खुबसूरत बनाएं. 

उस प्रभु ने हमें माँ-बाप दिए, रिश्तेदार दिए और कुछ प्यारे और शानदार दोस्त भी जो वक़्त-बेवक्त हमारे सुख-दुःख में हमारे लिए खडें हो सकें. 

उसने हमें मानवता दी, सौभाग्य दिया कि हम इस यूनिवर्स को देख सकें और सभी जीवों के अलग-अलग होने के कारण जान पाएं और इस विभिन्नता का आनंद उठाएं. 

सबसे शानदार बात ये है कि उस परमपिता ने सबको अलग-अलग खूबियाँ दी हैं. ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि हम किस दिन जन्मे. मतलब ये कि हम किस दिन पैदा हुए थे उससे हमारे स्वभाव और व्यवहार की ख़ासियत का भी पता चल सकता है. 

सप्ताह में 7 दिन होते हैं और हर दिन अलग होता है, ठीक उसी तरह हर व्यक्ति का स्वभाव भी अलग हो सकता है. हां, ये ज़रूर है की हम अपनी थिंकिंग के द्वारा भी अपने व्यवहार को पॉजिटिव या नेगेटिव बना सकते हैं. 

आइये, देखते हैं कि आप किस दिन पैदा हुए और उस दिन के हिसाब से आपका मूल स्वभाव कैसा हो सकता है.

रविवार को पैदा हुए व्यक्ति –
आप सामान्य तौर पर भाग्यशाली होते हैं. कम बोलते हैं. जल्दबाज़ी में कार्य करना पसंद नहीं करते. कला एवं शिक्षा के क्षेत्र में आगे रहते हैं. धर्म में भी रूचि रखते हैं. रिश्तेदारों और दोस्तों को भी खुश रखतें हैं. नेतृत्व करने की शानदार क्षमता रखतें हैं और बेहतर परिणाम देते हैं.

सोमवार को पैदा हुए व्यक्ति
आप हमेशा चर्चा का विषय बने रहते हैं. बुद्धिमान, कला प्रेमी और बहादुर होते हैं. हंसमुख होते हैं और काफी मीठा बोलते हैं. अक्सर कठिनाइयों से रुबरू होते रहते हैं. आपका मन चंचल रहता है और विचार बदलते रहते हैं. सुख-दुख में एक जैसे रहते हैं। आपकी याददाश्त बहुत तेज होती है. धैर्य की कमी होती है. पारिवारिक जीवन अच्छा नहीं रहता.

मंगलवार को पैदा हुए व्यक्ति –
आप अनुशासनप्रिय, ऊर्जावान, बहादुर, क्रोधी और नए विचारों का समर्थन करने वाले होते हैं. सभी बाधाओं को पार कर हमेशा प्रगति करते हैं. अपनी प्रशंसा सुनने के बहुत इच्छुक रहते हैं. पारिवारिक  जीवन में समय-समय पर दिक्कतों का सामना करते है.

बुधवार को पैदा हुए व्यक्ति –
सब लोग आपको पसंद करते हैं. आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं. तेज बुद्धि के मालिक हैं. वाकपटुता में माहिर हैं. माता-पिता और भाई-बहनों से, दोस्तों से बहुत प्यार करते हैं. सभी विपत्तियों को हरा कर बाहर निकल आते हैं. धन कमाने में कामयाब होते हैं.

गुरुवार को पैदा हुए व्यक्ति –
आप महत्वाकांक्षी हैं. आपका स्वभाव गंभीर होता है. आप किसी भी मुश्किल समय का सामना बड़ी ही समझदारी और साहस के साथ करते हैं। आपके तर्क के आगे किसी का टिक पाना मुश्किल है. आप अपने विचारों और भावनाओं को दूसरे के सामने अच्छी तरह से पेश करते हैं. आपसे लोग जल्दी प्रभावित हो जाते हैं। आप दोस्ती भी अच्छी संगत वालों से ही करना पसंद करते हैं.

शुक्रवार को पैदा हुए व्यक्ति –
आपकी वाणी में मधुरता और सरलता होती है. आप वाद-विवाद करने वाले से नफरत तक कर बैठते हैं. मनोरंजन के साधनों पर अधिक खर्च करते हैं जिससे आर्थिक संतुलन बिगड़ सकता है. ऐश्वर्य से भरा जीवन आपको अच्छा लगता है. कला के क्षेत्र में अपनी छाप छोड सकते हैं. प्रेम के मामले में एक जगह पर नहीं टिक पाते. स्वभाव में ईर्ष्या अधिक होती है. वैवाहिक जीवन सफल रहता है.

शनिवार को पैदा हुए व्यक्ति –  
आपके जीवन में कितने ही कष्ट क्यों न आएं, अपने हंसमुख स्वभाव के कारण आप विचलित नहीं होते. आप थोड़े आलसी और संकोची हैं. कार्य की योजना तो बनाते हैं लेकिन उसके अनुरूप कार्य नहीं कर पाते. दोस्ती करते वक्त सावधानी बरतें. परिवार वालों और रिश्तेदारों से भी आपको कम ही सुख मिल पाता है.

आप सभी को हैप्पी बर्थडे विश.