Apr 7, 2019

आज तुम्हें गए पूरा एक महीना हो गया.






प्यारी माँ,

आज तुम्हें गए पूरा एक महीना हो गया

और

इन 30 दिनों में मैंने पिछले 4 दशक याद किए,

तुम्हारे आशीर्वाद के 40 साल

तुम्हारे दुलार के हजारों दिन.



ये अपने आप हुआ

और

मुझे अक्सर ऐसा लगता है

तुम कहीं चले गए हो बस,

मिटे नहीं हो, मिट सकते ही नहीं.




मुझे याद है

तुम्हारी आखिरी धड़कन की आवाज,

आँखों से बहते तुम्हारे वो बिन बोले शब्द

जो वेंटीलेटर से निकल कर जुबां तक नहीं पहुँच सके.



अपनी मौत से ठीक पहले भी,

तुमने वो ही कहा

जो बचपन से कहा करती थी

कि

तुम मनुष्य बनना जारी रखना,

किसी का बेटा, भाई, दोस्त या पार्टनर बनने से

कहीं पहले ही.



तुम्हें इंसानियत सीखनी होगी

और

साथ ही साथ ख़ुद को ऐसा भी बनाना होगा

कि

किसी की भी गलती हो, ग़लतफ़हमी हो जाए

तो

तुम्हें उनके लिए निभाना और हारना सीख लेना होगा,

बस तभी तुम जीने का मकसद जान सकोगे,

फ़िर चाहे अकेले पड़ जाना

लेकिन इसी सच के साथ ही जीना और मरना


कि तुम यहाँ किसी और की वजह से हो

और

इस वजह की लाज़

तुम्हें ही बरकरार रखनी होगी.




माँ,

मैं ये ठीक से तो नहीं कह सकता
कि पास हुआ या फ़ेल, 

पर

तुम्हारे हिसाब का थोड़ा बहुत बनने में ही

मेहनत बहुत लगी,

कभी-कभी पैर भी डगमगाए

आज भी डगमगाते हैं

लेकिन फ़िर भी

अपनी अपूर्णता के साथ भी

मैंने तुम्हारी बातों को दिल में उतारा

और

मुझ जैसे बेवकूफ के लिए

ये कतई आसान नहीं रहा.



अब तुम दिखाई नहीं देती  

तो और भी कठिनाई है,

कोई बताने वाला ही नहीं रहा

कोई बेवजह मेरे लिए रोने वाला,

मुझे हँसाने वाला ही ना रहा.


पता है माँ

तुम्हारे जाने के बाद,

मैं छत पर जाकर खूब रोया

और

तुमसे किया आखिरी वादा मैंने तोड़ दिया.


मैं बस ये ही नहीं कर सका माँ

बाकी तुमने ही जिंदगी दी थी

और

उसे वापिस लौटाने का  
ईश्वर ने मुझसे हर संभव प्रयास करवाया,

पर आखिर में हम मैच हार गए,

तुम अपने असली वतन चली गयी 

और मैं 

चुपचाप देखता रहा, खुली गीली आँखों से.


मुझे नियति को स्वीकार करना ही पड़ा,


ये आज नहीं तो कल मेरे साथ भी होना ही है.


आपके साथ मगर सफ़र शानदार रहा


हमनें खूब आइसक्रीम और चोटें खाई,


जख्म देखे,


ख़ुद पर हँसना सीखा,


रोना सीखा


दर्द में भी दूसरों को देना सीखा


मानवता देखी 


और तरह तरह की किस्मों के लोग भी देखे,


कुछ अच्छे, शानदार, समय पर बेवजह साथ देने वाले


और कुछ नकली से दो-मुहें टाइप के लोग भी,




कुछ भी हो ये यादगार रहेगा,


आपकी इच्छा-शक्ति से लेकर 


परमात्मा के अनदेखे 


चमत्कारों की कहानी,


और प्रभु ने सदा ही हमारी लाज़ रखी.





माँ, 

मैं अपनी बेवकूफियां अब भी 

जारी रखना चाहूँगा

ताकि

तुम्हें ये सुकून और तसल्ली रहे 

कि

तुम्हारे इस आधे-अधूरे चिराग ने

अपने हिस्से की रोशनी बांटने में

कभी देर नहीं की 

वो भी बिना किसी से उम्मीद करे.


अलविदा माँ.

जाते-जाते मैं तुम्हारा शुक्रिया करना चाहता हूँ,

तुमने मुझे प्रैक्टिकल नहीं होने दिया 


और शायद ये ही वजह है कि


मेरे अंदर अब भी एक छोटा इंसान धड़कता है,

पत्थर हुए बिना


मुझे बस ये ही मेरी कमाई लगती है


जो मुझे जिंदा रखे हुए है.


मैं कुछ देर अब वापिस छत पर जाना चाहता हूँ,

वहां पर स्वर्ग है,
भाव का स्पर्श लिए हुए.



07 April 2019
1.49 PM
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(Just One Month before…Same Day….Same time…...........You took your Last Breath….MAA…..Let’s Celebrate the Pain.)


Apr 6, 2019

भिंडी की सब्जी खिलाने की क्या जरुरत थी.





“गर तुम नाराज थे तो बोल देते
भिंडी की सब्जी खिलाने की क्या जरुरत थी”

कभी- कभी कुछ ऐसे पल आते हैं
जब मैं पाता हूँ  
कि
वो नहीं देख पाया
जिसे महसूस कर लेना चाहिए था
और जो भी होता है
अक्सर हमेशा मुझसे बड़ा ही कुछ हो जाता है
और
फ़िर
आसमां की और देखते हुए
हँस पड़ता हूँ खुद पर
क्योंकि उस पल में मुझे
ख़ुद को बेवकूफ समझने में
बड़ा मज़ा आता है

और 

फ़िर हर तरफ़ मुस्कान बिखर जाती है
माहौल बदल जाता है
मैं जीरो हो जाता हूँ
और हर कोई मुझसे बड़ा.


ऐसा पहले
दिन में अक्सर होता था
और अब
ये आदत बन गयी है
अच्छा भी लगता है
इस सच को समझ लेना कि
मैं इस अस्तित्व की एक छोटी सी बूंद हूँ.


अब घर और बाहर में फ़र्क नहीं करना पड़ता
सब एक जैसा रहता है
ये शानदार है
एक जैसा एक तरफ़ा हो जाना.


जो भी हो ये असली होने जैसा फ़ील देता है
और दिल बच्चे सा धड़कता लगता है
वैसा ही समां और वैसी ही नीयत
ख़ुद को दूसरों से अलग करना मुश्किल हो जाता है
सब अपने ही लगते हैं
उल्टे सबमें ख़ुद को पाने जैसा लालच पैदा हो उठता है
और दिल कुछ खोना भी नहीं चाहता
कुछ होना भी नहीं चाहता.


और जब सब मुझसे वजूद में,
कद में और अनुभव में बड़े दिखाई देते हैं
तो इस बड़ी सी दुनिया में
हल्का होना आसान हो जाता है
किसी की नाराजगी भी अपनेपन की ताजगी देती है
इस छोटे से साँसों और भावों के सफ़र में
जीने का मज़ा लेना हो तो
एक बार
बस एक बार
बेवकूफ़ और बुद्धू
बनके तो देखिये
फ़िर हर समझदार तुम सा होना चाहेगा
क्योंकि
आपको लगता है
बस तभी
आप समझदार बनते हैं
ये दूसरों की नज़र से ख़ुद को देखने जैसा है


और
जीने के लिए
अपने भीतर मुस्कुराते हुए जीने के लिए
आपका बुद्धू होना काफ़ी है.

“आओ अब खाना खातें हैं
भिंडी टेस्टी बन पड़ी है”






चलते-चलते :

अगर आप इस धरती को ही स्वर्ग के रूप में देखना ही चाहते हैं तो आपको पहले ख़ुद को स्वर्ग में रहने लायक बनाना ही होगा. दूसरा कोई उपाय नहीं हैं. अपने, केवल अपने बारें में लगातार सोचते रह जाने की वजह से ही यहाँ नरक की सड़कें मजबूत हुई हैं. सबसे ज्यादा समझदार समझ लिए गए लोग ही सबसे ज्यादा लापरवाह और बेपरवाह पाए जातें हैं और नतीज़ा आपके सामने हैं.

अब प्रेम, इंसानियत और आनंद के समय को आना ही चाहिए. आप भी इसमें अपनी ज़िम्मेदारी और हिस्सेदारी डालिए.
फ़िर देखिये, शायद जीवन ख़िल उठे?


06 April 2019
07.43 AM
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Apr 4, 2019

सब कुछ कमाल का हो रहा है.





आज जीवन अपनी महत्वपूर्ण संभावना की ओर है
चाहे वो विज्ञान हो
कला का कोई क्षेत्र
तकनीकी उपलब्धियां
या के
अध्यात्म से जुड़े नए-नए आयाम.


सब कुछ कमाल का हो रहा है
सचमुच कमाल का
अनदेखा
अनजाना
दौड़ता हुआ
गायब होता हुआ
फ़िर से कुछ नया होता हुआ
ये जादूगरी का दौर है
मानवीय विकास और तकनीक का जबरदस्त संगम.

आज से लगभग 10-20 साल पीछे जाइए
और
देखिए आज और उस कल का डिफरेंस
लगभग सब कुछ बदलता जा रहा है
बड़ी ही तेजी से
ये ऑफलाइन से ऑनलाइन जीवन का आगाज है


आज से 20 साल बाद क्या होगा
पता नहीं
लेकिन जो भी हो
ये ज़रूर कुछ शानदार सफ़र लिए हुए होगा
मशीनें इंसानों को चलाएंगी
या कुछ और
ये रोचक होगा.


कुल मिलाकर
ये अलग- अलग रंगों से बना जीवन हो गया है
अच्छी सुविधाएं
मानसिक मजबूती
कुछ कर गुजरने का जूनून
और घर बैठे नेटवर्किंग.


आप जो मर्ज़ी काम कर सकते हैं.


हाँ, एक चीज
जो वक़्त के इस उतार-चढ़ाव से
बिलकुल भी बदली नहीं है
और
शायद कभी बदले भी ना
वो है अपने भीतर प्रेम की मिठास.


समय और प्रेम यथावत रहेंगे
और
आपके जीवन को हैरान करते रहेंगे
ये दर्द में भी मलहम का काम करेंगे
और
ख़ुशी में आपको गद्गद करते रहेंगे.


अपने जीवन काल में आप
अगर कभी प्रेम की इस संभावना को छू सके
तो फ़िर
अतीत, भविष्य और वर्तमान तीनों
आपके लिए एक बिंदु पर उपस्थित रह सकते हैं
और आप
दुनिया के विकास के साथ-साथ
अपने भीतर के आयामों के गवाह भी बने रह सकते हैं
और

गहराई से ये समझ लेना कि
जीवन के हर दौर में
आपकी साँसे सस्ती होती जाएँगी
किसी नेट पैक की तरह
ये आपके प्रेम को मजबूती देता रहेगा.
आपके अंदर छुपे प्रेम को.


04 April 2019
07.55 AM
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