May 4, 2019

इतने लोग सुधर गए, लेकिन मैं क्यूँ नहीं सुधर पायी?"






एक राजा को राज करते हुए काफी समय हो गया था। बाल भी सफ़ेद होने लगे थे। एक दिन उसने अपने दरबार में एक उत्सव रखा और अपने गुरु एवं मित्र देश के राजाओं को भी सादर आमन्त्रित किया। उत्सव को रोचक बनाने के लिए राज्य की सुप्रसिद्ध नर्तकी को भी बुलाया गया।

राजा ने कुछ स्वर्ण मुद्रायें अपने गुरु जी को भी दीं, ताकि यदि वे चाहें तो नर्तकी के अच्छे गीत व नृत्य पर वे उसे पुरस्कृत कर सकें। सारी रात नृत्य चलता रहा। 

ब्रह्म मुहूर्त की बेला आयी। नर्तकी ने देखा कि मेरा तबले वाला ऊँघ रहा है, उसको जगाने के लिए नर्तकी ने एक दोहा पढ़ा -

"बहु बीती, थोड़ी रही, पल पल गयी बिताय।
एक पलक के कारने, क्यों कलंक लग जाय।।"

अब इस दोहे का अलग-अलग व्यक्तियों ने अपने अनुरुप अलग-अलग अर्थ निकाला। तबले वाला सतर्क होकर बजाने लगा।

जब यह बात गुरु जी ने सुनी तो उन्होंने सारी मोहरें उस नर्तकी के सामने फैंक दीं।

वही दोहा नर्तकी ने फिर पढ़ा तो राजा की लड़की ने अपना नवलखा हार नर्तकी को भेंट कर दिया।

उसने फिर वही दोहा दोहराया तो राजा के पुत्र युवराज ने अपना मुकट उतारकर नर्तकी को समर्पित कर दिया।

नर्तकी फिर वही दोहा दोहराने लगी तो राजा ने कहा - "बस कर, एक दोहे से तुमने नर्तकी होकर भी सबको लूट लिया है।"

जब यह बात राजा के गुरु ने सुनी तो गुरु के नेत्रों में आँसू आ गए और गुरु जी कहने लगे - "राजा! इसको तू नर्तकी मत कह, ये तो अब मेरी गुरु बन गयी है। इसने मेरी आँखें खोल दी हैं। यह कह रही है कि मैं सारी उम्र संयमपूर्वक भक्ति करता रहा और आखिरी समय में नर्तकी का नाच देखकर अपनी साधना नष्ट करने यहाँ चला आया हूँ,  
भाई! मैं तो चला।"
यह कहकर गुरु जी तो अपना कमण्डल उठाकर जंगल की ओर चल पड़े।

राजा की लड़की ने कहा - "पिता जी! मैं जवान हो गयी हूँ। आप आँखें बन्द किए बैठे हैं और  मेरी शादी नहीं कर रहे थे और आज रात मैंने आपके महावत के साथ भागकर अपना जीवन बर्बाद कर लेना था। लेकिन इस नर्तकी ने मुझे सुमति दी है कि जल्दबाजी मत कर, कभी तो तेरी शादी होगी ही। क्यों अपने पिता को कलंकित करने पर तुली है?"

युवराज ने कहा - "पिता जी! आप वृद्ध हो चले हैं, फिर भी मुझे राज नहीं दे रहे थे। मैंने आज रात ही आपके सिपाहियों से मिलकर आपका कत्ल करवा देना था। लेकिन इस नर्तकी ने समझाया कि पगले! आज नहीं तो कल आखिर राज तो तुम्हें ही मिलना है, क्यों अपने पिता के खून का कलंक अपने सिर पर लेता है। धैर्य रख।"

जब ये सब बातें राजा ने सुनी तो राजा को भी आत्म-ज्ञान हो गया। राजा के मन में वैराग्य आ गया। राजा ने तुरन्त फैसला लिया - "क्यों ना मैं अभी युवराज का राजतिलक कर दूँ।"

फिर क्या था, उसी समय राजा ने युवराज का राजतिलक किया और अपनी पुत्री को कहा - "पुत्री!
दरबार में एक से एक राजकुमार आये हुए हैं। तुम अपनी इच्छा से किसी भी राजकुमार के गले में वरमाला डालकर पति रुप में चुन सकती हो।"

राजकुमारी ने ऐसा ही किया और राजा सब त्याग कर जंगल में गुरु की शरण में चला गया।


यह सब देखकर नर्तकी ने सोचा - 
"मेरे एक दोहे से इतने लोग सुधर गए, लेकिन मैं क्यूँ नहीं सुधर पायी?"
उसी समय नर्तकी में भी वैराग्य आ गया। 

उसने उसी समय निर्णय लिया कि आज से मैं अपना बुरा धंधा बन्द करती हूँ और कहा कि "हे प्रभु! मेरे पापों से मुझे क्षमा करना।
बस, आज से मैं सिर्फ तेरा नाम सुमिरन करुँगी।"


समझ आने की बात है, दुनिया बदलते देर नहीं लगती। एक दोहे की दो लाईनों से भी हृदय परिवर्तन हो सकता है। बस, केवल थोड़ा धैर्य रखकर चिन्तन करने की आवश्यकता है।


चलते – चलते :
प्रशंसा से पिघलना नहीं चाहिए, आलोचना से उबलना नहीं चाहिए। नि:स्वार्थ भाव से कर्म करते रहें।
क्योंकि इस धरा का, इस धरा पर, सब धरा रह जायेगा।

सोर्स एंड इमेज: इंटरनेट
  

May 3, 2019

1-2 का 4 और 4-2 का 1.





ये सवाल पूछते ही लोग
कह सकते हैं कि
तुम शायद किसी बड़ी परेशानी में हो.

क्या आपने देखा है? 
ऐसा होता रहता है.

जब आप गलती से उनसे कुछ
ऐसा पूछ बैठते हैं
जैसे कि 
"यार, लाइफ एक्चुअल में है क्या?"

ये उनके सिर में दर्द करने जैसा है.
वो कहते हैं अभी बिजी रहो,
“एट द एंड ऑफ़ लाइफ” देखेंगे,
अभी तो कमाने के दिन हैं.
वो अपनी जगह बिलकुल सहीं हैं.

“एट द एंड ऑफ़ लाइफ”
बस देखा ही जा सकता है.
एग्जिट का समय जो है.

वैसे,
हर चीज़ का एक वक़्त होता ही है.

आने का था.
रहने का है 
और फ़िर 
जाने का भी होगा.

हाँ या ना?


और हाँ,
"लाइफ़" 
इतनी बुरी भी नहीं है,
जितनी अपने नाम से लगती है.
बड़ी लाइट है. सॉफ्ट भी. 

कभी-कभी पकाऊ भी.

पर तुम्हारी है.

ये 1 या 0 नहीं है.
इस रेंज के बीच की पहेली भर.
ये आना है (1),
हँसना है,
रोना है
गुनगुनाना है
और मिट्टी हो जाना है (0).

और,
जिसे तुम पाना समझ रहे हो,
वैसी कोई केस स्टडी नहीं होती.
लाइफ 1-2 का 4 और 4-2 का 1 है.


लाइफ का सीधा सा मतलब है कि
तुम ख़ुद को जान गए हो.

कुछ इस तरह से कि
ये एहसास हो चला हो कि  
इतने बड़े ब्रह्मांड में,
अरबों लोगों के डेटा-बेस में
तुम कितने छोटे, आज़ाद 
और 
यक़ीनन स्मार्ट भी हो.

स्मार्ट या दूसरों से बेहतर होना,
मतलब किसी के सामने
अपना इंटरव्यू देकर प्रूव करना  
और
लाइफ मतलब
ख़ुद ही ख़ुद का इंटरव्यू लेना.

इंटरव्यू कॉमन है,
बस प्लेसमेंट अलग है.

थोड़ा सोचना.

फ़िर ही तुम किसी धुन पर नाच सकोगे.


वरना उससे पहले तक,

जिंदगी सिर्फ़ एक लट्टू है,
घूमती रहेगी,

लेकिन पहुचेगी 

कहीं नहीं.

और ठहरी जिंदगी,

बदबू पैदा करती है.

तुम क्या चाहते हो?

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May 2, 2019

प्रकृति का डीजे बजता है और तूफ़ान नाचने लगता है.





जब-जब
नमी से भरी हुई ढेर सारी,
गर्म हवा तेज़ी से ऊपर की
ओर उठती है,
तब तूफ़ान आते हैं.

हवा तेज़ हो जाती है,
बादल बड़े और गहरे,
आसमान में अँधेरा छाने लगता है.

बादलों के अंदर पानी के कण,
तेज़ी से रोटेट करते हैं
और
आपस में टकराते हैं.

फ़िर बिजली पैदा होती है
और
बड़ी-सी चिंगारी बन कर
धरती पर ज़ोरदार एंट्री के साथ,
अपना इंट्रोडक्शन देती है.

पहले चमक और 
बाद में गड़गड़ाहट.

लाइट की स्पीड
साउंड की स्पीड से 
ज्यादा जो होती है.

प्रोसेस को पूरा करने के लिए
अंत में
प्रकृति का डीजे बजता है
और
तूफ़ान नाचने लगता है.


फैनी आ रहा है.
लेटेस्ट लाइट
और
साउंड सिस्टम के साथ.


एनवायरनमेंट से खिलवाड़
का जवाब हमें ही देना है
और हम में से ही कितनों की ही
घर वापसी का ये अनोखा त्यौहार है.

अपना ख़याल रखना.

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May 1, 2019

अमीरी इंतजार नहीं कर सकती. जल्दी करो.





कोई सबसे रईस जब 
किसी साधारण से आदमी के पास जाता है 
तो 
उसे क्या नया पता चलता है?
आइए जानते हैं.


यूनान देश का सबसे अमीर आदमी
एक बार
उस समय के सबसे बड़े विद्वान 
सुकरात से मिला.


उन्होंने उसे थोड़ा इंतजार करने को कहा.

अमीर बोला - 
‘‘क्या आप जानते भी हैं कि मैं कौन हूं?’’

सुकरात ने कहा - 
‘‘आइए, जरा इधर बैठिए.
वो बैठ गया.
साथ में एक मेज रखी हुई थी.

सुकरात बोले – 
"चलो, अब ये समझने की कोशिश करते हैं 
कि तुम कौन हो?’’

सुकरात ने दुनिया का नक्शा उसके सामने रख दिया
और
उस अमीर आदमी से पूछा –
‘‘प्लीज बताओ, इसमें एथेंस कहां है?’’

उसने कहा - 
‘‘दुनिया के नक्शे में एथेंस तो एक बिंदु (डॉट) भर है.’’

आदमी ने एथेंस पर उंगली रखी और कहा - ‘‘ये रहा एथेंस.’’

सुकरात ने दूसरा सवाल पूछा -
‘‘प्लीज मुझे ये भी बताओ कि इस एथेंस में तुम्हारा महल कहां है?’’

आदमी परेशान.
वहां तो डॉट ही था, अब वो इस डॉट में महल कहां से बताए?

फिर सुकरात ने अंतिम सवाल किया.
कहा –
‘‘प्लीज ये तो बता दो कि उस महल में तुम कहां हो?’’

अमीर आदमी चुप.
घोर सन्नाटा. 
वो कहे तो कहे क्या?
वो नक्शे में मिल ही नहीं रहा.

सुकरात बोले -
यह नक्शा तो बस इस एक छोटी सी दुनिया का है.
ऐसी अनंत दुनिया हैं.
अनंत सूरज.
अनंत ब्रह्मांड.

और
तुम मुझसे पूछते हो 
कि
‘‘क्या आप जानते भी हैं कि मैं कौन हूं?’’
तुम हो कौन

ये तुम ही नहीं बता सके तो 
भला मैं कैसे बता सकता हूँ?


वो आदमी सिर झुका कर खड़ा हो गया.

सुकरात ने कहा - 
‘‘अब तुम जान गए होंगे
कि वास्तव में हम कुछ भी नहीं हैं.
लेकिन कुछ होने की अकड़ ही हमें पकड़े हुए है.

बस ये ही हमारा दुख है, ये ही नर्क है.


कहते हैं कि
जब वो अमीर आदमी वहां से जाने लगा
तो
सुकरात ने वो नक्शा यह कहकर गिफ्ट किया
कि इसे सदा अपने पास रखना
और
जब भी तुम्हें घमंड जकड़े
तो एक बार
ये नक्शा खोलकर देख लेना कि
कहां है एथेंस?
कहां है मेरा महल?
और फिर मैं कौन हूं?

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